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छात्रवृत्ति की राह का रोड़ा बना आधार
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झांसी। नौवीं से बारहवीं समेत अन्य पाठ्यक्रमों के छात्रों के खाते में अब तक छात्रवृत्ति नहीं आई। छात्रवृत्ति की राह में आधार सबसे बड़ा रोड़ा बनकर सामने आ रहा। बैंक खाते के साथ आधार लिंक न होने से छात्रवृत्ति जारी नहीं हो रही।
सामान्य तौर पर अक्तूबर माह से छात्रवृत्ति वितरण आरंभ हो जाता है लेकिन, इस बार करीब दिसंबर बीतने के बाद भी इसका कोई अता-पता नहीं है। समाज कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक विभाग एवं पिछड़ा वर्ग विभाग की ओर से कक्षा नौ-बारह समेत विभिन्न व्यावसायिक वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाती है। इस बार छात्रवृत्ति के नए प्रावधान में मोबाइल नंबर, आधार नंबर एवं बैंक एकांउट को एक साथ लिंक करना जरूरी कर दिया गया। इस प्रक्रिया को पूरी करने में ही छात्रों के पसीना छूट रहे। अधिकारियों के मुताबिक अब तक महज पच्चीस फीसदी छात्र ही आधार लिंक करा सके हैं। आधार लिंक में हो रही लेटलतीफी की वजह से रजिस्ट्रेशन की तारीख भी लगातार बढ़ाई जा रही। अब 10 जनवरी तक यह तिथि बढ़ा दी गई लेकिन, जनवरी माह में भी छात्रवृत्ति मिलने की संभावना कम जताई जा रही।
वहीं, दूसरी ओर कोविड-19 के प्रकोप के चलते छात्रवृत्ति के बजट में कटौती की भी आशंका जताई जा रही है। समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछली बार कक्षा नौ एवं दस के लिए 266 विद्यालयों से अनुसूचित जाति के 8225 एवं अनुसूचित जनजाति के 14 छात्रों ने आवेदन किया था, जिसमें सभी को छात्रवृत्ति मिली थी। सामान्य वर्ग के 1900 छात्रों में 1104 छात्रों को ही छात्रवृत्ति दी जा सकी। इसी तरह ग्यारहवीं एवं बारहवीं वर्ग में अनुसूचित जाति के 21999 छात्रों में 20364, अनुसूचित जनजाति के 55 में 40 छात्रों को ही छात्रवृत्ति मिली। सामान्य वर्ग के 10251 छात्रों में महज 7101 छात्रों को ही छात्रवृत्ति दी जा सकी। उम्मीद जताई जा रही इस वर्ष भी करीब 60 हजार छात्रों इन छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करेंगे। वहीं, जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार के मुताबिक इस बार आधार लिंक होने पर ही छात्रवृत्ति दी जाएगी।
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सामान्य तौर पर अक्तूबर माह से छात्रवृत्ति वितरण आरंभ हो जाता है लेकिन, इस बार करीब दिसंबर बीतने के बाद भी इसका कोई अता-पता नहीं है। समाज कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक विभाग एवं पिछड़ा वर्ग विभाग की ओर से कक्षा नौ-बारह समेत विभिन्न व्यावसायिक वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाती है। इस बार छात्रवृत्ति के नए प्रावधान में मोबाइल नंबर, आधार नंबर एवं बैंक एकांउट को एक साथ लिंक करना जरूरी कर दिया गया। इस प्रक्रिया को पूरी करने में ही छात्रों के पसीना छूट रहे। अधिकारियों के मुताबिक अब तक महज पच्चीस फीसदी छात्र ही आधार लिंक करा सके हैं। आधार लिंक में हो रही लेटलतीफी की वजह से रजिस्ट्रेशन की तारीख भी लगातार बढ़ाई जा रही। अब 10 जनवरी तक यह तिथि बढ़ा दी गई लेकिन, जनवरी माह में भी छात्रवृत्ति मिलने की संभावना कम जताई जा रही।
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वहीं, दूसरी ओर कोविड-19 के प्रकोप के चलते छात्रवृत्ति के बजट में कटौती की भी आशंका जताई जा रही है। समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछली बार कक्षा नौ एवं दस के लिए 266 विद्यालयों से अनुसूचित जाति के 8225 एवं अनुसूचित जनजाति के 14 छात्रों ने आवेदन किया था, जिसमें सभी को छात्रवृत्ति मिली थी। सामान्य वर्ग के 1900 छात्रों में 1104 छात्रों को ही छात्रवृत्ति दी जा सकी। इसी तरह ग्यारहवीं एवं बारहवीं वर्ग में अनुसूचित जाति के 21999 छात्रों में 20364, अनुसूचित जनजाति के 55 में 40 छात्रों को ही छात्रवृत्ति मिली। सामान्य वर्ग के 10251 छात्रों में महज 7101 छात्रों को ही छात्रवृत्ति दी जा सकी। उम्मीद जताई जा रही इस वर्ष भी करीब 60 हजार छात्रों इन छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करेंगे। वहीं, जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार के मुताबिक इस बार आधार लिंक होने पर ही छात्रवृत्ति दी जाएगी।
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