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एक दूसरे को रिझाता है सावन
careless protection of officer, no action
Updated Mon, 01 Aug 2016 12:24 AM IST
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sawan, jhansi hindi news
- फोटो : demo
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प्रशांत शर्मा
झांसी। सावन में रिमझिम बारिश, हल्के हवा के झोंके और चौतरफा फैली हरियाली लोगों का मन प्रफुल्लित कर देती है। इस कारण तन-मन में होने वाली रासायनिक क्रियाएं इंसान के भीतर के कुछ हार्मोंस को बढ़ा देती हैं, जिससे स्त्री, पुरुष का एक दूसरे प्रति आकर्षण बढ़ जाता है। शायद यही कारण है कि सावन पर प्रकृति और प्रेम पर अनगिनत मनमोहक गीत लिखे गए।
विशेषज्ञों के मुताबिक मनुष्य समतापी होता है। गर्मी में ठंडक और सर्दियों में गर्मी के लिए शरीर अनुकूलित होता है। इससे व्यक्ति नीरस और तनावयुक्त हो जाता है। सावन में बारिश के कारण मौसम सामान्य हो जाता है। इस मौसम में न ज्यादा गर्मी रहती है, न ज्यादा सर्दी। रिमझिम बारिश और हल्की-हल्की ठंडी बयार बहने से इंसान का शरीर शिथिल हो जाता है। ऐसे में इंसान के शरीर में होने वाली रासायनिक क्रियाएं आकर्षण पैदा करने वाले हार्मोंस को बढ़ा देती हैं। इससे स्त्री-पुरुष में एक-दूसरे के प्रति प्यार ज्यादा उमड़ने लगता है। यही नहीं, प्राकृतिक सुंदरता भी लोगों को अपनी ओर खूब रिझाती है। इसलिए सावन को प्रेम का महीना कहा गया है।
एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन पैदा करते हैं आकर्षण
मनुष्य के दिमाग में पिट्यूसरी ग्लैंड होती हैं, इससे ग्रोथ हार्मोंस निकलते हैं। यह हार्मोंस ही इंसानों में आकर्षण पैदा करते हैं। महिलाओं में आकर्षण पैदा करने वाले हार्मोंस को एस्ट्रोजन और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन बोलते हैं। यह हार्मोंस सावन के दिनों में बढ़ जाते हैं, इससे महिला-पुरुष एक-दूसरे और प्रकृति के प्रति ज्यादा आकर्षित होते हैं। - डॉ. डीएस गुप्ता, फिजीशियन, जिला अस्पताल
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बारिश में बढ़ जाते हैं फिरामोन हार्मोंस
शरीर बायोलॉजिकल क्लॉक के हिसाब से चलता है। इंसानों में फेरोमोन हार्मोंस आकर्षण बढ़ाते हैं। फेरोमोन हार्मोंस उत्सुकता भी बढ़ा देते हैं। चारो ओर हरियाली देखकर इंसान आनंद महसूस करता है। प्रकृति भी उसे रिझाती है। - डॉ. जेपी यादव, प्रवक्ता, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय
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झांसी। सावन में रिमझिम बारिश, हल्के हवा के झोंके और चौतरफा फैली हरियाली लोगों का मन प्रफुल्लित कर देती है। इस कारण तन-मन में होने वाली रासायनिक क्रियाएं इंसान के भीतर के कुछ हार्मोंस को बढ़ा देती हैं, जिससे स्त्री, पुरुष का एक दूसरे प्रति आकर्षण बढ़ जाता है। शायद यही कारण है कि सावन पर प्रकृति और प्रेम पर अनगिनत मनमोहक गीत लिखे गए।
विशेषज्ञों के मुताबिक मनुष्य समतापी होता है। गर्मी में ठंडक और सर्दियों में गर्मी के लिए शरीर अनुकूलित होता है। इससे व्यक्ति नीरस और तनावयुक्त हो जाता है। सावन में बारिश के कारण मौसम सामान्य हो जाता है। इस मौसम में न ज्यादा गर्मी रहती है, न ज्यादा सर्दी। रिमझिम बारिश और हल्की-हल्की ठंडी बयार बहने से इंसान का शरीर शिथिल हो जाता है। ऐसे में इंसान के शरीर में होने वाली रासायनिक क्रियाएं आकर्षण पैदा करने वाले हार्मोंस को बढ़ा देती हैं। इससे स्त्री-पुरुष में एक-दूसरे के प्रति प्यार ज्यादा उमड़ने लगता है। यही नहीं, प्राकृतिक सुंदरता भी लोगों को अपनी ओर खूब रिझाती है। इसलिए सावन को प्रेम का महीना कहा गया है।
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एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन पैदा करते हैं आकर्षण
मनुष्य के दिमाग में पिट्यूसरी ग्लैंड होती हैं, इससे ग्रोथ हार्मोंस निकलते हैं। यह हार्मोंस ही इंसानों में आकर्षण पैदा करते हैं। महिलाओं में आकर्षण पैदा करने वाले हार्मोंस को एस्ट्रोजन और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन बोलते हैं। यह हार्मोंस सावन के दिनों में बढ़ जाते हैं, इससे महिला-पुरुष एक-दूसरे और प्रकृति के प्रति ज्यादा आकर्षित होते हैं। - डॉ. डीएस गुप्ता, फिजीशियन, जिला अस्पताल
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बारिश में बढ़ जाते हैं फिरामोन हार्मोंस
शरीर बायोलॉजिकल क्लॉक के हिसाब से चलता है। इंसानों में फेरोमोन हार्मोंस आकर्षण बढ़ाते हैं। फेरोमोन हार्मोंस उत्सुकता भी बढ़ा देते हैं। चारो ओर हरियाली देखकर इंसान आनंद महसूस करता है। प्रकृति भी उसे रिझाती है। - डॉ. जेपी यादव, प्रवक्ता, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय