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संपूर्णा क्लीनिक योजना नहीं चढ़ पा रही परवान, गिनी-चुनी महिलाओं की ही जांच

Sat, 24 Oct 2020 02:08 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 24 Oct 2020 02:08 AM IST
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Sampurna clinic yojna women testing
झांसी। जिला महिला अस्पताल में 30 से 60 साल की महिलाओं में होने वाले कैंसर की पहचान और बचाव के उपायों के लिए संचालित संपूर्णा क्लीनिक योजना पूरी तरह परवान नहीं चढ़ पा रही है। यहां पर गिनी-चुनी महिलाओं की ही जांच हो रही है जबकि, क्लीनिक के शुरुआती दौर में तय हुआ था कि रोजाना 20 जांचें होंगी।
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प्रदेश सरकार ने राज्य में सभी प्रमुख गैर संचारी रोगों के लिए महिलाओं की जांच और उपचार के लिए वर्ष 2015 में संपूर्णा परियोजना शुरू की। इसका उद्देश्य 30-60 वर्ष की आयु की महिलाओं में डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, कार्डियो वेस्कुलर डिजीज, सर्वाइकल कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर की जांच और प्रबंधन है। झांसी में 2017 महिला अस्पताल में भी यह क्लीनिक चालू है। यहां पर बच्चादानी के मुंह के कैंसर और अन्य बीमारियों की जांच व उपचार, स्तन कैंसर की पहचान के लिए मशीन द्वारा जांच, ह्रदय रोग के खतरों की पहचान, बीपी, वजन, खून की कमी की जांच आदि होती हैं।
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चूंकि, बुंदेलखंड में महिलाओं में होने वाले कैंसर में सबसे ज्यादा सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर पाया जाता है। ऐसे में क्लीनिक के जरिए बीमारी के पहले ही इसकी पहचान की जा सकती है। क्लीनिक के शुरुआती दौर में तय हुआ था कि यहां पर रोजाना 20 महिलाओं की जांचें होंगी लेकिन मौजूदा समय में काफी कम जांच हो रही हैं। इस मामले में सीएमएस डॉ. शाहिदा परवीन का कहना है कि कोरोना की वजह से ओपीडी में ही कम मरीज दिखाने के लिए आ रहे हैं। ऐसे में क्लीनिक में भी कम मरीजों की जांच हो रही है। मरीज बढ़ेंगे तो क्लीनिक में भी जांचें बढ़ेंगी।
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सर्वाइकल कैंसर से मृत्यु की खतरनाक दर
महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर और स्तन कैंसर जैसे गैर संचारी रोग (एनसीडी) भारत में बीमारी और मृत्यु के अधिकतम बोझ में योगदान करती हैं। हर आठ मिनट में एक महिला की मृत्यु के साथ भारत में सर्वाइकल कैंसर से मृत्यु की खतरनाक दर की रिपोर्ट दर्ज की जाती है। इसके बाद स्तन कैंसर होता है, जो भारतीय शहरों में महिलाओं में लगभग एक चौथाई कैंसर का कारण है।
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