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प्रियंका बार-बार पूछती रहीं बुंदेलखंड आखिर इतना पिछड़ा क्यों है...
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झांसी। कांग्रेस महासचिव और यूपी की प्रभारी प्रियंका वाड्रा गांधी शुक्रवार को ललितपुर और झांसी के दौरे पर रहीं। विधानसभा चुनाव से पहले उनका यह दौरा कई मायनों में सफल माना जा सकता है। उन्होंने किसानों का दुख दर्द जाना। बुंदेलखंड के राजा मर्दन सिंह के बारे में जाना। वीरांगना झलकारी बाई समेत कई अन्य जानकारियां जुटाईं। वह बार- बार एक ही सवाल कर रही थीं कि आखिर बुंदेलखंड इतना पिछड़ा क्यों है? उन्होंने दोबारा बुंदेलखंड आने का भी निर्णय लिया।
ललितपुर से झांसी आते समय कार में पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य और पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी उनके साथ थे। रास्ते में प्रियंका ने बुंदेलखंड पैकेज के बारे में जानकारी ली। उन्होंने जानना चाहा कि आखिर ऐसा क्या रहा कि इतना बड़ा पैकेज देने के बाद भी बुंदेलखंड के किसानों क ी हालत नहीं बदली। ललितपुर में वह किसानों की बदहाली से रूबरू हुईं। े उन्होंने कहा कि मृतक किसानों का कर्ज चुकाएंगे।
यही नहीं, जब उन्हें ललितपुर के अति पिछड़े गांव लखंजर और पापड़ा के बारे में बताया गया कि अभी भी वहां पर इतनी बदहाली है कि किसान एक जोड़ी कपड़े में साल भर काट लेता है तो वह चकित रह गईं। उन्होंने पर्यटन के तौर पर बुंदेेलखंड में क्या-क्या स्थल हैं और उन्हें कैसे विकसित किया जा सकता है, इसकी जानकारी ली। ललितपुर के तुवन मंदिर और महाराजा मर्दन सिंह के बारे में पूछा। इसके अलावा झांसी की वीरांगना झलकारी बाई के बारे में जानकारी जुटाई।
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उन्हें बताया गया कि महारानी लक्ष्मीबाई के साथ युद्ध में महिला सेना की अलग रेजीमेंट बनाकर झलकारी बाई ने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। प्रियंका का झांसी के किले में जाने का कार्यक्रम नहीं था, लेकिन वीरांगना झलकारी बाई और महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान के बारे में उत्सुकता के कारण उन्होंने किला देखा। वह किले में उस स्थान पर भी गईं, जहां से महारानी लक्ष्मीबाई ने छलांग लगाई थी। उन्होंने दोबारा बुंदेलखंड के दौरे पर आने को कहा है।
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ललितपुर से झांसी आते समय कार में पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य और पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी उनके साथ थे। रास्ते में प्रियंका ने बुंदेलखंड पैकेज के बारे में जानकारी ली। उन्होंने जानना चाहा कि आखिर ऐसा क्या रहा कि इतना बड़ा पैकेज देने के बाद भी बुंदेलखंड के किसानों क ी हालत नहीं बदली। ललितपुर में वह किसानों की बदहाली से रूबरू हुईं। े उन्होंने कहा कि मृतक किसानों का कर्ज चुकाएंगे।
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यही नहीं, जब उन्हें ललितपुर के अति पिछड़े गांव लखंजर और पापड़ा के बारे में बताया गया कि अभी भी वहां पर इतनी बदहाली है कि किसान एक जोड़ी कपड़े में साल भर काट लेता है तो वह चकित रह गईं। उन्होंने पर्यटन के तौर पर बुंदेेलखंड में क्या-क्या स्थल हैं और उन्हें कैसे विकसित किया जा सकता है, इसकी जानकारी ली। ललितपुर के तुवन मंदिर और महाराजा मर्दन सिंह के बारे में पूछा। इसके अलावा झांसी की वीरांगना झलकारी बाई के बारे में जानकारी जुटाई।
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उन्हें बताया गया कि महारानी लक्ष्मीबाई के साथ युद्ध में महिला सेना की अलग रेजीमेंट बनाकर झलकारी बाई ने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। प्रियंका का झांसी के किले में जाने का कार्यक्रम नहीं था, लेकिन वीरांगना झलकारी बाई और महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान के बारे में उत्सुकता के कारण उन्होंने किला देखा। वह किले में उस स्थान पर भी गईं, जहां से महारानी लक्ष्मीबाई ने छलांग लगाई थी। उन्होंने दोबारा बुंदेलखंड के दौरे पर आने को कहा है।