{"_id":"5d7e98fe8ebc3e93c02afe27","slug":"practice-talvar-bhala-for-self-defene-jhansi-news-jhs1481467100","type":"story","status":"publish","title_hn":"लाठी-भाला-तलवार चलाना सीख रहीं बालिकाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लाठी-भाला-तलवार चलाना सीख रहीं बालिकाएं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लाठी-भाला-तलवार चलाना सीख रहीं बालिकाएं
झांसी। लक्ष्मी व्यायाम मंदिर के परिसर में बालक - बालिकाएं भारत के प्राचीन व्यायाम का हुनर सीख रहे हैं। इसके साथ ही आत्मरक्षा के लिए तलवार, लाठी, भाला जैसे प्राचीन शस्त्रों का भी प्रशिक्षण बालिकाएं ले रही हैं। प्रतिभागियों का कहना है कि हमारे देश के प्राचीन व्यायाम संपूर्ण शरीर को स्वस्थ रखते हैं। मन हमेशा उत्साहित रहता हैं।
लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में आयोजित वार्षिक दस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में रविवार को प्रतिभागियों ने संगीत की धुनें बिखेर रही लेझम का अभ्यास किया। वहीं सूर्य नमस्कार के मंत्रों और उसके प्रमुख आसनों में अश्व संचलन आसन, पश्चिमोसन आदि का भी अभ्यास किया। लक्ष्मी व्यायाम मंदिर के महामंत्री अशोेक गुप्ता एवं प्रशिक्षक प्रमोद कुमार सिकौरिया ने बताया कि प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य बच्चों को अपने देश की प्राचीन व्यायाम शैलियों से अवगत कराना है। ताकि उन्हें पता चले कि उससे क्या लाभ है। प्रशिक्षक के अनुसार तलवार, लाठी, भाला चलाने से आत्म रक्षा के भाव विकसित होते हैं। बालक - बालिकाओं को गर्दन पर कैसे सीधा प्रहार करें, ढाल से कैसे वार को रोकें आदि का प्रशिक्षण दिया। इसके अलावा छोटा मुगदर चलाने से हाथ की कलाई मजबूत करने, लेझम चलाने और जिमनास्टिक का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिविर में 100 प्रतिभागी हैं। इस अवसर पर प्रमुख प्रशिक्षकोें में पवन ओझा, नरेंद्र गोस्वामी, सुनील भानु, रमाकांत शर्मा, साक्षी परिहार, कामिनी कुशवाहा, ज्योति कश्यप, ज्ञान सिंह कुशवाहा आदि रहे।
भारतीय प्राचीन व्यायाम स्वास्थ्य के लिए हमेशा बेहतर रही है। तलवार, भाला, लाठी आदि का अभ्यास आत्म रक्षा के लिए जरूरी है।
दिशा, कुशवाहा शिविर प्रतिभागी
सूर्य नमस्कार हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है। इसके नियमित अभ्यास से हमेशा स्फूर्ति रहती है। मन हमेशा उत्साहित रहता है।
धैर्य, शिविर प्रतिभागी
विज्ञापन
झांसी। लक्ष्मी व्यायाम मंदिर के परिसर में बालक - बालिकाएं भारत के प्राचीन व्यायाम का हुनर सीख रहे हैं। इसके साथ ही आत्मरक्षा के लिए तलवार, लाठी, भाला जैसे प्राचीन शस्त्रों का भी प्रशिक्षण बालिकाएं ले रही हैं। प्रतिभागियों का कहना है कि हमारे देश के प्राचीन व्यायाम संपूर्ण शरीर को स्वस्थ रखते हैं। मन हमेशा उत्साहित रहता हैं।
लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में आयोजित वार्षिक दस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में रविवार को प्रतिभागियों ने संगीत की धुनें बिखेर रही लेझम का अभ्यास किया। वहीं सूर्य नमस्कार के मंत्रों और उसके प्रमुख आसनों में अश्व संचलन आसन, पश्चिमोसन आदि का भी अभ्यास किया। लक्ष्मी व्यायाम मंदिर के महामंत्री अशोेक गुप्ता एवं प्रशिक्षक प्रमोद कुमार सिकौरिया ने बताया कि प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य बच्चों को अपने देश की प्राचीन व्यायाम शैलियों से अवगत कराना है। ताकि उन्हें पता चले कि उससे क्या लाभ है। प्रशिक्षक के अनुसार तलवार, लाठी, भाला चलाने से आत्म रक्षा के भाव विकसित होते हैं। बालक - बालिकाओं को गर्दन पर कैसे सीधा प्रहार करें, ढाल से कैसे वार को रोकें आदि का प्रशिक्षण दिया। इसके अलावा छोटा मुगदर चलाने से हाथ की कलाई मजबूत करने, लेझम चलाने और जिमनास्टिक का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिविर में 100 प्रतिभागी हैं। इस अवसर पर प्रमुख प्रशिक्षकोें में पवन ओझा, नरेंद्र गोस्वामी, सुनील भानु, रमाकांत शर्मा, साक्षी परिहार, कामिनी कुशवाहा, ज्योति कश्यप, ज्ञान सिंह कुशवाहा आदि रहे।
विज्ञापन
भारतीय प्राचीन व्यायाम स्वास्थ्य के लिए हमेशा बेहतर रही है। तलवार, भाला, लाठी आदि का अभ्यास आत्म रक्षा के लिए जरूरी है।
दिशा, कुशवाहा शिविर प्रतिभागी
सूर्य नमस्कार हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है। इसके नियमित अभ्यास से हमेशा स्फूर्ति रहती है। मन हमेशा उत्साहित रहता है।
धैर्य, शिविर प्रतिभागी