फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   PPP model

पीपीपी मॉडल पर ‘कमीशन’ की मार

Mon, 05 Oct 2015 01:31 AM IST
ब्यूरो
ब्यूरो Updated Mon, 05 Oct 2015 01:31 AM IST
विज्ञापन
बॉक्स
विज्ञापन

झांसी। नगर निगम ने अघोषित तौर पर पीपीपी मॉडल से काम कराने से तौबा कर ली है। अफसरों व कुछ सभासदों ने पीपीपी मॉडल को सीधे-सीधे कमीशन का नुकसान बताते हुए अपना विरोध जताया था। हालांकि कुछ सभासदों ने पीपीपी मॉडल को नगर निगम के  धन की बचत का साधन बताते हुए इसे जारी रखने की भी मांग की थी, लेकिन अफसरों ने उनकी मांग को दरकिनार कर दिया।

महानगर में नगर निगम द्वारा प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत कई कार्य कराए गए थे। ये वे कार्य थे, जिन्हें कराना आवश्यक तो था, लेकिन इससे नगर निगम की आय नहीं बढ़नी थी। साथ ही इन कार्यों के उमदा न होने पर आम लोगों को नुकसान भी नहीं होना था। ऐसे कार्यों का प्लान बनाकर उसे पीपीपी मॉडल के तहत कराया गया था। निगम ने कचहरी चौराहे से रिसाला चुंगी तक व रिसाला चुंगी से मेडिकल कॉलेज बाईपास तक डिवाइडर और सड़क किनारे ट्री-गार्ड लगवाए थे। यह कार्य पीपीपी मॉडल से कराया गया था।
विज्ञापन


कार्य कराने वालों ने अपने पैसों से नगर निगम द्वारा तय स्थानों पर ट्री-गार्ड लगवाए और उनपर अपना प्रचार लगाकर लाभ लिया। इस कार्य से नगर निगम का लाखों रुपये का खर्च बच गया था। बस स्टैंड पर शौचालय निर्माण, रानी लक्ष्मीबाई पार्क में यात्री शेड निर्माण आदि कई कार्य पीपीपी मॉडल से कराए गए, लेकिन अब इस व्यवस्था पर नगर निगम ने अघोषित विराम लगा दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विभागीय सूत्रों के मुताबिक पीपीपी मॉडल से होने वाले कार्यों से कमीशन नहीं मिल पा रहा था, इसी वजह से कुछ अफसरों के प्रेरित करने पर कुछ सभासदों ने इसका विरोध किया था। वहीं, कुछ सभासदों ने पीपीपी मॉडल का समर्थन भी किया था, लेकिन अफसरों ने उनकी मांग अनसुनी कर दी। पीपीपी मॉडल से नगर निगम द्वारा विवाह घर बनाने की योजना थी तथा कई अन्य कार्य भी होने थे जो अब ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं।


पीपीपी मॉडल पर रोक नहीं लगाई गई है, यह व्यवस्था जारी रखी गई है। नगर निगम की जमीन को बचाने के लिए विवाह घर बनाने की शर्त  कठिन की गईं हैं। यह तय किया गया है कि 11 सदस्यीय टीम बनाई जाएगी। टीम निरीक्षण कर तय करेगी कि जमीन देनी है या नहीं टीम की रिपोर्ट के बाद महापौर निरीक्षण करेंगी। निरीक्षण के बाद जमीन देने का प्रस्ताव सदन में रखा जाएगा। सदन से प्रस्ताव पास होने पर उसे शासन को भेजा जाएगा। शासन से निर्देश मिलने पर ही विवाह घर को जमीन आवंटित की जाएगी। इस कठिन व्यवस्था के कारण नगर निगम की जमीनों पर नजर गड़ाए लोग विवाह घर के प्लान से पीछे हट गए हैं।
-किरन राजू बुकसेलर, महापौर।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed