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जाते-जाते भी जख्म दे गया कोरोना: पोस्ट कोविड मरीजों के सूख रहे कूल्हे के जोड़, 50 से ज्यादा लोग बदलवा चुके

Fri, 29 Jul 2022 01:09 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Fri, 29 Jul 2022 01:09 AM IST
सार

कोरोना काल में लोगों ने झोलाछापों से इलाज करवाने से गुरेज नहीं की। उन्होंने तहाशा स्टेरॉयड चलाई, उसका दुष्परिणाम अब इस रूप में लोगों को देखने को मिल रहा है। मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग के प्रोफेसर डॉ. अमित सहगल ने बताया कि बहुत अधिक समय तक हाई डोज स्टेरॉयड के इस्तेमाल से कूल्हे की हड्डी के जोड़ में खून का दौरान कम हो जाता है। इससे जोड़ सूखने लगते हैं।

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Corona Virus more than 50 post covid patients changed hip joints in Jhansi Medical College
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

झांसी में पोस्ट कोविड मरीजों के कूल्हे के जोड़ सूख रहे हैं। हाल ये हैं कि अकेले मेडिकल कॉलेज में ही 50 से ज्यादा मरीजों के कूल्हे के जोड़ बदले जा चुके हैं। एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च आने की वजह से कई मरीज ऑपरेशन नहीं करवा पा रहे हैं। कोरोना के इलाज के दौरान लंबे समय तक हाई डोज स्टेरॉयड चलने से ये दिक्कत हुई है।

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कोरोना के चपेट में आ चुके कई रोगियों का गांवों में झोलाछाप ने इलाज किया। उन्होंने बेतहाशा स्टेरॉयड चलाई। कई ऐसे भी मरीजों को ये दवा दी गई, जिनको इसकी जरूरत भी नहीं थी। वहीं, नर्सिंग होम्स में भर्ती गंभीर मरीजों को लंबे समय तक स्टेरॉयड दी गई। मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग के प्रोफेसर डॉ. अमित सहगल ने बताया कि बहुत अधिक समय तक हाई डोज स्टेरॉयड के इस्तेमाल से कूल्हे की हड्डी के जोड़ में खून का दौरान कम हो जाता है। इससे जोड़ सूखने लगते हैं। इस बीमारी को एवैस्कुलर नेक्रोसिस या बोन डेथ कहते हैं। पोस्ट कोविड मरीजों में ऐसी समस्या काफी तेजी से सामने आ रही है।
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हाल ये हैं कि 25 साल के युवाओं तक के कूल्हे के जोड़ खराब हो गए हैं। युवाओं की हड्डियों में खून की चाल बढ़ाने के लिए दवाएं चलाई जा रही हैं। ताकि, आठ-दस साल वह ऐसे कूल्हे के सहारे काम चला सकें। क्योंकि, एक बार कूल्हा बदलने पर 15 से 20 साल चलता है। फिर दोबारा बदलना पड़ता है। कॉलेज में अब तक 50 रोगियों के कूल्हे बदले जा चुके हैं। कई रोगी तो पैसे न होने की वजह से सर्जरी नहीं करा पा रहे हैं। वहीं, हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि कोरोना काल से पहले 60 से अधिक आयु के लोगों में ये बीमारी ज्यादातर होती थी लेकिन अब 25 से 40 साल के भी खूब रोगी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
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इन समस्याओं का करना पड़ता सामना

  • चलने फिरने में दर्द होता
  • सही से नहीं बैठ पाते
  • पालथी मारकर नहीं बैठ पाते
  • वजन उठाकर चलने से दर्द तेज हो जाता


केस-1
25 साल की उम्र में ही अस्पताल कर्मी का कूल्हा खराब
25 साल की उम्र में निजी अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारी के दाएं कूल्हे का जोड़ सूख गया। उसे चलने-फिरने में तेज दर्द होने लगा। डॉक्टर को दिखाने पर इसका पता चला। कम उम्र होने से उसकी हड्डियों में खून की चाल बढ़ाने की दवाएं शुरू कर दी गई हैं।



केस-2
दोनों गुल्ले खराब, एक का हुआ ऑपरेशन
सीपरी बाजार निवासी 40 वर्षीय युवक के दोनों कूल्हे के जोड़ खराब हो गए। डॉक्टर ने एक तरफ का ऑपरेशन कर दिया है, लेकिन उसके पास दूसरा ऑपरेशन कराने के लिए पैसे नहीं थे। इसलिए डॉक्टर से रुपये इकट्ठा करके फिर आने की बात कहकर चला गया।

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