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पॉलिटेक्निक का कंप्यूटर विभाग बंद, पुराने कोर्सों में नहीं रही रुचि
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झांसी। पॉलिटेक्निक कॉलेजों में संचालित पीजीडीसीए में पिछले दो-तीन वर्षों से इक्का दुक्का ही प्रवेश हो रहे हैं। विद्यार्थियों के अभाव में इस विभाग पर ताला लटक गया है। राजकीय पॉलिटेक्निक में चार नए कोर्स नए सत्र से शुरू होना प्रस्तावित है।
उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा परिषद के तहत जिले में संचालित राजकीय पॉलिटेक्निक और वीरांगना झलकारी बाई राजकीय महिला पॉलिटेक्निक में पीजीडीसीए एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स संचालित है। गत कुछ वर्षों से इन दोनों ही कॉलेजों में पीजीडीसीए में प्रवेश इक्का-दुक्का ही प्रवेश हो रहे हैं। महिला पॉलिटेक्निक में यह पाठ्यक्रम में सत्र 2014-15 से प्रारंभ हुआ था। लेकिन यह भी ज्यादा न चल सका। सत्र 2021-22 में पीजीडीसीए में सिर्फ एक विद्यार्थी ने ही प्रवेश लिया था। वही सत्र 2020-21 में भी संख्या नहीं बढ़ी।
वहीं, राजकीय पॉलिटेक्निक में 15-20 साल पहले प्रारंभ हुए पीजीडीसीए और कंप्यूटर हार्डवेयर व मैकेनिज्म में 50 से ज्यादा प्रवेश हुआ करते थे, लेकिन पिछले 7-8 सालों से 2 -4 बच्चे ही प्रवेश ले रहे हैं। जबकि इसकी 75 सीटें हैं। पिछले कुछ वर्षों से विद्यार्थियों के अभाव में इस विभाग में ताला लटका गया है। चर्चा में है कि इन कोर्स में बहुत ज्यादा रोजगार के अवसर न होने के कारण बच्चों का रुझान इन कोर्स से कम हो गया है।
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ऐसे में साइबर सिक्योरिटी, डाटा साइंस एंड मशीन लर्निंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी और इंटरनेट ऑफ थिंग्स पाठ्यक्रम शुरू हो सकते हैं। यह चारों एक वर्षीय डिप्लोमा हैं। जो कि विद्यार्थियों को नए क्षेत्र में रोजगार के लिए मददगार साबित होंगे। इसके अलावा नई शिक्षा नीति के अनुसार पॉलिटेक्निक में संचालित विभिन्न ट्रेड के पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा। इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च डेवलपमेंट एंड ट्रेनिंग ट्रेडों के पाठ्यक्रमों को अपडेट करने को लेकर रणनीति तैयार कर रहा है।
इन कोर्स में हो रहा रुझान कम
दोनों पॉलिटेक्निक कॉलेजों में सिविल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग, पीजीडीसीए, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग, इंस्टूमेंटेशन एंड कंट्रोल, फैशन डिजाइनिंग और कंप्यूटर हार्डवेयर एंड मैकेनिज्म संचालित किए जाते हैं। जिसमें पीजीडीसीए, कंप्यूटर हार्डवेयर एंड मैकेनिज्म, इंस्ट्रूमेंटेशन, इलेक्ट्रानिक्स डिप्लोमा कोर्स में लगातार प्रवेश कम होता चला जा रहा है। इसका एक कारण कम हो रहे रोजगार के अवसर भी है।
एक दो छात्र इन कोर्स में प्रवेश लेते हैं, जिनके लिए फिर प्रवक्ता भी नियुक्त करने होते हैं। इन कोर्स को बंद कर नए कोर्स प्रारंभ होना प्रस्तावित हैं, जो कि बदलती तकनीकी के दौर की मांग है और जरूरत भी। ये नए कोर्स विद्यार्थियों के रोजगार की दृष्टि से भी अधिक लाभप्रद होंगे। - दिनेश सिंह, संयुक्त शिक्षा निदेशक तकनीकी शिक्षा
पीजीडीसीए और सीएचएम में प्रवेश में कमी के कारण इस कोर्स को बंद करने के लिए परिषद को पत्र लिखा है। नए कोर्स जो विद्यार्थियों के लिए तकनीकी के दौर में काम आएंगे, उनको प्रारंभ किया जाए तो अच्छा है। - प्रमोद कुमार, प्रधानाचार्य, राजकीय पॉलिटेक्निक
विद्यार्थियों का रुझान लगातार इस कोर्स से कम हो रहा था, एक-दो विद्यार्थी ही इनमें प्रवेश ले रहे थे, इनको बंद करने के लिए पत्र लिख दिया है। हमारे यहां इंस्ट्रूमेंटेशन में भी प्रवेश कम हो रहे हैं, लेकिन लड़कियों के लिए यह एक अच्छा पाठ्यक्रम है, इसको अभी बंद नहीं करेंगे। - एलएस यादव, प्रधानाचार्य, राजकीय महिला पॉलिटेक्निक
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उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा परिषद के तहत जिले में संचालित राजकीय पॉलिटेक्निक और वीरांगना झलकारी बाई राजकीय महिला पॉलिटेक्निक में पीजीडीसीए एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स संचालित है। गत कुछ वर्षों से इन दोनों ही कॉलेजों में पीजीडीसीए में प्रवेश इक्का-दुक्का ही प्रवेश हो रहे हैं। महिला पॉलिटेक्निक में यह पाठ्यक्रम में सत्र 2014-15 से प्रारंभ हुआ था। लेकिन यह भी ज्यादा न चल सका। सत्र 2021-22 में पीजीडीसीए में सिर्फ एक विद्यार्थी ने ही प्रवेश लिया था। वही सत्र 2020-21 में भी संख्या नहीं बढ़ी।
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वहीं, राजकीय पॉलिटेक्निक में 15-20 साल पहले प्रारंभ हुए पीजीडीसीए और कंप्यूटर हार्डवेयर व मैकेनिज्म में 50 से ज्यादा प्रवेश हुआ करते थे, लेकिन पिछले 7-8 सालों से 2 -4 बच्चे ही प्रवेश ले रहे हैं। जबकि इसकी 75 सीटें हैं। पिछले कुछ वर्षों से विद्यार्थियों के अभाव में इस विभाग में ताला लटका गया है। चर्चा में है कि इन कोर्स में बहुत ज्यादा रोजगार के अवसर न होने के कारण बच्चों का रुझान इन कोर्स से कम हो गया है।
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ऐसे में साइबर सिक्योरिटी, डाटा साइंस एंड मशीन लर्निंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी और इंटरनेट ऑफ थिंग्स पाठ्यक्रम शुरू हो सकते हैं। यह चारों एक वर्षीय डिप्लोमा हैं। जो कि विद्यार्थियों को नए क्षेत्र में रोजगार के लिए मददगार साबित होंगे। इसके अलावा नई शिक्षा नीति के अनुसार पॉलिटेक्निक में संचालित विभिन्न ट्रेड के पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा। इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च डेवलपमेंट एंड ट्रेनिंग ट्रेडों के पाठ्यक्रमों को अपडेट करने को लेकर रणनीति तैयार कर रहा है।
इन कोर्स में हो रहा रुझान कम
दोनों पॉलिटेक्निक कॉलेजों में सिविल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग, पीजीडीसीए, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग, इंस्टूमेंटेशन एंड कंट्रोल, फैशन डिजाइनिंग और कंप्यूटर हार्डवेयर एंड मैकेनिज्म संचालित किए जाते हैं। जिसमें पीजीडीसीए, कंप्यूटर हार्डवेयर एंड मैकेनिज्म, इंस्ट्रूमेंटेशन, इलेक्ट्रानिक्स डिप्लोमा कोर्स में लगातार प्रवेश कम होता चला जा रहा है। इसका एक कारण कम हो रहे रोजगार के अवसर भी है।
एक दो छात्र इन कोर्स में प्रवेश लेते हैं, जिनके लिए फिर प्रवक्ता भी नियुक्त करने होते हैं। इन कोर्स को बंद कर नए कोर्स प्रारंभ होना प्रस्तावित हैं, जो कि बदलती तकनीकी के दौर की मांग है और जरूरत भी। ये नए कोर्स विद्यार्थियों के रोजगार की दृष्टि से भी अधिक लाभप्रद होंगे। - दिनेश सिंह, संयुक्त शिक्षा निदेशक तकनीकी शिक्षा
पीजीडीसीए और सीएचएम में प्रवेश में कमी के कारण इस कोर्स को बंद करने के लिए परिषद को पत्र लिखा है। नए कोर्स जो विद्यार्थियों के लिए तकनीकी के दौर में काम आएंगे, उनको प्रारंभ किया जाए तो अच्छा है। - प्रमोद कुमार, प्रधानाचार्य, राजकीय पॉलिटेक्निक
विद्यार्थियों का रुझान लगातार इस कोर्स से कम हो रहा था, एक-दो विद्यार्थी ही इनमें प्रवेश ले रहे थे, इनको बंद करने के लिए पत्र लिख दिया है। हमारे यहां इंस्ट्रूमेंटेशन में भी प्रवेश कम हो रहे हैं, लेकिन लड़कियों के लिए यह एक अच्छा पाठ्यक्रम है, इसको अभी बंद नहीं करेंगे। - एलएस यादव, प्रधानाचार्य, राजकीय महिला पॉलिटेक्निक