{"_id":"609702678ebc3e8dbf3cb676","slug":"plazma-donation-fraud-jhansi-news-jhs1946044164","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुनाफाखोरी की वजह से प्लाज्मा थेरेपी मरीजों की जेब पर पड़ रही भारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुनाफाखोरी की वजह से प्लाज्मा थेरेपी मरीजों की जेब पर पड़ रही भारी
विज्ञापन
झांसी। कोरोना संक्रमितों की जान बचाने के जज्बातों के साथ लोग प्लाज्मा दान करने के लिए लगातार आगे आ रहे हैं। प्लाज्मा थैरेपी कारगर भी साबित हो रही है। इसके जरिये कई मरीजों को मौत के मुंह से निकाला जा चुका है। लेकिन, कुछ पैथोलॉजी की मुनाफाखोरी के चलते इलाज का ये तरीका कोरोना मरीजों की जेब पर भारी पड़ रहा है। प्लाज्मा लेने के लिए उन्हें चौदह हजार रुपये तक खर्च करने पड़ जा रहे हैं।
कोरोना मरीजों की संख्या तेजी बढ़ रही है। इसके साथ ही बढ़ रहे हैं मौत के आंकड़े। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले आठ दिनों के भीतर ही 6,574 नए मरीज सामने आ चुके हैं, जबकि 107 संक्रमितों ने दम तोड़ा है। कोरोना से मरने वालों में कई मरीज ऐसे हैं, जिनकी समय पर प्लाज्मा न मिलने की वजह से सांसें थम गईं। इसके अलावा तमाम मरीज ऐसे भी हैं, जिन्हें प्लाज्मा थैरेपी की वजह से बचाया जा सका है। कोरोना मरीजों को मौत के मुंह में जाने से बचाने के लिए लगातार लोग प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आ रहे हैं। आपदा के इस दौर में ये लोग रक्षक बनकर मरीजों की जान बचा रहे हैं। लेकिन, मुनाफाखोरी के चलते प्लाज्मा थैरेपी मरीजों को भारी पड़ रही है। कुछ निजी पैथोलॉजी में इसके चौदह हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यहां तक कि एंटीबॉडी टेस्ट पर ही दो हजार रुपये खर्च हो जा रहे हैं। ये रकम मरीज के परिजनों को अदा करनी पड़ी है। ऐसे में लोगों का कहना है कि प्रशासन निजी पैैथोलॉजी में प्लाज्मा निकालने की दर निर्धारित करे। इसके अलावा शिविर लगाकर नि:शुल्क एंटीबॉडी की जांच कराई जाए।
मेडिकल में नि:शुल्क हो रहा है एंटीबॉडी टेस्ट
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में एंटीबॉडी टेस्ट नि:शुल्क किया जा रहा है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को अपने पॉजिटिव होने और बाद में निगेटिव होने की रिपोर्ट दिखानी होती है। ब्लड बैंक प्रभारी डा. एमएल आर्या ने बताया कि कोई भी व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव होने के 28 दिन बाद प्लाज्मा दान कर सकता है। तीन से छह माह तक शरीर में एंटीबॉडी रहती है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि मेडिकल में भर्ती कोरोना मरीजों के लिए नि:शुल्क प्लाज्मा निकाला जा रहा है। जबकि, निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए दोनों प्लाज्मा के शासन द्वारा निर्धारित आठ हजार रुपये अदा करने पड़ रहे हैं।
विज्ञापन
प्लाज्मा थैरेपी कोरोना मरीजों के उपचार में कारगर साबित हो रही है। लेकिन, ये मरीजों की जेब पर भारी पड़ रही है। कुछ पैथोलॉजी प्लाज्मा निकालने के बारह से चौदह हजार रुपये तक वसूले रहे हैं। एंटीबॉडी टेस्ट के भी दो हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं। प्रशासन को इसकी दर निर्धारित करनी चाहिए। साथ ही शिविर लगातार एंटीबॉडी टेस्ट कराने चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आएं।
- प्रदीप जैन, पूर्व केंद्रीय मंत्री
कोरोना महामारी मरीजों की सेहत के साथ-साथ जेब पर भी बहुत भारी पड़ रही है। दुर्भाग्य की बात है कि आपदा के इस दौर में भी लोग मुनाफाखोरी कर रहे हैं। लोग जान बचाने के जज्बातों के साथ मरीजों को प्लाज्मा दान कर रहे हैं। लेकिन, इसमें भी कुछ लोग धंधा करने लगे हैं। इस पर सख्ती से लगाम कसी जानी चाहिए। प्लाज्मा निकालने की दर निर्धारित होनी चाहिए।
- अर्जुन सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष - उप्र व्यापार मंडल
विज्ञापन
कोरोना मरीजों की संख्या तेजी बढ़ रही है। इसके साथ ही बढ़ रहे हैं मौत के आंकड़े। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले आठ दिनों के भीतर ही 6,574 नए मरीज सामने आ चुके हैं, जबकि 107 संक्रमितों ने दम तोड़ा है। कोरोना से मरने वालों में कई मरीज ऐसे हैं, जिनकी समय पर प्लाज्मा न मिलने की वजह से सांसें थम गईं। इसके अलावा तमाम मरीज ऐसे भी हैं, जिन्हें प्लाज्मा थैरेपी की वजह से बचाया जा सका है। कोरोना मरीजों को मौत के मुंह में जाने से बचाने के लिए लगातार लोग प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आ रहे हैं। आपदा के इस दौर में ये लोग रक्षक बनकर मरीजों की जान बचा रहे हैं। लेकिन, मुनाफाखोरी के चलते प्लाज्मा थैरेपी मरीजों को भारी पड़ रही है। कुछ निजी पैथोलॉजी में इसके चौदह हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यहां तक कि एंटीबॉडी टेस्ट पर ही दो हजार रुपये खर्च हो जा रहे हैं। ये रकम मरीज के परिजनों को अदा करनी पड़ी है। ऐसे में लोगों का कहना है कि प्रशासन निजी पैैथोलॉजी में प्लाज्मा निकालने की दर निर्धारित करे। इसके अलावा शिविर लगाकर नि:शुल्क एंटीबॉडी की जांच कराई जाए।
विज्ञापन
मेडिकल में नि:शुल्क हो रहा है एंटीबॉडी टेस्ट
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में एंटीबॉडी टेस्ट नि:शुल्क किया जा रहा है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को अपने पॉजिटिव होने और बाद में निगेटिव होने की रिपोर्ट दिखानी होती है। ब्लड बैंक प्रभारी डा. एमएल आर्या ने बताया कि कोई भी व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव होने के 28 दिन बाद प्लाज्मा दान कर सकता है। तीन से छह माह तक शरीर में एंटीबॉडी रहती है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि मेडिकल में भर्ती कोरोना मरीजों के लिए नि:शुल्क प्लाज्मा निकाला जा रहा है। जबकि, निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए दोनों प्लाज्मा के शासन द्वारा निर्धारित आठ हजार रुपये अदा करने पड़ रहे हैं।
विज्ञापन
प्लाज्मा थैरेपी कोरोना मरीजों के उपचार में कारगर साबित हो रही है। लेकिन, ये मरीजों की जेब पर भारी पड़ रही है। कुछ पैथोलॉजी प्लाज्मा निकालने के बारह से चौदह हजार रुपये तक वसूले रहे हैं। एंटीबॉडी टेस्ट के भी दो हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं। प्रशासन को इसकी दर निर्धारित करनी चाहिए। साथ ही शिविर लगातार एंटीबॉडी टेस्ट कराने चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आएं।
- प्रदीप जैन, पूर्व केंद्रीय मंत्री
कोरोना महामारी मरीजों की सेहत के साथ-साथ जेब पर भी बहुत भारी पड़ रही है। दुर्भाग्य की बात है कि आपदा के इस दौर में भी लोग मुनाफाखोरी कर रहे हैं। लोग जान बचाने के जज्बातों के साथ मरीजों को प्लाज्मा दान कर रहे हैं। लेकिन, इसमें भी कुछ लोग धंधा करने लगे हैं। इस पर सख्ती से लगाम कसी जानी चाहिए। प्लाज्मा निकालने की दर निर्धारित होनी चाहिए।
- अर्जुन सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष - उप्र व्यापार मंडल