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बुंदेलखंड के जंगलों में झुलसने लगे पेड़-पौधे, तेंदू पत्ता भी मुरझाया

Tue, 17 May 2022 12:03 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 17 May 2022 12:03 AM IST
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pedh jale jhulse
झांसी। बुंदेलखंड की गिनती सूखाग्रस्त इलाकों में होती है। यहां पानी की बेहद कमी है। अब जब आसमान से आग बरस रही है तब वनस्पतियां भी झुलस रही हैं। सबसे बड़ा नुकसान तेंदू पत्ते को हो रहा है। हर साल सरकार को इससे बड़ी आय होती है लेकिन सूखते पत्ते के कारण राजस्व को करीब 50 लाख का नुकसान माना जा रहा है। वहीं हरे पेड़ भी सूखने लगे हैं। वन विभाग के मुताबिक सबसे ज्यादा प्रभाव ललितपुर, बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर में देखने को मिल रहा है।
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अगर समूचे बुंदेलखंड की बात की जाए तो यहां बड़ी संख्या में तेंदू पत्ता होता है। तेंदू पत्ते की नीलामी वन निगम द्वारा की जाती है। अगर आंकड़ों पर गौर किया जाए तो हर साल तेंदू पत्ते की 15 से 20 लाख गड्डी तैयार हो जाती हैं। एक गड्डी में 100 पत्ते होते हैं। बीड़ी बनाने में यह पत्ता प्रयोग होता है। लेकिन इस बार भीषण गर्मी में यह पत्ता भी मुरझा रहा है। इससे राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। जानकारों का कहना है कि जब पत्ता सूख जाएगा तो नीलामी करना भी मुश्किल होगा। इसके अलावा कंजी, ढाक, चिरौल, शीशम, सागौन, नीम, पीपल, अर्रु, चिरौल सहित कई प्रजातियों के पेड़ भी सूख रहे हैं। वन अफसरों का कहना है कि अगर बरसात जून में हो जाती है तो कुछ नुकसान को कम किया जा सकता है। अगर बरसात लेट हुई तो पेड़ पौधों पर भारी संकट हो सकता है। वन विभाग के अफसरों का कहना है कि तीस से चालीस फीसदी तक पेड़ सूखने लगे हैं।
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हरा सोना माना जाता है तेंदू पत्ता
बुंदेलखंड में तेंदू पत्ता हरा सोना माना जाता है। ललितपुर, बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट के जंगल में यह पाया जाता है। तेंदू पत्ता का उपयोग बीड़ी बनाने में किया जाता है। इस पत्ते को मोड़कर इसमें तंबाकू भरकर बीड़ी बनाई जाती है। मई से जून तक पेड़ से इस पत्ते की तोड़ाई होती है। इस काम में हजारों परिवार जुटते हैं।
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खैर की खैरियत पर भी मंडराया खतरा
झांसी। बुंदेलखंड में खैर के पेड़ बड़ी संख्या में होते हैं। खैर की लकड़ी काफी कीमती मानी जाती है। खैर की लकड़ी का प्रयोग सर्वाधिक कत्था बनाने में किया जाता है। वहीं धार्मिक अनुष्ठान भी इसका प्रयोग होता है। अब जब तापमान 48 के पार जा रहा है तब पेड़ सूखने लगे हैं। वन विभाग के अफसरों का कहना है कि यह पौधा काफी नाजुक होता है। गर्मियों में आमतौर पर सूख जाता है। क्योंकि इस क्षेत्र में पानी का भी बड़ा संकट रहता है।

सालों बाद तापमान में इतनी तेजी रिकार्ड की जा रही है जिसका असर पेड़ों पर पड़ा है। तपिश के कारण जमीन से नमी चली गई है जिससे पेड़ पौधे सूख रहे हैं। कोई गणना तो नहीं हुई है लेकिन वन अफसरों से जो रिपोर्ट आ रही है उसके मुताबिक बुंदेलखंड में ढाई लाख के करीब पेड़ आसमान से बरसने वाली आग का शिकार हो गए हैं।
वीके मिश्रा, प्रभागीय वन अधिकारी
बुंदेलखंड के जंगल का क्षेत्रफल जनपदवार
झांसी- 304.05 वर्ग किलोमीटर
ललितपुर- 581.29 वर्ग किलोमीटर
जालौन- 247.39 वर्ग किलोमीटर
बांदा-101.91 वर्ग किलोमीटर
महोबा- 170 वर्ग किलोमीटर
हमीरपुर-227 वर्ग किलोमीटर
चित्रकूट-631.69
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