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पारीछा से नंदखास के बीच दूसरी लाइन पर दौड़ने लगीं ट्रेनें
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Train tracks in rural area.
- फोटो : Darren Hester
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झांसी। रेल संरक्षा आयुक्त की हरी झंडी के बाद सोमवार से झांसी - कानपुर दूसरी रेल लाइन पर पारीछा से नंदखास के बीच 19 किलोमीटर में ट्रेनों का दौड़ना शुरू हो गया। अब तक 206 में से 70 किलोमीटर तक का डबल ट्रैक खोल दिया गया है। जल्द ही उरई के नजदीक स्थित सरकोजी से ऊसरगांव स्टेशन के बीच दूसरी लाइन को चालू करने की तैयारी चल रही है।
पूर्वोत्तर मंडल के रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) मोहम्मद लतीफ खान ने रविवार को पारीछा से नंदखास के बीच 19.079 किलोमीटर की नई रेल लाइन का स्पीड ट्रेन से ट्रायल लिया था। ट्रायल सफल होने के बाद सीआरएस ने ट्रेनों के संचालन की अनुमति दे दी। सोमवार से उक्त स्टेशनों के बीच दूसरी लाइन पर ट्रेनों का चलना शुरू हो गया। झांसी-कानपुर डबल ट्रैक में 206 किलोमीटर तक काम होना है। पारीछा से नंदखास के बीच ट्रैक खुलने के बाद 70 किलोमीटर रेल लाइन का काम पूरा हो गया है।
इसके पहले झांसी- पारीछा के बीच 24 किलोमीटर और पिरौना- एट व भुआ स्टेशन के बीच 27 किलोमीटर रेल लाइन चालू हो चुकी है। अभी झांसी-कानपुर सिंगल रेलवे ट्रैक पर प्रतिदिन 40 से अधिक अप और डाउन की सवारी ट्रेनों का संचालन होता है। इतनी ही संख्या में मालगाड़ियां भी दौड़ती हैं। एक ट्रेन को निकालने में सामने आ रही दूसरी ट्रेन को नजदीक के रेलवे स्टेशन पर रोकना पड़ता है। इसका सीधा असर ट्रेनों के समय पालन पर पड़ता है।
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पूर्वोत्तर मंडल के रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) मोहम्मद लतीफ खान ने रविवार को पारीछा से नंदखास के बीच 19.079 किलोमीटर की नई रेल लाइन का स्पीड ट्रेन से ट्रायल लिया था। ट्रायल सफल होने के बाद सीआरएस ने ट्रेनों के संचालन की अनुमति दे दी। सोमवार से उक्त स्टेशनों के बीच दूसरी लाइन पर ट्रेनों का चलना शुरू हो गया। झांसी-कानपुर डबल ट्रैक में 206 किलोमीटर तक काम होना है। पारीछा से नंदखास के बीच ट्रैक खुलने के बाद 70 किलोमीटर रेल लाइन का काम पूरा हो गया है।
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इसके पहले झांसी- पारीछा के बीच 24 किलोमीटर और पिरौना- एट व भुआ स्टेशन के बीच 27 किलोमीटर रेल लाइन चालू हो चुकी है। अभी झांसी-कानपुर सिंगल रेलवे ट्रैक पर प्रतिदिन 40 से अधिक अप और डाउन की सवारी ट्रेनों का संचालन होता है। इतनी ही संख्या में मालगाड़ियां भी दौड़ती हैं। एक ट्रेन को निकालने में सामने आ रही दूसरी ट्रेन को नजदीक के रेलवे स्टेशन पर रोकना पड़ता है। इसका सीधा असर ट्रेनों के समय पालन पर पड़ता है।
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