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अब नए लुक में नजर आएगा नारायण बाग, बनाए जा रहे हैं कई छोटे उद्यान
Mon, 31 Dec 2018 01:17 AM IST
Priyesh Mishra
jhansi
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Published by: Priyesh Mishra
Updated Mon, 31 Dec 2018 01:17 AM IST
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नारायण बाग
- फोटो : अमर उजाला
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अपनी हरियाली और खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध नारायण बाग अब नए लुक में है। 86 लाख रुपये में 106 एकड़ में फैले बाग को 10 उद्यानों में तब्दील कर दिया गया है। यहां आंवला, अमरूद, नींबू के लघु बाग तो हैं ही, इसके अलावा देसी- विदेशी प्रजाति के कई फूल भी दिल खुश कर रहे हैं।
शहर की भीड़भाड़ और कोलाहल से दूर नारायण बाग बुंदेलखंड के बेहद पुराने बागों में से एक है। यहां लगभग दो शताब्दी पुराना केवड़े का बाग है। यह बाग दो हेक्टेयर में फैला हुआ है। इसके अलावा पूर्व में 6 लॉन थे। नारायण बाग और आकर्षित बने तथा अधिक से अधिक सैलानी आएं इसके लिए वर्ष 2013 - 14 में शासन ने मुख्यमंत्री की घोषणा के अंतर्गत 86 लाख रुपये आवंटित किये थे।
इस आवंटित धनराशि से निर्माण क कार्य कराए गए। नये लॉन विकसित किए गए। नई प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इसके अलावा नारायण बाग को संवारा गया। उद्यान प्रभारी जालिम सिंह के मुताबिक नारायण बाग की पुरानी बावड़ी भी आकर्षक बनाई गई। टायल्स लगवाए गए। वहीं फाइट्स के पेड़ और हाइब्रिड कैना के रंग बिरंगे फू लों के पौधे भी लगवाए।
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नारायण बाग में हुए यह कार्य
- बाग में छोटे - छोटे पत्थरों को रखकर उसे लघु पहाड़ का आकार दिया गया। इस पर पौधे लगाए गए।
- चार लॉन और तैयार किए गए। अब यहां दस लॉन हो गए हैं।
- सिलेक्शन ए ग्रेड की घास लगाई गई।
- दो हजार शोभा कार्य के पौधे लगाए गए।
- एक हेक्टेयर में अमरू द का बाग, एक एकड़ में नींबू का बाग, एक एकड़ में कैना फूलों की नर्सरी, खजूर के पौधे लगाए गए।
- एक एकड़ में पौधों की दो संरक्षण शाला बनाई गईं। सरवरी बार्डर बनाई गई, जिसमें कई प्रजातियों के फूल हैं।
- पॉथवे, गेट का निर्माण, बैंचेस, चौकीदार आवास, टायलेट ब्लाक, दो किलोमीटर बाढ़ लगाई गई और सफाई कार्य कराया गया।
"नारायण बाग हमेशा सैलानियों के लिए आकर्षक का केंद्र रहा है। पर्यटन विभाग के फोल्डरों में भी इस बाग का उल्लेख है। जल्द ही यहां आकर्षक फव्वारा लगाया जाएगा। चिल्ड्न पार्क बना है, जिसे नये तरीके से बनाया जा रहा है।"
भैरम सिंह, उपनिदेशक उद्यान विभाग
तत्कालीन नगर पालिका के संरक्षण में था कभी
नारायण बाग 1925 के दौर में तत्कालीन नगर पालिका के संरक्षण में था। वर्ष 1950 में यह कृषि विभाग को मिला। वर्ष 66 में उद्यान विभाग के अस्तित्व में आया और इसका संरक्षण उसे मिला। हालांकि इसकी देखरेख इस दौरान नारायण बाग राजकीय उद्यान आगरा द्वारा की जाती रही है। वर्तमान में नारायण बाग की देखरेख के लिए 26 दैनिक श्रमिक हैं। छह माली हैं। यहां पर पौधों की नर्सरी भी है। इसके अलावा नागरमोथा, अशोक की चार प्रजातियों के पेड़, अपराजिता, शतावर, गुलदाऊदी, कैक्टस आदि की कई प्रजातियों के पेड़ व पौधे हैं।
यह है दूरी
नारायण बाग बस स्टैंड, मेडिकल से तीन - तीन, इलाइट से पांच, बड़ा बाजार से दो किलो मीटर की दूरी पर है। सामान्यत: एक व्यक्ति का आटो रिक्शा किराया 10 से 15 रुपये लगता है। उद्यान विभाग के अनुसार प्रतिदिन एक हजार से अधिक लोग नारायण बाग में आते है। प्रवेश नि:शुल्क है।
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शहर की भीड़भाड़ और कोलाहल से दूर नारायण बाग बुंदेलखंड के बेहद पुराने बागों में से एक है। यहां लगभग दो शताब्दी पुराना केवड़े का बाग है। यह बाग दो हेक्टेयर में फैला हुआ है। इसके अलावा पूर्व में 6 लॉन थे। नारायण बाग और आकर्षित बने तथा अधिक से अधिक सैलानी आएं इसके लिए वर्ष 2013 - 14 में शासन ने मुख्यमंत्री की घोषणा के अंतर्गत 86 लाख रुपये आवंटित किये थे।
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इस आवंटित धनराशि से निर्माण क कार्य कराए गए। नये लॉन विकसित किए गए। नई प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इसके अलावा नारायण बाग को संवारा गया। उद्यान प्रभारी जालिम सिंह के मुताबिक नारायण बाग की पुरानी बावड़ी भी आकर्षक बनाई गई। टायल्स लगवाए गए। वहीं फाइट्स के पेड़ और हाइब्रिड कैना के रंग बिरंगे फू लों के पौधे भी लगवाए।
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नारायण बाग में हुए यह कार्य
- बाग में छोटे - छोटे पत्थरों को रखकर उसे लघु पहाड़ का आकार दिया गया। इस पर पौधे लगाए गए।
- चार लॉन और तैयार किए गए। अब यहां दस लॉन हो गए हैं।
- सिलेक्शन ए ग्रेड की घास लगाई गई।
- दो हजार शोभा कार्य के पौधे लगाए गए।
- एक हेक्टेयर में अमरू द का बाग, एक एकड़ में नींबू का बाग, एक एकड़ में कैना फूलों की नर्सरी, खजूर के पौधे लगाए गए।
- एक एकड़ में पौधों की दो संरक्षण शाला बनाई गईं। सरवरी बार्डर बनाई गई, जिसमें कई प्रजातियों के फूल हैं।
- पॉथवे, गेट का निर्माण, बैंचेस, चौकीदार आवास, टायलेट ब्लाक, दो किलोमीटर बाढ़ लगाई गई और सफाई कार्य कराया गया।
"नारायण बाग हमेशा सैलानियों के लिए आकर्षक का केंद्र रहा है। पर्यटन विभाग के फोल्डरों में भी इस बाग का उल्लेख है। जल्द ही यहां आकर्षक फव्वारा लगाया जाएगा। चिल्ड्न पार्क बना है, जिसे नये तरीके से बनाया जा रहा है।"
भैरम सिंह, उपनिदेशक उद्यान विभाग
तत्कालीन नगर पालिका के संरक्षण में था कभी
नारायण बाग 1925 के दौर में तत्कालीन नगर पालिका के संरक्षण में था। वर्ष 1950 में यह कृषि विभाग को मिला। वर्ष 66 में उद्यान विभाग के अस्तित्व में आया और इसका संरक्षण उसे मिला। हालांकि इसकी देखरेख इस दौरान नारायण बाग राजकीय उद्यान आगरा द्वारा की जाती रही है। वर्तमान में नारायण बाग की देखरेख के लिए 26 दैनिक श्रमिक हैं। छह माली हैं। यहां पर पौधों की नर्सरी भी है। इसके अलावा नागरमोथा, अशोक की चार प्रजातियों के पेड़, अपराजिता, शतावर, गुलदाऊदी, कैक्टस आदि की कई प्रजातियों के पेड़ व पौधे हैं।
यह है दूरी
नारायण बाग बस स्टैंड, मेडिकल से तीन - तीन, इलाइट से पांच, बड़ा बाजार से दो किलो मीटर की दूरी पर है। सामान्यत: एक व्यक्ति का आटो रिक्शा किराया 10 से 15 रुपये लगता है। उद्यान विभाग के अनुसार प्रतिदिन एक हजार से अधिक लोग नारायण बाग में आते है। प्रवेश नि:शुल्क है।