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न डायबिटीज और न बीपी, जोड़ों में दर्द तो दूर की बात
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झांसी। टकसाल मुहल्ला में रहने वाले 85 साल के बीके मिश्रा फिटनेस के मामले में युवाओं के लिए किसी प्रेरणस्त्रोत से कम नहीं हैं। उम्र के साढ़े आठ दशक बाद भी उन्हें न तो डायबिटीज है और न ही ब्लड प्रेशर की परेशानी। जोड़ों में दर्द तो बहुत दूर की बात है। इस उम्र में भी वह सुबह पांच बजे उठ जाते हैं। खुद चाय बनाते हैं और फिर सैर के लिए निकल जाते हैं। अपनी स्वस्थ सेहत के पीछे की वजह वह सादा जीवन और उच्च विचार को मानते हैं।
बीके मिश्रा 1994 में खंड विकास अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने बताया कि शुरूआत से ही उनकी सुबह पांच बजे उठने की आदत बनी हुई है। वह साढ़े पांच बजे रोज टहलने निकल जाते हैं। सात बजे लौटने के बाद वह नहाने और पूजा कर आठ बजे नाश्ता करते हैं। ज्यादातर वह किसमिस के साथ लाई-चना खाते हैं। दोपहर 12 से एक बजे के बीच वह लंच करते हैं। दाल, सब्जी के साथ वह तीन-चार रोटी ही खाते हैं। उन्हें फल भी पसंद हैं।
उन्होंने बताया कि वह नकारात्मक खबरों, सूचनाओं आदि पर ध्यान नहीं देते हैं। हमेशा प्रयास करते रहते हैं कि सकारात्मक रहें। इंटरनेट पर भी सकारात्मक ऊर्जा देने वाली सामग्री खोजते रहते हैं। रात आठ से नौ बजे के बीच वह खाना खा लेते हैं। दस से साढ़े दस बजे के बीच सो जाते हैं। युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सोच सकारात्मक रखें। शारीरिक दृष्टि से मजबूत रखने के लिए पौष्टिक भोजन करें। ज्यादा जंक फूड के चक्कर में न पड़ें। बच्चों को सेहतमंद रखने के पीछे परिजनों की भी बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसलिए परिजनों को भी बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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बीके मिश्रा 1994 में खंड विकास अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने बताया कि शुरूआत से ही उनकी सुबह पांच बजे उठने की आदत बनी हुई है। वह साढ़े पांच बजे रोज टहलने निकल जाते हैं। सात बजे लौटने के बाद वह नहाने और पूजा कर आठ बजे नाश्ता करते हैं। ज्यादातर वह किसमिस के साथ लाई-चना खाते हैं। दोपहर 12 से एक बजे के बीच वह लंच करते हैं। दाल, सब्जी के साथ वह तीन-चार रोटी ही खाते हैं। उन्हें फल भी पसंद हैं।
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उन्होंने बताया कि वह नकारात्मक खबरों, सूचनाओं आदि पर ध्यान नहीं देते हैं। हमेशा प्रयास करते रहते हैं कि सकारात्मक रहें। इंटरनेट पर भी सकारात्मक ऊर्जा देने वाली सामग्री खोजते रहते हैं। रात आठ से नौ बजे के बीच वह खाना खा लेते हैं। दस से साढ़े दस बजे के बीच सो जाते हैं। युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सोच सकारात्मक रखें। शारीरिक दृष्टि से मजबूत रखने के लिए पौष्टिक भोजन करें। ज्यादा जंक फूड के चक्कर में न पड़ें। बच्चों को सेहतमंद रखने के पीछे परिजनों की भी बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसलिए परिजनों को भी बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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