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बीयू में बनेगी ग्रह-नक्षत्र वाटिका, दीक्षांत समारोह में राज्यपाल राम नाईक करेंगे शिलान्यास
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Sun, 22 Oct 2017 02:14 AM IST
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में ग्रह-नक्षत्र वाटिका बनाई जाएगी। वाटिका में राशि और नक्षत्र के अनुसार आयुर्वेदिक पौधे लगाकर शोध किया जाएगा। दस नवंबर को दीक्षांत समारोह में राज्यपाल/कुलाधिपति राम नाईक ग्रह-नक्षत्र वाटिका का शिलान्यास करेंगे। साथ ही फॉरेंसिक साइंस विभाग की नई बिल्डिंग का लोकार्पण होगा।
हर नक्षत्र का अलग पौधा होता है। जन्मतिथि और समय के अनुसार हर व्यक्ति का शुभ नक्षत्र तय होता है। ऐसी मान्यता है कि नक्षत्र से जुड़े पौधे के दर्शन से लाभ होता है। वहीं, पौधे को हानि पहुंचाने से नुकसान होता है। ग्रह, नक्षत्र के अनुसार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बनाने वाली ग्रह-नक्षत्र वाटिका में आयुर्वेदिक पौधे लगाए जाएंगे। वाटिका स्थापित होने के बाद पौधों पर शोध किया जाएगा। चूंकि, सौर मंडल के नौ ग्रह चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, रवि, राहु और केतु हैं।
इन गृहों के हिसाब से शमी, पीपल, गूलर, कुश, मदार, खैर, दूब, लटजीरा और पलाश के पौधे लगाए जाएंगे। कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने बताया कि दस नवंबर को दीक्षांत समारोह में राज्यपाल/कुलाधिपति ग्रह-नक्षत्र वाटिका का शिलान्यास करेंगे। फॉरेंसिक साइंस विभाग की नई बिल्डिंग का भी लोकार्पण होगा। साथ ही पुस्तकों के रखरखाव के लिए केंद्रीय पुस्तकालय के चार छोटे हॉल का भी शिलान्यास किया जाएगा। ये हॉल पुस्तकालय बिल्डिंग के पीछे बनाए जाएंगे।
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ये हैं नक्षत्रों के पौधे
अश्विनी नक्षत्र का कुचिला, भरणी का आंवला, कृतिका का गूलर, रोहिणी का जामुन, मृगशिरा का खैर, आर्दा का शीशम, पुनर्वस का बांस, अश्लेषा का नागकेसर, मघ का बरगद, पूर्वा फाल्गुनी का ढाक, उत्तरा फाल्गुनी का पाकड़, हस्त का रीठा, चित्रा का बेल, स्वाती का अर्जुन, विशाखा का कंटारी, अनुराधा का मौलश्री, ज्येष्ठा का चीड़, मूल का साल, पूर्वाषाढ़ा का जलढेतरा, उत्तरासाढ़ा का कटहल, श्रवण का मदार, घनिष्ठ का छ्योंकर, शतभिगा का कदंब, पूर्वाभाद्रपद का आम, उत्तराभाद्रपद का नीम और रेवती नक्षत्र का पौधा महुआ है।
जानिए नक्षत्र को
नक्षत्र का सिद्धांत भारतीय वैदिक ज्योतिष में पाया जाता है। यह पद्धति संसार की अन्य प्रचलित ज्योतिष पद्धतियों से अधिक सटीक व अचूक मानी जाती है। आकाश में चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा पर चलता हुआ 27.3 दिन में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करता है। इस प्रकार एक मासिक चक्र में आकाश में जिन मुख्य सितारों के समूहों के बीच से चंद्रमा गुजरता है, चंद्रमा व सितारों के समूह के उसी संयोग को नक्षत्र कहा जाता है। चंद्रमा की 360 डिग्री की एक परिक्रमा के पथ पर लगभग 27 विभिन्न तारा समूह बनते हैं। आकाश में तारों के यही विभाजित समूह नक्षत्र या तारामंडल के नाम से जाने जाते हैं। हर नक्षत्र एक विशेष तारामंडल या तारों के एक समूह का प्रतिनिधि होता है।
हर नक्षत्र का अलग पौधा होता है। जन्मतिथि और समय के अनुसार हर व्यक्ति का शुभ नक्षत्र तय होता है। ऐसी मान्यता है कि नक्षत्र से जुड़े पौधे के दर्शन से लाभ होता है। वहीं, पौधे को हानि पहुंचाने से नुकसान होता है। ग्रह, नक्षत्र के अनुसार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बनाने वाली ग्रह-नक्षत्र वाटिका में आयुर्वेदिक पौधे लगाए जाएंगे। वाटिका स्थापित होने के बाद पौधों पर शोध किया जाएगा। चूंकि, सौर मंडल के नौ ग्रह चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, रवि, राहु और केतु हैं।
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इन गृहों के हिसाब से शमी, पीपल, गूलर, कुश, मदार, खैर, दूब, लटजीरा और पलाश के पौधे लगाए जाएंगे। कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने बताया कि दस नवंबर को दीक्षांत समारोह में राज्यपाल/कुलाधिपति ग्रह-नक्षत्र वाटिका का शिलान्यास करेंगे। फॉरेंसिक साइंस विभाग की नई बिल्डिंग का भी लोकार्पण होगा। साथ ही पुस्तकों के रखरखाव के लिए केंद्रीय पुस्तकालय के चार छोटे हॉल का भी शिलान्यास किया जाएगा। ये हॉल पुस्तकालय बिल्डिंग के पीछे बनाए जाएंगे।
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ये हैं नक्षत्रों के पौधे
अश्विनी नक्षत्र का कुचिला, भरणी का आंवला, कृतिका का गूलर, रोहिणी का जामुन, मृगशिरा का खैर, आर्दा का शीशम, पुनर्वस का बांस, अश्लेषा का नागकेसर, मघ का बरगद, पूर्वा फाल्गुनी का ढाक, उत्तरा फाल्गुनी का पाकड़, हस्त का रीठा, चित्रा का बेल, स्वाती का अर्जुन, विशाखा का कंटारी, अनुराधा का मौलश्री, ज्येष्ठा का चीड़, मूल का साल, पूर्वाषाढ़ा का जलढेतरा, उत्तरासाढ़ा का कटहल, श्रवण का मदार, घनिष्ठ का छ्योंकर, शतभिगा का कदंब, पूर्वाभाद्रपद का आम, उत्तराभाद्रपद का नीम और रेवती नक्षत्र का पौधा महुआ है।
जानिए नक्षत्र को
नक्षत्र का सिद्धांत भारतीय वैदिक ज्योतिष में पाया जाता है। यह पद्धति संसार की अन्य प्रचलित ज्योतिष पद्धतियों से अधिक सटीक व अचूक मानी जाती है। आकाश में चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा पर चलता हुआ 27.3 दिन में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करता है। इस प्रकार एक मासिक चक्र में आकाश में जिन मुख्य सितारों के समूहों के बीच से चंद्रमा गुजरता है, चंद्रमा व सितारों के समूह के उसी संयोग को नक्षत्र कहा जाता है। चंद्रमा की 360 डिग्री की एक परिक्रमा के पथ पर लगभग 27 विभिन्न तारा समूह बनते हैं। आकाश में तारों के यही विभाजित समूह नक्षत्र या तारामंडल के नाम से जाने जाते हैं। हर नक्षत्र एक विशेष तारामंडल या तारों के एक समूह का प्रतिनिधि होता है।