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न नहरों की मरम्मत हुई और न सफाई, फिर भी कर दिया 75 लाख का भुगतान
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सिंचाई विभाग में बिना काम के कर दिया 75 लाख रुपये का भुगतान।
- फोटो : ???? ????
सिंचाई विभाग: न नहरों की मरम्मत हुई और न सफाई, फिर भी कर दिया 75 लाख का भुगतान
झांसी। सिंचाई विभाग के झांसी प्रखंड बेतवा नहर कार्यालय में लाखों का घोटाला सामने आया है। इस मामले में न तो नहरों की सफाई कराई गई और नही मरम्मत, फिर भी तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने साठगांठ कर छह फर्मों को 75 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया। इस घोटाले में कार्यालय के कैशियर समेत और भी कई कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। अधिशासी अभियंता के स्थानांतरण के बाद दूसरे अफसर ने इस पूरे मामले में अनियमितता पाई है। उनकी पहल पर अधीक्षण अभियंता ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है।
विधायक जवाहर लाल राजपूत की शिकायत पर शासन ने सिंचाई विभाग के झांसी बेतवा नहर प्रखंड कार्यालय के तत्कालीन अधिशासी अभियंता संजय कुमार का स्थानांतरण वाराणसी कर दिया था। उन्होंने 26 दिसंबर 2019 को चार्ज छोड़ दिया। उनके स्थान पर उमेश कुमार ने काम संभाला। उन्होंने पाया कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता चार्ज छोड़ने से पहले वह बिना कार्य कराए छह फर्मों को 75 लाख रुपये से अधिक का अग्रिम भुगतान कर गए। नहरों की सिल्ट सफाई, नहरों की मरम्मत, नहरों की खुदाई आदि कार्यों के नाम पर मैसर्स मां कामांक्षी सप्लायर्स को एक अक्तूबर 2019 को 9.99 लाख, मैसर्स शब्द कंस्ट्रक्शन को 26 सितंबर 2019 को 46.53 लाख, मैसर्स अनुज कंस्ट्रक्शन को चार नवंबर 2019 को 4.98 लाख, मैसर्स रोहित कंस्ट्रक्शन को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख, मैसर्स जेपी इंटरप्राइजेज को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख व श्री बाबू प्रसाद तिवारी फर्म को चार दिसंबर 2019 को 4.10 लाख का भुगतान किया गया। इन कार्यों से संबंधित कोई बिल कार्यालय में नहीं पाए गए।
इस बात की जानकारी अधिशासी अभियंता ने उच्च अधिकारियों को दी। इस पर अधीक्षण अभियंता केबी लाल ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है। समिति में अधिशासी अभियंता माताटीला प्रखंड को अध्यक्ष, अधिशासी अभियंता सपरार प्रखंड व खंडीय लेखाकार सिंचाई निर्माण खंड को प्रथम को सदस्य बनाया गया है। समिति से एक हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।
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- फरवरी 2020 में इस मामले के संज्ञान में आने के बाद फर्म संचालकों/ ठेेकेदारों से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन उनके द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया। कार्यों से संबंधित बिल भी कार्यालय में नहीं थे। इसके बाद जानकारी उच्च अधिकारियों को दी। अधीक्षण अभियंता द्वारा गठित समिति मामले की जांच कर रही है।
उमेश कुमार, अधिशासी अभियंता, झांसी बेतवा नहर प्रखंड ।
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झांसी। सिंचाई विभाग के झांसी प्रखंड बेतवा नहर कार्यालय में लाखों का घोटाला सामने आया है। इस मामले में न तो नहरों की सफाई कराई गई और नही मरम्मत, फिर भी तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने साठगांठ कर छह फर्मों को 75 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया। इस घोटाले में कार्यालय के कैशियर समेत और भी कई कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। अधिशासी अभियंता के स्थानांतरण के बाद दूसरे अफसर ने इस पूरे मामले में अनियमितता पाई है। उनकी पहल पर अधीक्षण अभियंता ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है।
विधायक जवाहर लाल राजपूत की शिकायत पर शासन ने सिंचाई विभाग के झांसी बेतवा नहर प्रखंड कार्यालय के तत्कालीन अधिशासी अभियंता संजय कुमार का स्थानांतरण वाराणसी कर दिया था। उन्होंने 26 दिसंबर 2019 को चार्ज छोड़ दिया। उनके स्थान पर उमेश कुमार ने काम संभाला। उन्होंने पाया कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता चार्ज छोड़ने से पहले वह बिना कार्य कराए छह फर्मों को 75 लाख रुपये से अधिक का अग्रिम भुगतान कर गए। नहरों की सिल्ट सफाई, नहरों की मरम्मत, नहरों की खुदाई आदि कार्यों के नाम पर मैसर्स मां कामांक्षी सप्लायर्स को एक अक्तूबर 2019 को 9.99 लाख, मैसर्स शब्द कंस्ट्रक्शन को 26 सितंबर 2019 को 46.53 लाख, मैसर्स अनुज कंस्ट्रक्शन को चार नवंबर 2019 को 4.98 लाख, मैसर्स रोहित कंस्ट्रक्शन को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख, मैसर्स जेपी इंटरप्राइजेज को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख व श्री बाबू प्रसाद तिवारी फर्म को चार दिसंबर 2019 को 4.10 लाख का भुगतान किया गया। इन कार्यों से संबंधित कोई बिल कार्यालय में नहीं पाए गए।
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इस बात की जानकारी अधिशासी अभियंता ने उच्च अधिकारियों को दी। इस पर अधीक्षण अभियंता केबी लाल ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है। समिति में अधिशासी अभियंता माताटीला प्रखंड को अध्यक्ष, अधिशासी अभियंता सपरार प्रखंड व खंडीय लेखाकार सिंचाई निर्माण खंड को प्रथम को सदस्य बनाया गया है। समिति से एक हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।
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- फरवरी 2020 में इस मामले के संज्ञान में आने के बाद फर्म संचालकों/ ठेेकेदारों से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन उनके द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया। कार्यों से संबंधित बिल भी कार्यालय में नहीं थे। इसके बाद जानकारी उच्च अधिकारियों को दी। अधीक्षण अभियंता द्वारा गठित समिति मामले की जांच कर रही है।
उमेश कुमार, अधिशासी अभियंता, झांसी बेतवा नहर प्रखंड ।