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मोहब्बत जिंदाबाद
Jhansi
Updated Sat, 10 Sep 2016 01:13 AM IST
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मोहब्बत जिंदाबाद
- फोटो : demo
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झांसी। प्रोबेशन अधिकारी के दखल से दो प्रेमी फिर मिल गए और ओरछा के मंदिर परिसर में उनकी शादी भी हो गई। अब दोनों खुश हैं।
पहले प्रेमी युगल जितेंद्र और कंचन आर्य समाज मंदिर पहुंचे लेकिन पर्याप्त कागजात नहीं होने के कारण वहां शादी करवाने से इनकार कर दिया गया। कटेरा निवासी कंचन गोस्वामी और गरौठा निवासी जितेंद्र की प्रेम कहानी छह महीने पहले फोन पर शुरू हुई थी। इस कंचन को उसके भाई के पास मुंबई भेज दिया गया। जितेंद्र ने कंचन से संपर्क किया और फिर उसे झांसी स्टेशन पर बुला लिया। यहां से फिर दोनों मुंबई चले गए। वहां किराए के घर में डेढ़ महीने बिताए। इसके बाद दमन चले गए। वहां इस बीच दोनों ने छोटी-मोटी नौकरियां कीं। जितेंद्र के घरवालों को भनक लग गई तो वे उसे यहां ले आए। कंचन अकेली रह गई और किसी तरह पैसे जोड़कर वापस झांसी आ गई। यहां जब बात नहीं बनी तो उसने गरौठा थाने में शिकायत की। थानेदार ने मामले प्रोबेशन अधिकारी राजीव शर्मा तक पहुंचाया। राजीव शर्मा के मुताबिक उन्होंने दोनों के परिजनों को बुलाया। समझाया और समझौता करवा दिया। जितेंद्र के परिजन कंचन को बहू स्वीकारने को राजी हो गए। ओरछा में जितेंद्र और कंचन का विवाह हो गया। इस तरह कंचन ने साबित कर दिया गया कि यदि प्यार सच्चा है तो मिलेगा जरूर। जितेंद्र का कहना है कि वह बहुत खुश है।
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पहले प्रेमी युगल जितेंद्र और कंचन आर्य समाज मंदिर पहुंचे लेकिन पर्याप्त कागजात नहीं होने के कारण वहां शादी करवाने से इनकार कर दिया गया। कटेरा निवासी कंचन गोस्वामी और गरौठा निवासी जितेंद्र की प्रेम कहानी छह महीने पहले फोन पर शुरू हुई थी। इस कंचन को उसके भाई के पास मुंबई भेज दिया गया। जितेंद्र ने कंचन से संपर्क किया और फिर उसे झांसी स्टेशन पर बुला लिया। यहां से फिर दोनों मुंबई चले गए। वहां किराए के घर में डेढ़ महीने बिताए। इसके बाद दमन चले गए। वहां इस बीच दोनों ने छोटी-मोटी नौकरियां कीं। जितेंद्र के घरवालों को भनक लग गई तो वे उसे यहां ले आए। कंचन अकेली रह गई और किसी तरह पैसे जोड़कर वापस झांसी आ गई। यहां जब बात नहीं बनी तो उसने गरौठा थाने में शिकायत की। थानेदार ने मामले प्रोबेशन अधिकारी राजीव शर्मा तक पहुंचाया। राजीव शर्मा के मुताबिक उन्होंने दोनों के परिजनों को बुलाया। समझाया और समझौता करवा दिया। जितेंद्र के परिजन कंचन को बहू स्वीकारने को राजी हो गए। ओरछा में जितेंद्र और कंचन का विवाह हो गया। इस तरह कंचन ने साबित कर दिया गया कि यदि प्यार सच्चा है तो मिलेगा जरूर। जितेंद्र का कहना है कि वह बहुत खुश है।