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हवाई अड्डा न होने की वजह से बीएचईएल झांसी के हाथों से खिसका मेट्रो का काम
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रेल कोच
- फोटो : ??? ???
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झांसी। तीन साल पहले बीएचईएल ने मेट्रो रेल इंजन निर्माण के कारोबार में कदम रखा था। तब इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही थी कि इसका उत्पादन बीएचईएल की झांसी इकाई में होगा। लेकिन, अब झांसी इकाई के हाथ से ये काम खिसकता नजर आ रहा है। इसकी बड़ी वजह यहां हवाई अड्डा न होना बताई जा रही है। दरअसल, मेट्रो रेल के उत्पादन के लिए बीएचईएल का जापान की एक कंपनी से करार हुआ है। उत्पादन के दौरान जापान से कंपनी के अफसरों व इंजीनियरों का आवागमन लगातार जारी रहेगा। ऐसे में हवाई सेवा की सुविधा न होने की वजह से उन्हें आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
मेट्रो रेल कारोबार में असीम संभावनाओं के मद्देनजर बीएचईएल (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) ने इस क्षेत्र में कदम रखा है। इसके लिए बीएचईएल का जापान की कंपनी कावासाकी से करार हुआ था। इसके तहत मेट्रो का निर्माण बीएचईएल को करना था, जबकि तकनीक कावासाकी को उपलब्ध करानी थी। इस परियोजना में बीएचईएल ने 500 करोड़ के निवेश की योजना बनाई थी। वैसे तो बीएचईएल के देश भर में 14 प्लांट हैं। लेकिन, इनमें से केवल झांसी प्लांट में ही लोकोमोटिव (रेल इंजनों) का निर्माण किया जाता है। यहां बनने वाले लोकोमोटिव उच्च गुणवत्ता के होते हैं। इसमें झांसी बीएचईएल की अच्छी साख है। साथ ही मेट्रो के निर्माण के लिए बीएचईएल के पास जगह की भी कोई कमी नहीं थी। यही वजह है कि तब माना जा रहा था कि मेट्रो का निर्माण बीएचईएल की झांसी इकाई में ही होगा। लेकिन, इन संभावनाओं के साकार होने की अब उम्मीद नहीं रह गई है। जी हां, इसकी वजह झांसी में हवाई सेवा की सुविधा न होना बनी है।
बीएचईएल के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि मेट्रो उत्पादन के दौरान जापान से कावासाकी कंपनी के अधिकारियों व इंजीनियरों का लगातार आना-जाना बना रहेगा। झांसी में उत्पादन होने पर उन्हें दिल्ली से झांसी ट्रेन या सड़क मार्ग से आना होगा। इसमें उनका समय भी ज्यादा खर्च होगा। साथ ही, दिक्कतों का भी सामना करना पड़ेगा। चूंकि, भोपाल में हवाई अड्डा स्थित है। ऐसे में मेट्रो की परियोजना भोपाल जाने की संभावनाएं बनी हुई हैं।
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मेट्रो रेल कारोबार में असीम संभावनाओं के मद्देनजर बीएचईएल (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) ने इस क्षेत्र में कदम रखा है। इसके लिए बीएचईएल का जापान की कंपनी कावासाकी से करार हुआ था। इसके तहत मेट्रो का निर्माण बीएचईएल को करना था, जबकि तकनीक कावासाकी को उपलब्ध करानी थी। इस परियोजना में बीएचईएल ने 500 करोड़ के निवेश की योजना बनाई थी। वैसे तो बीएचईएल के देश भर में 14 प्लांट हैं। लेकिन, इनमें से केवल झांसी प्लांट में ही लोकोमोटिव (रेल इंजनों) का निर्माण किया जाता है। यहां बनने वाले लोकोमोटिव उच्च गुणवत्ता के होते हैं। इसमें झांसी बीएचईएल की अच्छी साख है। साथ ही मेट्रो के निर्माण के लिए बीएचईएल के पास जगह की भी कोई कमी नहीं थी। यही वजह है कि तब माना जा रहा था कि मेट्रो का निर्माण बीएचईएल की झांसी इकाई में ही होगा। लेकिन, इन संभावनाओं के साकार होने की अब उम्मीद नहीं रह गई है। जी हां, इसकी वजह झांसी में हवाई सेवा की सुविधा न होना बनी है।
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बीएचईएल के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि मेट्रो उत्पादन के दौरान जापान से कावासाकी कंपनी के अधिकारियों व इंजीनियरों का लगातार आना-जाना बना रहेगा। झांसी में उत्पादन होने पर उन्हें दिल्ली से झांसी ट्रेन या सड़क मार्ग से आना होगा। इसमें उनका समय भी ज्यादा खर्च होगा। साथ ही, दिक्कतों का भी सामना करना पड़ेगा। चूंकि, भोपाल में हवाई अड्डा स्थित है। ऐसे में मेट्रो की परियोजना भोपाल जाने की संभावनाएं बनी हुई हैं।
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