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मेडिकल कॉलेज में अब 24 घंटे स्ट्रेलाइजेशन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 14 May 2016 01:24 AM IST
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medical college
- फोटो : demo pic
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झांसी। मरीजों की सहूलियत के लिए अब महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में 24 घंटे स्ट्रेलाइजेशन की सुविधा रहेगी। इसके अलावा वार्ड में हर दिन साफ सुथरे चादर, तकियों की आपूर्ति की जाएगी।
मेडिकल कॉलेज में अभी सुबह आठ से शाम पांच बजे तक स्ट्रेलाइजेशन किया जाता है। वहीं, अकसर इमरजेंसी और गायनिक में मरीज देर रात अचानक भर्ती के लिए आ जाते हैं। कई बार तुरंत ऑपरेशन की स्थिति आ जाती है। औजारों के स्ट्रेलाइज्ड न हो पाने से कई बार ऑपरेशन में देरी हो जाती थी। इसी के मद्देनजर मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने 24 घंटे स्ट्रेलाइजेशन चालू रखने के निर्देश दे दिए हैं। सीसीटीवी कैमरे में यदि मरीज का अटेंडेंट यह काम करता दिखा तो स्टाफ नर्स के खिलाफ कार्रवाई होगी।
तीमारदार ने बदली बोतल तो कार्रवाई
मेडिकल कॉलेज में मरीज के साथ आने वाले तीमारदार को ही इंजेक्शन लगी बोतलें आदि बदलनी पड़ती हैं। जबकि, यह काम स्टाफ नर्स का होता है। इसके अलावा भी तीमारदार को कई कार्य करने पड़ते हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं में किसी तरह का खिलवाड़ न हो सके इसके लिए अब स्टाफ नर्स को ही मरीज से जुड़ा हर काम करना होगा। सीसीटीवी कैमरे में यदि स्टाफ नर्स की जगह मरीज का अटेंडेंट यह काम करता दिखा तो प्राचार्य द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
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यह होता है स्ट्रेलाइजेशन
ऑपरेशन में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों को मशीन से भाप द्वारा स्ट्रेलाइज कर फिर से ऑपरेशन लायक बनाया जाता है। मुख्य रूप से इन उपकरणों को जीवाणु मुक्त किया जाता है। वहीं, कॉटन, चादरों आदि को भी स्ट्रेलाइज्ड कर उपयोग में लाते हैं, ताकि मरीज को इन्फेक्शन न हो सके।
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मेडिकल कॉलेज में अभी सुबह आठ से शाम पांच बजे तक स्ट्रेलाइजेशन किया जाता है। वहीं, अकसर इमरजेंसी और गायनिक में मरीज देर रात अचानक भर्ती के लिए आ जाते हैं। कई बार तुरंत ऑपरेशन की स्थिति आ जाती है। औजारों के स्ट्रेलाइज्ड न हो पाने से कई बार ऑपरेशन में देरी हो जाती थी। इसी के मद्देनजर मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने 24 घंटे स्ट्रेलाइजेशन चालू रखने के निर्देश दे दिए हैं। सीसीटीवी कैमरे में यदि मरीज का अटेंडेंट यह काम करता दिखा तो स्टाफ नर्स के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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तीमारदार ने बदली बोतल तो कार्रवाई
मेडिकल कॉलेज में मरीज के साथ आने वाले तीमारदार को ही इंजेक्शन लगी बोतलें आदि बदलनी पड़ती हैं। जबकि, यह काम स्टाफ नर्स का होता है। इसके अलावा भी तीमारदार को कई कार्य करने पड़ते हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं में किसी तरह का खिलवाड़ न हो सके इसके लिए अब स्टाफ नर्स को ही मरीज से जुड़ा हर काम करना होगा। सीसीटीवी कैमरे में यदि स्टाफ नर्स की जगह मरीज का अटेंडेंट यह काम करता दिखा तो प्राचार्य द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
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यह होता है स्ट्रेलाइजेशन
ऑपरेशन में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों को मशीन से भाप द्वारा स्ट्रेलाइज कर फिर से ऑपरेशन लायक बनाया जाता है। मुख्य रूप से इन उपकरणों को जीवाणु मुक्त किया जाता है। वहीं, कॉटन, चादरों आदि को भी स्ट्रेलाइज्ड कर उपयोग में लाते हैं, ताकि मरीज को इन्फेक्शन न हो सके।