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Jhansi News: झांसी की बालूशाही का स्वाद चखेंगे लखनऊ के मेहमान
Fri, 26 Jun 2026 02:32 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Fri, 26 Jun 2026 02:32 AM IST
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झांसी। मिठास सिर्फ स्वाद में नहीं, बल्कि परंपरा और मेहनत में भी होती है। झांसी की प्रसिद्ध बालूशाही अब लखनऊ के मेहमानों तक अपनी पहचान बनाएगी। जिले के दो युवा मिठाई कारीगर आकाश कुशवाहा और लक्ष्मण कुशवाहा एमएसएमई दिवस पर 27 से 29 जून तक लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में अपनी बालूशाही का स्वाद चखाएंगे।
बालूशाही झांसी की पारंपरिक मिठाइयों में शामिल है। मैदा, घी और चीनी की चाशनी से तैयार होने वाली यह मिठाई लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। विवाह व अन्य आयोजनों में इसकी खास मांग रहती है। एक जिला एक व्यंजन (ओडीओपी) योजना में चयन के बाद अब इसकी ब्रांडिंग और पहचान बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है।
खजूर बाग नई बस्ती निवासी आकाश कुशवाहा और बड़ागांव गेट बाहर निवासी लक्ष्मण कुशवाहा ने इस पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है। दोनों युवाओं ने यह कला अपने परिवार से सीखी और अब इसे नई पहचान देने में जुटे हैं।
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आकाश बताते हैं कि कैटरिंग के साथ मिठाई बनाने का काम उनका पुश्तैनी व्यवसाय है। विवाह समारोहों में बालूशाही बनाने के लगातार ऑर्डर मिलते हैं। वहीं लक्ष्मण करीब 12-13 वर्षों से इस काम से जुड़े हैं। पिता से सीखे हुनर को अब आगे बढ़ा रहे हैं।
दोनों इससे पहले न्यायालय परिसर में आयोजित लोक अदालत में भी अपनी बालूशाही का स्वाद लोगों को चखा चुके हैं। अब उनका लक्ष्य झांसी की इस मिठाई को बड़े मंच तक पहुंचाना है।
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बालूशाही की विशिष्टता के कारण इसे एक जिला एक व्यंजन योजना में शामिल किया गया है। यह झांसी की खानपान परंपरा और स्थानीय संस्कृति की पहचान को मजबूत करेगी। प्रयास है कि इसका स्वाद देश-विदेश तक पहुंचे। - मनीष चौधरी, उपायुक्त उद्योग
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बालूशाही झांसी की पारंपरिक मिठाइयों में शामिल है। मैदा, घी और चीनी की चाशनी से तैयार होने वाली यह मिठाई लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। विवाह व अन्य आयोजनों में इसकी खास मांग रहती है। एक जिला एक व्यंजन (ओडीओपी) योजना में चयन के बाद अब इसकी ब्रांडिंग और पहचान बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है।
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खजूर बाग नई बस्ती निवासी आकाश कुशवाहा और बड़ागांव गेट बाहर निवासी लक्ष्मण कुशवाहा ने इस पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है। दोनों युवाओं ने यह कला अपने परिवार से सीखी और अब इसे नई पहचान देने में जुटे हैं।
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आकाश बताते हैं कि कैटरिंग के साथ मिठाई बनाने का काम उनका पुश्तैनी व्यवसाय है। विवाह समारोहों में बालूशाही बनाने के लगातार ऑर्डर मिलते हैं। वहीं लक्ष्मण करीब 12-13 वर्षों से इस काम से जुड़े हैं। पिता से सीखे हुनर को अब आगे बढ़ा रहे हैं।
दोनों इससे पहले न्यायालय परिसर में आयोजित लोक अदालत में भी अपनी बालूशाही का स्वाद लोगों को चखा चुके हैं। अब उनका लक्ष्य झांसी की इस मिठाई को बड़े मंच तक पहुंचाना है।
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बालूशाही की विशिष्टता के कारण इसे एक जिला एक व्यंजन योजना में शामिल किया गया है। यह झांसी की खानपान परंपरा और स्थानीय संस्कृति की पहचान को मजबूत करेगी। प्रयास है कि इसका स्वाद देश-विदेश तक पहुंचे। - मनीष चौधरी, उपायुक्त उद्योग