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कथा सुनने मात्र से हो जाता जीवन का उद्धार : शास्त्री
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संवाद न्यूज एजेंसी
जाखलौन। कथा व्यास विनीता शास्त्री ने सोमवार को सुदामा चरित और परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई। उन्होंने भागवत को अपने जीवन में उतारने की बात कही, जिससे लोग धर्म की ओर अग्रसर हो सकें। कहा कि कथा के श्रवण मात्र से ही जीवन का उद्धार हो जाता है।
रणछोड़ धाम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथा वाचक ने कहा कि सुदामा भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र थे। भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। गरीबी के बाद भी भगवान के ध्यान में मग्न रहते थे। पत्नी सुशीला सुदामा से बार-बार आग्रह करतीं कि आपके मित्र तो द्वारिकाधीश हैं, उनसे जाकर मिलो, शायद आपकी मदद कर दें। सुदामा द्वारिका पहुंचे और द्वारपाल ने कृष्ण को बताया कि सुदामा नाम का एक ब्राह्मण आया है। यह सुनकर भगवान नंगे पैर दौड़कर आते हैं और अपने मित्र को गले से लगा लेते हैं। श्रीकृष्ण की आंखों से अश्रुधारा बहने लगती है। उन्होंने भक्तों के सामने दोस्ती की मिसाल पेश की व समाज में समानता का संदेश दिया। कथा में श्रद्धालु भाव विभोर होकर नाच रहे थे।
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जाखलौन। कथा व्यास विनीता शास्त्री ने सोमवार को सुदामा चरित और परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई। उन्होंने भागवत को अपने जीवन में उतारने की बात कही, जिससे लोग धर्म की ओर अग्रसर हो सकें। कहा कि कथा के श्रवण मात्र से ही जीवन का उद्धार हो जाता है।
रणछोड़ धाम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथा वाचक ने कहा कि सुदामा भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र थे। भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। गरीबी के बाद भी भगवान के ध्यान में मग्न रहते थे। पत्नी सुशीला सुदामा से बार-बार आग्रह करतीं कि आपके मित्र तो द्वारिकाधीश हैं, उनसे जाकर मिलो, शायद आपकी मदद कर दें। सुदामा द्वारिका पहुंचे और द्वारपाल ने कृष्ण को बताया कि सुदामा नाम का एक ब्राह्मण आया है। यह सुनकर भगवान नंगे पैर दौड़कर आते हैं और अपने मित्र को गले से लगा लेते हैं। श्रीकृष्ण की आंखों से अश्रुधारा बहने लगती है। उन्होंने भक्तों के सामने दोस्ती की मिसाल पेश की व समाज में समानता का संदेश दिया। कथा में श्रद्धालु भाव विभोर होकर नाच रहे थे।
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