फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   lala hardaul bhat dayo...

महाशोर भयो मरें हरदौल भात दयो...

Tue, 26 Nov 2019 01:45 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 26 Nov 2019 01:45 AM IST
विज्ञापन
lala hardaul bhat dayo...
lala hardaul bhat dayo... - फोटो : DEHAT
महाशोर भयो मरें हरदौल भात दयो...
विज्ञापन

ओरछा। दीमान हरदौल एक ऐसे लोक देवता हैं जिन्हें बुंदेलखंड की बहनें अपने भाई के रूप में पूजतीं है। किसी भी घर में शादी की शुरुआत में पहला निमंत्रण कार्ड रामराजा सरकार को चढ़ाने के बाद दूसरा आमंत्रण लाला हरदौल को ही दिया जाता है। महिलाएं निमंत्रण के साथ पीले चावल लेकर हरदौल जी के स्थान पर जाती हैं तथा भैया हरदौल से प्रार्थना करती हैं कि वह शादी में पधारें और कार्य संभालें। एक नारियल लेकर प्रतिमा की परिक्रमा करती हैं तथा इस नारियल को इस आशय के साथ अपने घर लेकर जाती हैं कि हरदौल जी को वह अपने साथ अपने घर शादी में लेकर जा रही हैं। शादी निर्विध्न संपन्न होने पर घर में स्थापित नारियल को सम्मान के साथ ओरछा स्थित हरदौल के स्थान पर लाकर लाला हरदौल की विदाई की जाती है। विवाह समारोह में जब भी कोई प्राकृतिक विघ्न आती हैं तो सालों से गाये जा रहे बुंदेली लोकगीत, हरदौल भैया भानेजन को कारज आन संवारों गाती हैं और ऐसी लोक मान्यता है आंधी पानी बंद हो जाता है।
मुगलों के षड्यंत्र से दिया गया था जहर
इस संबंध में पृथ्वीपुर निवासी साहित्यकार उमाशंकर उमेश ने बताया किसोलहवी शताब्दी के उत्तरार्द्ध में मुगल सल्तनत का स्वर्णिम काल था। ओरछा के राजा जुझार सिंह थे, उनके छोटे भाई दीमान हरदौल ने हिंदू सेना की एक अलग से टुकड़ी बना रखी थी। देश सेवा की खातिर ही हरदौल ने शादी कराने से भी इंकार कर दिया था। यह बात बादशाह शाहजहां को खटकती थी। उन्होंने षड्यंत्र करके जुझार के मन में यह बात डाल दी कि उनके छोटे भाई हरदौल के अपनी भाभी (जुझार सिंह की पत्नी) से नाजायज संबंध हैं,। इस पर जुझार सिंह ने अपनी रानी के हाथ से ही हरदौल को जहर खिलवा कर मार डाला था।
विज्ञापन

महिलाएं क्यों मानती हैं भाई
इस संबंध में कवयित्री प्रोफेसर नम्रता जैन छतरपुर बताती हैं कि ऐसी लोककथा है कि हरदौल की मृत्यु के बाद उनकी बहन कुंजावती उनकी समाधि पर अपनी बेटी की शादी का निमंत्रण देने गई थीं। हरदौल को बार- बार पुकारने पर कोई आवाज न आने पर उन्होंने समाधि पर ही खंजर से खुदकुशी करने की कोशिश की तो हरदौल की आवाज आई तथा उन्होंने वादा किया कि वे भानेजन की शादी में भात (उपहार व गहने) लेकर आएंगे। शादी वाले रोज कुंजावती के दरवाजे पर बैलगाड़ियों से अनाज, उपहार व अन्य सामान पहुंच गया पर हरदौल कहीं भी दिखाई नहीं दे रहे थे। बुंदेली व्यंजनों की पंगति शुरू हो गई, बुंदेलखंड में परंपरा के अनुसार मामा लोटे में घी लेकर परोसते हैं, पर यहां लोटा तो दिखाई दे रहा था परोसने वाला नहीं। दूल्हे ने लोटे को पकड़ लिया तथा कहा कि जब तक मामा दर्शन नहीं देंगे वह भोजन नहीं करेंगे। हरदौल की बहन कुंजावती ने प्रार्थना करते हुए कहा कि भैया उनके वैवाहिक कार्य को निर्विघ्न संपन्न कराइए। तब हरदौैल ने दर्शन देकर अपनी बहन से कहा कि आज जो भी वरदान मांगेंगी वह पूरा होगा। तब कुंजावती ने वरदान मांगा था कि जिस तरह आज आपने अपनी वहन के घर पर वैवाहिक कार्य को निर्विघ्न संपन्न कराया, जब भी बुंदेलखंड की कोई भी बहन आपको शादी का कार्ड देने आए आप उस बहन का कार्य भी इसी तरह संभालना। इतिहासविद हरगोविंद कुशवाहा बताते हैं कि ओरछा के अलावा बुंदेलखंड के गांव-गांव में हरदौल के चबूतरे हैं। ओरछा हरदौल मंदिर के पुजारी मुकेश केवट का कहना है कि शादी का मौसम शुरू होते ही यहां निमंत्रण कार्डों की भरमार हो जाती है प्रतिदिन दो से पांच सौ कार्ड प्रतिदिन चढ़ाए जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed