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पंकज की अंगुलियों के इशारे पर नाचते हैं कीबोर्ड
Mon, 03 Jun 2019 12:48 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Mon, 03 Jun 2019 12:48 AM IST
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झांसी। उत्तर प्रदेश पुलिस की कंप्यूटर ऑपरेटर के टाइपिंग टेस्ट में बुरी तरह पिछड़ने के बाद पंकज पाराशर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। टाइपिंग का उन्हें ऐसा जुनून सवार हुआ कि विश्व स्तर पर कीर्तिमान बना डाला। हिंदी टाइपिंग हो या अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में कीबोर्ड उनकी अंगुलियों के इशारे पर नाचते हैं। अपनी इस प्रतिभा को वे लगातार तराशने में जुटे हुए हैं।
बड़ागांव में रहने वाले किसान प्रभुदयाल पाराशर के पुत्र पंकज पाराशर ने 2010 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी। इसके बाद उन्होेंने कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया। 2016 में पंकज उत्तर प्रदेश पुलिस की कंप्यूटर ऑपरेटर की परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा पास करने के लिए उन्हें हिंदी में 25 और अंग्रेजी में 30 शब्द प्रति मिनट टाइप करने थे लेकिन दोनों ही भाषाओं में पंकज बुरी तरह से पिछड़ गए। परीक्षा में हिंदी की उनकी स्पीड महज छह शब्द प्रति मिनट निकलकर आई, जबकि इंग्लिश में वे 13 शब्द प्रति मिनट ही लिख पाए। मगर उन्होंने हार नहीं मानी। इस असफलता को पंकज ने अपनी सफलता का आधार बनाया और जोड़ लिया कीबोर्ड से नाता। निरंतर अभ्यास करने से उनकी टाइपिंग की गति लगातार बढ़ती गई। इसी दरम्यान वे टाइपिंग की ऑनलाइन परीक्षा लेने वाली विश्वस्तरीय वेबसाइट ‘10 फास्ट फिंगर्स डॉट कॉम’ और ‘टाइप रेसर’ के संपर्क में आ गए। इन वेबसाइटों पर उन्हें अपनी स्पीड को परखने का मौका मिला।
पंकज ने बताया कि वे हिंदी में मंगल फोंट पर टाइपिंग करते हैं। 10 फास्ट फिंगर्स डॉट कॉम पर वे हिंदी में सर्वाधिक 134 शब्द प्रति मिनट की स्पीड निकाल चुके हैं। जबकि, इंग्लिश में उनकी स्पीड 127 शब्द प्रति मिनट दर्ज हो चुकी है। इसी प्रकार टाइप रेसर में वे हिंदी में 93 और इंग्लिश में 96 शब्द प्रति मिनट की रफ्तार दे चुके हैं। इन दोनों वेबसाइटों पर वे भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के कई देशों के प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ चुके हैं।
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खुद बने अपने गुरु
पंकज ने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस की कंप्यूटर ऑपरेटर की परीक्षा में फेल होने के बाद वे बेहद निराश हो गए थे। उनकी निराशा तब और बढ़ जाती थी, जब दूसरे लोग उन्हें बताते थे कि टाइपिंग टेस्ट निकालना हर किसी के बूते की बात नहीं होती है। मगर एक दिन अचानक उन्होंने ठान लिया कि वे इस चुनौती से जीतकर रहेंगे। अलग से एक कीबोर्ड खरीद कर लाए और उसे लैपटॉप से जोड़कर शुरू हो गए अभ्यास में। खुद को ही अपना गुरु बनाया और शिष्य बनकर हासिल की सफलता।
सरकारी सेवा में जाना लक्ष्य
पंकज ने बताया कि उनका लक्ष्य सरकारी सेवा में जाना है। इसकी तैयारी में वे जुट गए हैं। खासतौर पर उनका ध्यान उन सरकारी सेवाओं की ओर है, जहां चयन लिखित परीक्षा और टाइपिंग स्पीड के आधार पर होता है। लिखित परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
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बड़ागांव में रहने वाले किसान प्रभुदयाल पाराशर के पुत्र पंकज पाराशर ने 2010 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी। इसके बाद उन्होेंने कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया। 2016 में पंकज उत्तर प्रदेश पुलिस की कंप्यूटर ऑपरेटर की परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा पास करने के लिए उन्हें हिंदी में 25 और अंग्रेजी में 30 शब्द प्रति मिनट टाइप करने थे लेकिन दोनों ही भाषाओं में पंकज बुरी तरह से पिछड़ गए। परीक्षा में हिंदी की उनकी स्पीड महज छह शब्द प्रति मिनट निकलकर आई, जबकि इंग्लिश में वे 13 शब्द प्रति मिनट ही लिख पाए। मगर उन्होंने हार नहीं मानी। इस असफलता को पंकज ने अपनी सफलता का आधार बनाया और जोड़ लिया कीबोर्ड से नाता। निरंतर अभ्यास करने से उनकी टाइपिंग की गति लगातार बढ़ती गई। इसी दरम्यान वे टाइपिंग की ऑनलाइन परीक्षा लेने वाली विश्वस्तरीय वेबसाइट ‘10 फास्ट फिंगर्स डॉट कॉम’ और ‘टाइप रेसर’ के संपर्क में आ गए। इन वेबसाइटों पर उन्हें अपनी स्पीड को परखने का मौका मिला।
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पंकज ने बताया कि वे हिंदी में मंगल फोंट पर टाइपिंग करते हैं। 10 फास्ट फिंगर्स डॉट कॉम पर वे हिंदी में सर्वाधिक 134 शब्द प्रति मिनट की स्पीड निकाल चुके हैं। जबकि, इंग्लिश में उनकी स्पीड 127 शब्द प्रति मिनट दर्ज हो चुकी है। इसी प्रकार टाइप रेसर में वे हिंदी में 93 और इंग्लिश में 96 शब्द प्रति मिनट की रफ्तार दे चुके हैं। इन दोनों वेबसाइटों पर वे भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के कई देशों के प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ चुके हैं।
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खुद बने अपने गुरु
पंकज ने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस की कंप्यूटर ऑपरेटर की परीक्षा में फेल होने के बाद वे बेहद निराश हो गए थे। उनकी निराशा तब और बढ़ जाती थी, जब दूसरे लोग उन्हें बताते थे कि टाइपिंग टेस्ट निकालना हर किसी के बूते की बात नहीं होती है। मगर एक दिन अचानक उन्होंने ठान लिया कि वे इस चुनौती से जीतकर रहेंगे। अलग से एक कीबोर्ड खरीद कर लाए और उसे लैपटॉप से जोड़कर शुरू हो गए अभ्यास में। खुद को ही अपना गुरु बनाया और शिष्य बनकर हासिल की सफलता।
सरकारी सेवा में जाना लक्ष्य
पंकज ने बताया कि उनका लक्ष्य सरकारी सेवा में जाना है। इसकी तैयारी में वे जुट गए हैं। खासतौर पर उनका ध्यान उन सरकारी सेवाओं की ओर है, जहां चयन लिखित परीक्षा और टाइपिंग स्पीड के आधार पर होता है। लिखित परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही बेहतर परिणाम सामने आएंगे।