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श्री बलदाऊ मंदिर में दाऊ और माता रेवती संग विराजे हैं कान्हा
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सदर बाजार के बलदाऊ मंदिर में सजी बलदाऊ, माता रेवती व साथ में कांहा की भव्य प्रतिमाएं। अमर उजाला
झांसी। शहर के श्री बलदाऊ जी मंदिर की महिमा निराली है। सौ वर्ष से भी अधिक प्राचीन यह मंदिर सदर बाजार में स्थित है। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण, बलदाऊ जी और रेवती माता की बेशकीमती अष्टधातु की मूर्तियां विराजमान हैं।
भगवान बलदाऊ जी का यह शहर में एक मात्र मंदिर माना गया है। मंदिर परिसर में हनुमान जी और भगवान भोलेनाथ की मूर्तियां भी विराजमान हैं। मंदिर के पुजारी ह्दयेश शुक्ला ने बताया कि यह मंदिर सौ वर्ष से भी अधिक पुराना है। मंदिर में लगातार आयोजन किए जाते हैं। हर जन्माष्टमी को रात 12 बजे लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाते हैं। इसके तीसरे दिन भव्य मटकी फोड़ उत्सव कराया जाता है।
इसके बाद एकादशी को जल विहार के लिए भगवान की झांकी और विमान यात्रा निकाली जाती है। भगवान श्रीकृष्ण की छठी पर बधाई गाई जाती है। हर साल रंग पंचमी को उत्सव मनाते हैं। मंदिर के व्यवस्थापक ऋषभ शुक्ला बताते हैं कि जन्माष्टमी को भगवान को माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है। इस बार 28 अगस्त को दोपहर 12 बजे मंदिर में हरछठ के दिन भगवान बलदाऊ का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
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मटकी फोड़ने की परंपरा है 97 साल पुरानी है...
झांसी। शहर से श्री बलदाऊ जी मंदिर में जन्माष्टमी के बाद होने वाले मटकी फोड़ उत्सव को 97 वर्ष पूरे हो रहे हैं। सदर में मंदिर के बाहर होने वाले इस उत्सव में दूध, दही, मक्खन और मेवा की एक मटकी काफी ऊंचाई पर बांधी जाती है। इसे तोड़ने वाले को हजारों का पुरस्कार दिया जाता है। वहीं, इसे तोड़ने के लिए सिमरधा, ग्वालटोली, चिरगांव, राजगढ़ सहित दूर-दूर से युवाओं की टोलियां आती हैं। ये सुंदर नजारा देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है। दिन भर उत्सव चलता है, भव्य मेला भी लगता है, लेकिन इस बार कोरोना काल की वजह से यह आयोजन छोटे स्तर पर मंदिर के भीतर ही होगा।
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भगवान बलदाऊ जी का यह शहर में एक मात्र मंदिर माना गया है। मंदिर परिसर में हनुमान जी और भगवान भोलेनाथ की मूर्तियां भी विराजमान हैं। मंदिर के पुजारी ह्दयेश शुक्ला ने बताया कि यह मंदिर सौ वर्ष से भी अधिक पुराना है। मंदिर में लगातार आयोजन किए जाते हैं। हर जन्माष्टमी को रात 12 बजे लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाते हैं। इसके तीसरे दिन भव्य मटकी फोड़ उत्सव कराया जाता है।
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इसके बाद एकादशी को जल विहार के लिए भगवान की झांकी और विमान यात्रा निकाली जाती है। भगवान श्रीकृष्ण की छठी पर बधाई गाई जाती है। हर साल रंग पंचमी को उत्सव मनाते हैं। मंदिर के व्यवस्थापक ऋषभ शुक्ला बताते हैं कि जन्माष्टमी को भगवान को माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है। इस बार 28 अगस्त को दोपहर 12 बजे मंदिर में हरछठ के दिन भगवान बलदाऊ का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
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मटकी फोड़ने की परंपरा है 97 साल पुरानी है...
झांसी। शहर से श्री बलदाऊ जी मंदिर में जन्माष्टमी के बाद होने वाले मटकी फोड़ उत्सव को 97 वर्ष पूरे हो रहे हैं। सदर में मंदिर के बाहर होने वाले इस उत्सव में दूध, दही, मक्खन और मेवा की एक मटकी काफी ऊंचाई पर बांधी जाती है। इसे तोड़ने वाले को हजारों का पुरस्कार दिया जाता है। वहीं, इसे तोड़ने के लिए सिमरधा, ग्वालटोली, चिरगांव, राजगढ़ सहित दूर-दूर से युवाओं की टोलियां आती हैं। ये सुंदर नजारा देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है। दिन भर उत्सव चलता है, भव्य मेला भी लगता है, लेकिन इस बार कोरोना काल की वजह से यह आयोजन छोटे स्तर पर मंदिर के भीतर ही होगा।