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अलविदा जुमे की नमाज घरों में अता कर मांगीं दुआएं
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juma namaj
- फोटो : Shutterstock / Creativa
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झांसी। लॉकडाउन के चलते रमजान के अलविदा जुमे की नमाज घरों में अता की गई। रोजेदारों ने रोजा रखने के साथ नमाज अता कर कोरोना वायरस के खात्मे के लिए हाथ उठाकर दुआएं कीं। दिन भर घरों में इबादत का सिलसिला चलता रहा।
पाक रमजान माह के रोजे और इबादतों के बाद आने वाला ईद-उल फितर का त्योहार खुदा का इनाम है। खुशियों का गुलदस्ता है, मुस्कुराहटों का मौसम है और जश्न की रौनक है। इसलिए ईद का चांद नजर आते ही माहौल में एक गजब का उल्लास छा जाता है।
मुफ्ती इमरान नदवी ने बताया कि पैगंबरे इस्लाम ने कहा है कि जब अहले ईमान रमजान के पवित्र महीने के एहतेरामों से फारिग हो जाते हैं और रोजों-नमाजों तथा उसके तमाम कामों को पूरा कर लेते हैं, तो अल्लाह एक दिन अपने उस इबादत करने वाले बंदों को बख्शीश व इनाम से नवाजता है। इसलिए इस दिन को ईद कहते हैं और इसी बख्शीश व इनाम के दिन को ईद-उल फितर का नाम देते हैं। रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है। इस पूरे माह में रोजे रखे जाते हैं। इस महीने के खत्म होते ही दसवां माह शव्वाल शुरू होता है।
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इस माह की पहली चांद रात ईद की चांद रात होती है। इस रात का इंतजार वर्ष भर खास वजह से होता है, क्योंकि इस रात को दिखने वाले चांद से ही इस्लाम के बड़े त्योहार ईद-उल फितर का ऐलान होता है। इस तरह से यह चांद ईद का पैगाम लेकर आता है। इस चांद रात को अल्फा कहा जाता है। बताया कि रमजान माह के रोजे को एक फर्ज करार दिया गया है, ताकि इंसानों को भूख-प्यास का महत्व पता चले। दुनियावी मालदौलत के लिए भागदौड़ और लालच इंसान के वजूद से जुदा हो जाए और इंसान कुरआन के अनुसार अपने को ढाल लें। इसलिए रमजान का महीना इंसान को अशरफ और आला बनाने वाला है। पर अगर कोई सिर्फ अल्लाह की ही इबादत करे और उसके बंदों से मोहब्बत करने व उनकी मदद करने से हाथ खींचे तो ऐसी इबादत को इस्लाम ने खारिज किया है। क्योंकि असल में इस्लाम का पैगाम है- अगर अल्लाह की सच्ची इबादत करनी है तो उसके सभी बंदों से प्यार करो और हमेशा सबके मददगार बनो। यह इबादत ही सही इबादत है। यही नहीं, ईद की असल खुशी भी इसी में है।
नमाज से पहले निकालें फितरा
ईद मनाने से पहले फितरा और जकात निकालना जरूरी है। फितरा गरीब और मजलूमों को दिया जाता है। जिससे वह भी ईद की खुशी में शरीक हो सकें। फितरे और जकात अदा न करने से रमजान के फजाईल अधूरे रह जाते है। मालदार मुसलमान (जिसके पास साढ़े बावन तोले सोना हो) को अपनी कुल माल दौलत (जिस पर एक साल गुजर गया हो) के ढाई प्रतिशत या चालीसवां हिस्सा गरीबों में खैरात करना होता है।
ईद की दावत में सेवई, शीरखुरमा होंगे खास
घरों में महकेंगी लजीज व्यंजनों की खुशबू, शुरू हो गई तैयारी
- लॉकडाउन में खास मेहमानों का खास तरीके से किया जा रहा इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। एक महीने की इबादत के बाद अब ईद के चांद को देखने का इंतजार है। घरों में साफ सफाई, रंगाई पुताई का भी दौर चल रहा है। उम्मीद है कि 24 या 25 जून को चांद देखकर ईद मनाई जाएगी। घरों में सजावट, के साथ-साथ मेहमानों के स्वागत की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
हालांकि परंपरागत व्यंजन शीर और शीरखुरमे के साथ दही बड़े, छोटे सेवई, शामी कबाब, गुलौटी कबाब, बिरयानी, कचरियां, पापड़ी और फ्रूट कस्टर्ड दावत के खास व्यंजन होंगे। घरों में इन दिनों सेवई के लिए मेवों की कटिंग शुरू हो चुकी है। भले ही लॉकडाउन चल रहा है, लेकिन महिलाएं घरों में बनने वाले व्यंजनों को ज्यादा महत्व दे रही हैं। बाजार बंद होने की वजह से कम लोगों को ही न्यौता दिया जा रहा है, लेकिन मेहमान नवाजी का पूरा ख्याल भी रखने की तैयारी शुरू हो चुकी है। ईद पर लोगों को घर आने का न्योता दिया जाता है तो मेहमानों का मुंह मीठा करने के लिए सेवई से बेहतर कुछ भी मीठा नहीं हो सकता। ईद पर मिलने आने वाले लोगों को मुंह मीठा करने के साथ नमकीन के लिए कबाब, चटपटी चाट और नमकपारे, शकरपारे, सूखे नमकीन भी तैयार हो रहे हैं।
ईद पर ईदी मेें महंगे मोबाइल व बाइक की मांग
झांसी। ईद पर ईदी न मिले तो फिर ईद कैसी। बच्चों को जितनी बेचैनी से ईद का इंतजार है, उतना अपने बर्थडे का भी नहीं रहता। वजह यह है कि ईदी पर इस साल पैसे के बजाय महंगे गिफ्ट की मांग जो पूरी होने वाली है। ईद पर घर के बड़े छोटों को कुछ रुपये ईदी के तौर पर देते हैं, लेकिन अब ट्रेंड बदला है और गिफ्ट देने की परंपरा शुरू हो गई है। इस साल भी ईद पर बच्चों की मांग महंगे गिफ्ट हैं। बच्चों को ईदी में मोबाइल, स्कूटी, टेलबेट चाहिए।
इस बार ईद पर पापा से बाइक लेने की मांग रखी है। पापा ने ईद की नमाज के बाद बाइक दिलाने पर हामी भर दी है। यह ईद मेरे लिए बड़ी खुशी लेकर आएगी।
जुनैद, रोजेदार
ईद पर ईदी की जगह मोबाइल लेना चाहते हैं। इस साल मैंने रोजे भी रखे हैं। अब ईद पर पापा की तरफ से मुझे गिफ्ट मिलेगा। इस ईद पर मुझे गिफ्ट की खुशी है।
अरहम, रोजेदार
ईदी की जगह रुपये नहीं बल्कि पापा से लैपटॉप चाहिए। पापा ने भी दिलाने का वादा किया है। इससे मेरी पढ़ाई के साथ शौक भी पूरा हो जाएगा।
अयान, रोजेदार
ईद का मुझे लंबे समय से इंतजार था। अब जल्दी से चांद देखने के बाद यह खुशी दुगुनी हो जाएगी। पापा ने ईद की नमाज के पढ़कर गिफ्ट दिलाने का वादा किया है।
आतिफ, रोजेदार
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पाक रमजान माह के रोजे और इबादतों के बाद आने वाला ईद-उल फितर का त्योहार खुदा का इनाम है। खुशियों का गुलदस्ता है, मुस्कुराहटों का मौसम है और जश्न की रौनक है। इसलिए ईद का चांद नजर आते ही माहौल में एक गजब का उल्लास छा जाता है।
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मुफ्ती इमरान नदवी ने बताया कि पैगंबरे इस्लाम ने कहा है कि जब अहले ईमान रमजान के पवित्र महीने के एहतेरामों से फारिग हो जाते हैं और रोजों-नमाजों तथा उसके तमाम कामों को पूरा कर लेते हैं, तो अल्लाह एक दिन अपने उस इबादत करने वाले बंदों को बख्शीश व इनाम से नवाजता है। इसलिए इस दिन को ईद कहते हैं और इसी बख्शीश व इनाम के दिन को ईद-उल फितर का नाम देते हैं। रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है। इस पूरे माह में रोजे रखे जाते हैं। इस महीने के खत्म होते ही दसवां माह शव्वाल शुरू होता है।
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इस माह की पहली चांद रात ईद की चांद रात होती है। इस रात का इंतजार वर्ष भर खास वजह से होता है, क्योंकि इस रात को दिखने वाले चांद से ही इस्लाम के बड़े त्योहार ईद-उल फितर का ऐलान होता है। इस तरह से यह चांद ईद का पैगाम लेकर आता है। इस चांद रात को अल्फा कहा जाता है। बताया कि रमजान माह के रोजे को एक फर्ज करार दिया गया है, ताकि इंसानों को भूख-प्यास का महत्व पता चले। दुनियावी मालदौलत के लिए भागदौड़ और लालच इंसान के वजूद से जुदा हो जाए और इंसान कुरआन के अनुसार अपने को ढाल लें। इसलिए रमजान का महीना इंसान को अशरफ और आला बनाने वाला है। पर अगर कोई सिर्फ अल्लाह की ही इबादत करे और उसके बंदों से मोहब्बत करने व उनकी मदद करने से हाथ खींचे तो ऐसी इबादत को इस्लाम ने खारिज किया है। क्योंकि असल में इस्लाम का पैगाम है- अगर अल्लाह की सच्ची इबादत करनी है तो उसके सभी बंदों से प्यार करो और हमेशा सबके मददगार बनो। यह इबादत ही सही इबादत है। यही नहीं, ईद की असल खुशी भी इसी में है।
नमाज से पहले निकालें फितरा
ईद मनाने से पहले फितरा और जकात निकालना जरूरी है। फितरा गरीब और मजलूमों को दिया जाता है। जिससे वह भी ईद की खुशी में शरीक हो सकें। फितरे और जकात अदा न करने से रमजान के फजाईल अधूरे रह जाते है। मालदार मुसलमान (जिसके पास साढ़े बावन तोले सोना हो) को अपनी कुल माल दौलत (जिस पर एक साल गुजर गया हो) के ढाई प्रतिशत या चालीसवां हिस्सा गरीबों में खैरात करना होता है।
ईद की दावत में सेवई, शीरखुरमा होंगे खास
घरों में महकेंगी लजीज व्यंजनों की खुशबू, शुरू हो गई तैयारी
- लॉकडाउन में खास मेहमानों का खास तरीके से किया जा रहा इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। एक महीने की इबादत के बाद अब ईद के चांद को देखने का इंतजार है। घरों में साफ सफाई, रंगाई पुताई का भी दौर चल रहा है। उम्मीद है कि 24 या 25 जून को चांद देखकर ईद मनाई जाएगी। घरों में सजावट, के साथ-साथ मेहमानों के स्वागत की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
हालांकि परंपरागत व्यंजन शीर और शीरखुरमे के साथ दही बड़े, छोटे सेवई, शामी कबाब, गुलौटी कबाब, बिरयानी, कचरियां, पापड़ी और फ्रूट कस्टर्ड दावत के खास व्यंजन होंगे। घरों में इन दिनों सेवई के लिए मेवों की कटिंग शुरू हो चुकी है। भले ही लॉकडाउन चल रहा है, लेकिन महिलाएं घरों में बनने वाले व्यंजनों को ज्यादा महत्व दे रही हैं। बाजार बंद होने की वजह से कम लोगों को ही न्यौता दिया जा रहा है, लेकिन मेहमान नवाजी का पूरा ख्याल भी रखने की तैयारी शुरू हो चुकी है। ईद पर लोगों को घर आने का न्योता दिया जाता है तो मेहमानों का मुंह मीठा करने के लिए सेवई से बेहतर कुछ भी मीठा नहीं हो सकता। ईद पर मिलने आने वाले लोगों को मुंह मीठा करने के साथ नमकीन के लिए कबाब, चटपटी चाट और नमकपारे, शकरपारे, सूखे नमकीन भी तैयार हो रहे हैं।
ईद पर ईदी मेें महंगे मोबाइल व बाइक की मांग
झांसी। ईद पर ईदी न मिले तो फिर ईद कैसी। बच्चों को जितनी बेचैनी से ईद का इंतजार है, उतना अपने बर्थडे का भी नहीं रहता। वजह यह है कि ईदी पर इस साल पैसे के बजाय महंगे गिफ्ट की मांग जो पूरी होने वाली है। ईद पर घर के बड़े छोटों को कुछ रुपये ईदी के तौर पर देते हैं, लेकिन अब ट्रेंड बदला है और गिफ्ट देने की परंपरा शुरू हो गई है। इस साल भी ईद पर बच्चों की मांग महंगे गिफ्ट हैं। बच्चों को ईदी में मोबाइल, स्कूटी, टेलबेट चाहिए।
इस बार ईद पर पापा से बाइक लेने की मांग रखी है। पापा ने ईद की नमाज के बाद बाइक दिलाने पर हामी भर दी है। यह ईद मेरे लिए बड़ी खुशी लेकर आएगी।
जुनैद, रोजेदार
ईद पर ईदी की जगह मोबाइल लेना चाहते हैं। इस साल मैंने रोजे भी रखे हैं। अब ईद पर पापा की तरफ से मुझे गिफ्ट मिलेगा। इस ईद पर मुझे गिफ्ट की खुशी है।
अरहम, रोजेदार
ईदी की जगह रुपये नहीं बल्कि पापा से लैपटॉप चाहिए। पापा ने भी दिलाने का वादा किया है। इससे मेरी पढ़ाई के साथ शौक भी पूरा हो जाएगा।
अयान, रोजेदार
ईद का मुझे लंबे समय से इंतजार था। अब जल्दी से चांद देखने के बाद यह खुशी दुगुनी हो जाएगी। पापा ने ईद की नमाज के पढ़कर गिफ्ट दिलाने का वादा किया है।
आतिफ, रोजेदार