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सरसोकी से ऊसरगांव के बीच डबल ट्रैक पर चार के बाद दौड़ेंगी ट्रेनें, नए सेक्शन का निरीक्षण करेंगे सीआरएस
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Train tracks in rural area.
- फोटो : Darren Hester
झांसी। झांसी- कानपुर डबल ट्रैक पर सरसोकी से ऊसरगांव के बीच दोहरी लाइन (17.585 किलोमीटर) बिछाने का काम पूरा कर लिया गया है। चार मार्च को रेल संरक्षा आयुक्त इस लाइन का निरीक्षण करेंगे। उनके द्वारा हरी झंडी देते ही इन स्टेशनों के बीच डबल ट्रैक पर ट्रेनें दौड़ना शुरू हो जाएंगी। अब तक 206 में से 70 किलोमीटर तक का डबल ट्रैक खोल दिया गया है।
पूर्वोत्तर मंडल के रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) मोहम्मद लतीफ खान चार मार्च को उरई सेक्शन में बनाए गए नए स्टेशन सरसोकी, आटा से लेकर ऊसरगांव तक डबल ट्रैक का निरीक्षण करेंगे। वह यहां अधिकारियों के साथ स्पीड ट्रेन में बैठकर ट्रायल लेंगे। ट्रायल सफल रहा तो उनके द्वारा हरी झंडी देते ही उक्त स्टेशनों के बीच ट्रेनें दौड़ना शुरू हो जाएंगी। यह सेक्शन 17.585 किलोमीटर का तैयार किया गया है। झांसी-कानपुर डबल ट्रैक में 206 किलोमीटर तक काम होना है। इसके पूर्व 70 किलोमीटर दोहरी रेल लाइन पर गाड़ियां दौड़ने लगीं हैं।
इसमें झांसी- पारीछा के बीच 24 किलोमीटर , पारीछा से नंदखास के बीच 19 और पिरौना- एट व भुआ स्टेशन के बीच 27 किलोमीटर रेल लाइन चालू हो चुकी है।
अभी झांसी-कानपुर सिंगल रेलवे ट्रैक पर प्रतिदिन 40 से अधिक अप और डाउन की सवारी ट्रेनों का संचालन होता है। इतनी ही संख्या में मालगाड़ियां भी दौड़ती हैं। एक ट्रेन को निकालने में सामने आ रही दूसरी ट्रेन को नजदीक के रेलवे स्टेशन पर रोकना पड़ता है। इसका सीधा असर ट्रेनों के समय पालन पर पड़ता है।
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पूर्वोत्तर मंडल के रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) मोहम्मद लतीफ खान चार मार्च को उरई सेक्शन में बनाए गए नए स्टेशन सरसोकी, आटा से लेकर ऊसरगांव तक डबल ट्रैक का निरीक्षण करेंगे। वह यहां अधिकारियों के साथ स्पीड ट्रेन में बैठकर ट्रायल लेंगे। ट्रायल सफल रहा तो उनके द्वारा हरी झंडी देते ही उक्त स्टेशनों के बीच ट्रेनें दौड़ना शुरू हो जाएंगी। यह सेक्शन 17.585 किलोमीटर का तैयार किया गया है। झांसी-कानपुर डबल ट्रैक में 206 किलोमीटर तक काम होना है। इसके पूर्व 70 किलोमीटर दोहरी रेल लाइन पर गाड़ियां दौड़ने लगीं हैं।
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इसमें झांसी- पारीछा के बीच 24 किलोमीटर , पारीछा से नंदखास के बीच 19 और पिरौना- एट व भुआ स्टेशन के बीच 27 किलोमीटर रेल लाइन चालू हो चुकी है।
अभी झांसी-कानपुर सिंगल रेलवे ट्रैक पर प्रतिदिन 40 से अधिक अप और डाउन की सवारी ट्रेनों का संचालन होता है। इतनी ही संख्या में मालगाड़ियां भी दौड़ती हैं। एक ट्रेन को निकालने में सामने आ रही दूसरी ट्रेन को नजदीक के रेलवे स्टेशन पर रोकना पड़ता है। इसका सीधा असर ट्रेनों के समय पालन पर पड़ता है।
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