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एरच बांध : दो साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी जांच

Sun, 26 May 2019 01:09 AM IST
jhansi Published by: देवेंद्र कुमार Updated Sun, 26 May 2019 01:09 AM IST
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investigation incomplite after two year
dam - फोटो : demo
झांसी। एरच बांध का काम पिछले दो साल से वित्तीय जांच पूरा न होने से बंद चल रहा है। बांध का 50 फीसदी निर्माण 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले पूरा कर लिया गया था। निर्माण पूरा न होने से लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस बांध के बनने से जिले के पांच ब्लाकों के दर्जनों गांवों का पेयजल संकट दूर हो जाएगा। जांच पूरी हो तो आगे का काम शुरू हो सके। भाजपा नेता भी इसके निर्माण को लेकर शांत है।
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नावार्ड से वित्त पोषित पारीछा बांध से 40 किलोमीटर नीचे एरच क्षेत्र के जुझार गांव में बांध का निर्माण किया जा रहा है। 612 करोड़ की लागत से बनने वाले इस बांध में नावार्ड को 498 करोड़ रुपये देना है, बाकी का बजट प्रदेश सरकार देगी। साल 2016 में बांध निर्माण के लिए 367 करोड़ की तीन किस्तें जारी की जा चुकी हैं। बजट के लगातार मिलने से 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले बांध का 50 फीसदी काम पूरा कर लिया गया था। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने साल 2018 में बांध का निर्माण पूरा होने का लक्ष्य बनाया था। मगर, 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार के बनते ही बांध निर्माण में हो रही वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी गई। साथ ही रुड़की विश्वविद्यालय बांध की आवश्यकता पर भी जांच कर रहा है लेकिन दो साल बीतने के बाद भी यह जांचें पूरी नहीं हो सकी हैं। इससे बांध का निर्माण जस का तस पड़ा है।
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जल्द जांच पूरी हो, इसके लिए मैं लगातार प्रयास कर रहा हूं। पिछले दिनों ही मैंने लखनऊ में संबंधित अफसरों से मुलाकात की थी। उम्मीद है कि जल्द ही बांध का काम शुरू हो जाएगा। - जवाहर लाल राजपूत, विधायक।
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378 गांवों को मिल सकेगा पीने का पानी
मध्य प्रदेश के भोपाल से निकली बेतवा नदी का पानी यूपी में सबसे पहले ललितपुर में बने राजघाट बांध व माताटीला बांध पर रोका जाता है। इसके बाद झांसी जनपद में बने सुकुवां-ढुकुवां बांध व पारीछा बांध पर पानी का संग्रह होता है। इन चारों बांधों के भरने के बाद भी वर्षा ऋतु में 11 मिलियन घन मीटर पानी नदी में बेकार बह जाता है। इस पानी के सदुपयोग के लिए ही इस बांध का निर्माण किया जा रहा है।

नदी में बहने वाला यह पानी आगे उरई होते हुए हमीरपुर से निकली यमुना नदी में मिल जाता है। एरच बांध को बनाने का मुख्य उद्देश्य आसपास के पांच ब्लाकों (बामौर, गुरसरांय, बड़ागांव, चिरगांव व मोंठ) के 378 गांवों में पेयजल पहुंचाना है। अभी इन गांवों के लोग कुएं व हैंडपंप के पानी पर निर्भर हैं। गर्मियों के दिनों में जलस्तर गिरने पर इन गांवों में पेयजल संकट हो जाता है। इस बांध की कुल क्षमता 62 मिलियन घन मीटर (एमसीएम) होगी व इसकी उपयोग क्षमता 56 मिलियन घन मीटर होगी। बांध 19 मीटर ऊंचा व 1400 मीटर लंबाई में बनाया जाएगा, इसमें करीब बीस गेट होंगे। बांध का तीस एमसीएम पानी पेयजल व दस एमसीएम पानी से आसपास क्षेत्र की 1850 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। 16 एमसीएम पानी का उपयोग नहर के किनारे के खेतों में स्प्रिंकलर सिंचाई में प्रयोग होगा। बांध के बगल से कुछ पानी लगातार बहता रहेगा। इससे नदी सूख नहीं पाएगी और उसका अस्तित्व हमेशा बना रहेगा।
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