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जिला अस्पताल में इंजेक्शन खत्म, लकवे का इलाज ठप, मरीज परेशान
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झांसी। जिला अस्पताल में लकवे के इलाज के दौरान लगाया जाने वाला इंजेक्शन पिछले ढाई महीने से नहीं है। ऐसे में अस्पताल आने वाले ज्यादातर मरीज बिस्तर पकड़ने को मजबूर हैं। अस्पताल प्रशासन ने शासन से इंजेक्शन उपलब्ध कराने की मांग की है। इस इंजेक्शन को लकवा पड़ने के साढ़े चार घंटे के अंदर लगा दिया जाए तो मरीज ठीक हो जाता है।
ब्रेन स्ट्रोक हार्ट अटैक की तरह ही है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। व्यक्ति के मस्तिष्क के किसी हिस्से में खून का थक्का जमने पर रक्त प्रवाह कम हो जाता है। इससे सेल डैमेज होने लगती हैं और ब्रेन स्ट्रोक पड़ जाता है। ब्रेन स्ट्रोक की वजह से मस्तिष्क के किसी हिस्से पर होने वाले असर से शरीर का कोई हिस्सा प्रभावित हो सकता है। ब्रेन स्ट्रोक का सबसे गहरा असर शरीर में लकवा होने पर नजर आता है। इससे पीड़ित के चलने, बोलने की क्षमता में कमी आने के अलावा चेहरे के हिस्से में बदलाव हो सकता है। लकवे का शिकार मरीज बिस्तर पकड़ लेता है या उसकी मृत्यु भी हो सकती है। इसके लिए शासन की तरफ से 2017 में जिला अस्पताल को नि:शुल्क इंजेक्शन दिए थे। इस एक इंजेक्शन की कीमत 40 से 50 हजार रुपये है। पिछले चार सालों में जिला अस्पताल में लकवे के लगभग 250 मरीज इसी इंजेक्शन से ठीक भी किए जा चुके हैं। मगर पिछले ढाई महीने पहले सभी इंजेक्शन खत्म हो चुके हैं। बताया गया कि हर सप्ताह तीन से चार मरीज लकवे के अस्पताल आते हैं मगर उन्हें तुरंत ठीक नहीं किया जा पा रहा है।
ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण
- चलने में परेशानी
- संतुलन में कमी
- बोलने में दिक्कत
- सिर में बहुत दर्द होना
- शरीर के एक हिस्से में लकवा
- अस्पष्ट दृष्टि
इंजेक्शन की मांग भेजी जा चुकी है। जल्द ही इंजेक्शन मिलने की उम्मीद है। अभी अस्पताल आने वाले लकवा मरीजों को दवाओं के जरिए ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है। - डॉ. डीएस गुप्ता, फिजीशियन, जिला अस्पताल।
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ब्रेन स्ट्रोक हार्ट अटैक की तरह ही है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। व्यक्ति के मस्तिष्क के किसी हिस्से में खून का थक्का जमने पर रक्त प्रवाह कम हो जाता है। इससे सेल डैमेज होने लगती हैं और ब्रेन स्ट्रोक पड़ जाता है। ब्रेन स्ट्रोक की वजह से मस्तिष्क के किसी हिस्से पर होने वाले असर से शरीर का कोई हिस्सा प्रभावित हो सकता है। ब्रेन स्ट्रोक का सबसे गहरा असर शरीर में लकवा होने पर नजर आता है। इससे पीड़ित के चलने, बोलने की क्षमता में कमी आने के अलावा चेहरे के हिस्से में बदलाव हो सकता है। लकवे का शिकार मरीज बिस्तर पकड़ लेता है या उसकी मृत्यु भी हो सकती है। इसके लिए शासन की तरफ से 2017 में जिला अस्पताल को नि:शुल्क इंजेक्शन दिए थे। इस एक इंजेक्शन की कीमत 40 से 50 हजार रुपये है। पिछले चार सालों में जिला अस्पताल में लकवे के लगभग 250 मरीज इसी इंजेक्शन से ठीक भी किए जा चुके हैं। मगर पिछले ढाई महीने पहले सभी इंजेक्शन खत्म हो चुके हैं। बताया गया कि हर सप्ताह तीन से चार मरीज लकवे के अस्पताल आते हैं मगर उन्हें तुरंत ठीक नहीं किया जा पा रहा है।
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ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण
- चलने में परेशानी
- संतुलन में कमी
- बोलने में दिक्कत
- सिर में बहुत दर्द होना
- शरीर के एक हिस्से में लकवा
- अस्पष्ट दृष्टि
इंजेक्शन की मांग भेजी जा चुकी है। जल्द ही इंजेक्शन मिलने की उम्मीद है। अभी अस्पताल आने वाले लकवा मरीजों को दवाओं के जरिए ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है। - डॉ. डीएस गुप्ता, फिजीशियन, जिला अस्पताल।
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