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बच्चों में बढ़ा निमोनिया का खतरा
ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jan 2016 01:08 AM IST
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झांसी। गलन भरी सर्दी की शुरूआत होने के बाद नवजात और पांच वर्ष तक के बच्चों को निमोनिया खतरा बढ़ गया है। जरा सी चूक होने पर बच्चों के फेंफड़ों में सूजन, बुखार, सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकती है।
बीते एक सप्ताह से तापमान में तेजी से गिरावट आने से सर्दी का प्रकोप बढ़ गया है। यह मौसम नवजात और छोटे बच्चों के लिए बहुत खतरनाक होता है। इस मौसम में ठंड से छोटे बच्चों में निमोनिया होने का खतरा बना रहता है, खासकर नवजात शिशुओं को। इस मौसम में परिजनों को बच्चों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है।
जिला संक्रामक रोग अधिकारी डॉ. एनके जैन ने बताया कि निमोनिया की चपेट में आने से बच्चों को बुखार आ जाता है। वहीं, फेंफड़ों में सूजन आने के साथ-साथ बच्चों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। समय से इलाज न मिल पाने से बच्चे की मौत तक हो सकती है। बच्चे को जरा सी भी तकलीफ होने पर तुरंत उसका चिकित्सीय परीक्षण कराना चाहिए। निमोनिया से पीड़ित नवजात बच्चों का मेडिकल कॉलेज में बने नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में इलाज की पूरी सुविधा है।
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यह हैं निमोनिया के संकेत
-बच्चे को तेज बुखार आना
-दूध पीना बंद कर देना
-शरीर नीला पड़ जाना
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बीते एक सप्ताह से तापमान में तेजी से गिरावट आने से सर्दी का प्रकोप बढ़ गया है। यह मौसम नवजात और छोटे बच्चों के लिए बहुत खतरनाक होता है। इस मौसम में ठंड से छोटे बच्चों में निमोनिया होने का खतरा बना रहता है, खासकर नवजात शिशुओं को। इस मौसम में परिजनों को बच्चों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है।
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जिला संक्रामक रोग अधिकारी डॉ. एनके जैन ने बताया कि निमोनिया की चपेट में आने से बच्चों को बुखार आ जाता है। वहीं, फेंफड़ों में सूजन आने के साथ-साथ बच्चों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। समय से इलाज न मिल पाने से बच्चे की मौत तक हो सकती है। बच्चे को जरा सी भी तकलीफ होने पर तुरंत उसका चिकित्सीय परीक्षण कराना चाहिए। निमोनिया से पीड़ित नवजात बच्चों का मेडिकल कॉलेज में बने नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में इलाज की पूरी सुविधा है।
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यह हैं निमोनिया के संकेत
-बच्चे को तेज बुखार आना
-दूध पीना बंद कर देना
-शरीर नीला पड़ जाना