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दवा खाने के बाद भी बढ़े टीबी रोगी

Tue, 26 Mar 2019 01:13 AM IST
jhansi Published by: देवेंद्र कुमार Updated Tue, 26 Mar 2019 01:13 AM IST
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increase tb pataint in lalitpur
workshop in lalitpur - फोटो : amarujala
ललितपुर। विश्व क्षय रोग दिवस पर हर साल टीबी के उपचार के लिए विचार गोष्ठियां आयोजित की जाती हैं, लेकिन नतीजा ठीक इसके उलट है। स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में क्षय रोगियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े कर रहे है। हाल ही में दो माह में 362 मरीज चिह्नित किए गए, जबकि साल 2017-18 में क्रमश: 1411 और 1836 मरीज चिह्नित किए गए थे। ऐसे में जिम्मेदार अफसरों पर सवाल खडे़ होना लाजिमी है।
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 शासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्षय रोगी चिह्नित करने के लिए अभियान चलाया जाता है। यह अभियान वर्ष में तीन-तीन माह के अंतराल पर चलाया जा रहा है। विभागीय कर्मचारियों की टीमें बनाई जातीं हैं, जो घर-घर जाकर क्षय रोगी चिह्नित करती हैं। लक्षण पाए जाने पर लोगों का परीक्षण कराते हैं। परीक्षण में पुष्टि होने पर रोगी का पंजीयन कराकर उपचार की सुविधा मुहैया कराई जाती है। लेकिन, पिछले वर्षों के क्षय रोगियों की संख्या के आंकड़े जानने पर विभागीय अभियानों की हकीकत सामने आई। सुविधाएं देने के बाद भी मरीजों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में 1411 मरीज और 2018 में 1836 मरीज चिह्नित किए गए है। वर्तमान के दो महीनों में 362 मरीज चिह्नित किए गए हैं। यानी, या तो मरीजों को सही उपचार नहीं मिल रहा है या फिर विभाग के अफसर इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। बहरहाल, जो भी हो लेकिन विभागीय कार्यप्रणाली पर सवालों के घेरे में है।
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विभागीय अधिकारी  डॉ. जेएस बक्शी का कहना है कि जागरूकता की कमी के कारण मरीजों की संख्या बढ़ रही है। रोगी स्वास्थ्य होने पर परहेज नहीं करता और दवा का सेवन न करने से फिर से बीमारी से ग्रसित हो जाता है। वहीं, कुछ मरीज अधिक गंभीर स्थिति में उपचार कराने के लिए आते हैं, तब तक वह बीमारी दूसरे लोगों में फैल जाती है।  
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नियमित दवा न लेने से फिर से हो रहे बीमार
क्षय रोग की बीमारी से निजात दिलानें के लिए पूरा कोर्स दिया जाता है। ऐसे में कई मरीज बीमारी से थोड़े भी स्वास्थ्य होने पर दवाइयों का सेवन करना छोड़ देते हैं। यदि एक माह तक लगातार दवा न ली जाए तो मरीज फिर से बीमारी से पूरी तरह से ग्रसित हो जाता है। ऐसे मरीज का उपचार फिर से शुरू किया जाता है।

मरीजों को मिलते पांच सौ रुपये प्रतिमाह
पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा संचालित की जा रही पोषण योजना के अंतर्गत क्षयरोगियों को एक अप्रैल 2018 से इलाज के दौरान पोषण सहायता के रुप में पांच सौ रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है। इसके अलावा डॉट्स प्रोवाइडरों के कैटेगरी प्रथम, द्वितीय एवं एमडीआर के मानदेय क्रमश: 1000, 1500 एवं 5000 रुपवये की राशि प्रदान की जाती है।


देश में सर्वाधिक हैं टीबी के रोगी
विश्व क्षयरोग दिवस के अवसर पर अचल प्रशिक्षण केंद्र मसौरा में गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें लोगों को क्षयरोग के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जेएस बक्शी ने बताया कि देश में प्रतिवर्ष 18 लाख लोग टीबी की बीमारी से ग्रसित होते हैं। इनमें से चार लाख लोगों की प्रतिवर्ष मृत्यु हो जाती है। अधिक प्रभावित देशों में भारत का प्रथम स्थान है। उन्होंने कहा कि 1962 से 1992 तक राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम चला। इसके बाद 1993 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 23.5 लाख जनसंख्या पर डॉट्स प्रणाली अपनाकर प्रभाव देखा गया, जो बहुत सफल रहा और 1997 तक देश में डॉट्स पद्धति को लागू कर दिया गया। यह भी बताया कि संदिग्ध रोगी के 02 बलगम परीक्षण कर रोग के बारे में पता लगाया जाता है। इसके उपरांत रोगी को डॉट्स केंद्र पर प्रशिक्षित कार्यकर्ता की देखरेख में दवा खिलाई जाती है। वर्तमान में जिले में 07 टीबी यूनिट, 11 बलगम परीक्षण केंद्र तथा 344 डॉट्स केंद्र कार्यरत  हैं। जहां रोगी का बलगम परीक्षण व निशुल्क दवा खिलाई जाती है। डॉट्स में रोगी के पंजीकरण के साथ ही उसकी दवाई के पूरे उपचार का औषधि बॉक्स सुरक्षित कर दिया जाता है। अन्य बीमारियों की अपेक्षा टीबी से मरने वालों की संख्या वयस्कों में सबसे ज्यादा होती है। टीबी रोग की जांच, उपचार और जांचों इत्यादि के बारे में टीबी से संबंधित भ्रांतियों के बारे में जानकारी दी जाती है।
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