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झांसी में 19 साल में सिर्फ तीन बार झूम के बरसे बदरा

Wed, 21 Jul 2021 01:36 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jul 2021 01:36 AM IST
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In Jhansi, it rained only three times in 19 years.
झांसी। कम बरसात का संकट आज से नहीं बल्कि पिछले 19 साल में यहां ऐसे ही हालात हैं। झांसी में अब तक सिर्फ तीन बार ऐसे मौके आए जब औसत से अधिक बरसात हुई। इसमें भी आठ साल पहले जो बरसात हुई थी, उतनी बीते 19 सालों में कभी नहीं हुई। अब तक जुलाई के बीस दिन निकल गए और इस बार भी मेघ कंजूसी बरत रहे हैं।
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झांसी और आसपास के जिलों में साल दर साल सूखे की स्थिति बन रही है। जिले में साल भर में औसत वर्षा 870.10 मिली मीटर होती है। पिछले 19 साल में हुई बरसात के आंकड़ों पर गौर करें तो सिर्फ तीन साल ऐसे रहे कि औसत से अधिक बरसात हुई। यानी बाकी सालों में यहां के लोगों ने पानी की कमी का संकट झेला है। बरसात न होने से फसलें सूख गईं। किसानों ने भारी नुकसान झेला है। जानकार इसे जलवायु परिवर्तन मान रहे हैं। मानव प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहा है। अंधाधुंध पेड़ों का कटान हो रहा है, जनसंख्या बढ़ रही है और वाहनों की संख्या भी बढ़ रही है। इन सब कारणों से हानिकारक गैसें पर्यावरण में बढ़ रही हैं। इसी कारण अनियमित बरसात हो रही है।
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इन 19 सालों में आठ साल पहले 2013-14 में साल भर में 1300.80 मिली मीटर बरसात हुई थी। जून में 178.28 मिली मीटर, जुलाई में 328.78 मिली मीटर और अगस्त में 482.30 मिली मीटर बरसात हुई थी, जो अभी तक रिकार्ड है। इसके अलावा 2011-12 में 909.30 मिली मीटर और 2003-04 में 1161.10 मिली मीटर बरसात हुई थी। अबकी बार जुलाई के बीस दिन बीत जाने के बाद भी अच्छी बरसात नहीं हुई है। इस कारण हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
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वर्ष बरसात (मिलीमीटर)
2002-03 663.14
2004-05 553.28
2005-06 536.30
2006-07 336.09
2007-08 342.74
2008-09 858.34
2009-10 539.06
2010-11 558.51
2012-13 774.82
2014 से लेकर 2020 तक औसत से बहुत कम पानी बरसा
बरसात में कमी का प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन है। बढ़ती जनसंख्या, अंधाधुंध वनों की कटाई और वाहनों की लगातार हो रही बढ़ोतरी से प्रदूषण दिनोंदिन बढ़ रहा है। इन सबके कारण अनियमित वर्षा हो रही है। यही कारण है कि कहीं पर 24 घंटे में अधिक बरसात हो जा रही है तो कहीं पर बारिश ही नहीं हो रही है। हम सबका दायित्व है कि इस गंभीर समस्या पर ध्यान दें और प्रकृति के अनुरूप कार्य करें। अन्यथा यह स्थिति सूखा की ओर ले जा रही है। - डॉ. मुकेश चंद, मौसम वैज्ञानिक
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