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अभावों को हराकर घर में खुशियां लाई ‘हैप्पी’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jun 2017 01:18 AM IST
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heppy, jhansi news
- फोटो : demo
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आर्थिक विसंगतियों से जूझते परिवार की बेटी हैप्पी सविता ने तमाम समस्याओं और परेशानियों को पछाड़ते हुए यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में जिला टॉप किया है। गुरुकुल इंटर कॉलेज की छात्रा करगुवां निवासी हैप्पी ने 91 प्रतिशत अंक हासिल किए। उसके पिता रामप्रकाश ट्रक ड्राइवर हैं और मां मंजू एक निजी स्कूल में रसोइया हैं। हैप्पी का लक्ष्य आईपीएस अफसर बनना है।
हैप्पी ने बताया कि उसके पापा अभी घर पर नहीं हैं। वह ट्रक चलाने गए हैं। उन्हें टॉप करने की जानकारी दे दी गई है। पापा बहुत खुश हैं। वह चाहते हैं कि मैं आईपीएस अफसर बनूं। उनकी इच्छा को पूरा करना ही मेरा लक्ष्य है। पापा ज्यादातर घर से बाहर रहते हैं। लेकिन, उनका ध्यान मुझ पर रहता है। वह समय-समय पर फोन करके मेरी पढ़ाई की जानकारी लेते रहते हैं। पापा किताबों को रटने की जगह उन्हें समझने की प्रेरणा देते हैं।
घर खर्च चलाने में सहयोग करने के लिए मां भी एक निजी स्कूल में रसोइया का काम करती हैं। वह मुझे पढ़ा तो नहीं पातीं, लेकिन जब भी मैं पढ़ती हूं, वह मेरे साथ ही बैठी रहती हैं। झपकी आने पर चाय बनाकर देतीं। पैसों की कमी के कारण बहुत सी चीजें नहीं मिल पाती हैं। लेकिन, मां उसके लिए दुखी नहीं होने देती। वह प्रेरणा देती हैं कि इन्हीं कमियों को हराकर शिक्षा से अपना भाग्य बदलना है।
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पैसों की कमी है, इसलिए घर से स्कूल पैदल जाना पड़ता है। कई चीजों की कमी से जूझना पड़ता है, लेकिन माता-पिता का प्रोत्साहन इन कमियों को हरा देता है। अपने भाई हर्ष के साथ खुशी मना रही हैप्पी ने बताया कि इंटरमीडिएट में बेहतर प्रतिशत लाने पर पापा ने एंड्रायड मोबाइल देने का वादा किया है।
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आर्थिक विसंगतियों से जूझते परिवार की बेटी हैप्पी सविता ने तमाम समस्याओं और परेशानियों को पछाड़ते हुए यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में जिला टॉप किया है। गुरुकुल इंटर कॉलेज की छात्रा करगुवां निवासी हैप्पी ने 91 प्रतिशत अंक हासिल किए। उसके पिता रामप्रकाश ट्रक ड्राइवर हैं और मां मंजू एक निजी स्कूल में रसोइया हैं। हैप्पी का लक्ष्य आईपीएस अफसर बनना है।
हैप्पी ने बताया कि उसके पापा अभी घर पर नहीं हैं। वह ट्रक चलाने गए हैं। उन्हें टॉप करने की जानकारी दे दी गई है। पापा बहुत खुश हैं। वह चाहते हैं कि मैं आईपीएस अफसर बनूं। उनकी इच्छा को पूरा करना ही मेरा लक्ष्य है। पापा ज्यादातर घर से बाहर रहते हैं। लेकिन, उनका ध्यान मुझ पर रहता है। वह समय-समय पर फोन करके मेरी पढ़ाई की जानकारी लेते रहते हैं। पापा किताबों को रटने की जगह उन्हें समझने की प्रेरणा देते हैं।
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घर खर्च चलाने में सहयोग करने के लिए मां भी एक निजी स्कूल में रसोइया का काम करती हैं। वह मुझे पढ़ा तो नहीं पातीं, लेकिन जब भी मैं पढ़ती हूं, वह मेरे साथ ही बैठी रहती हैं। झपकी आने पर चाय बनाकर देतीं। पैसों की कमी के कारण बहुत सी चीजें नहीं मिल पाती हैं। लेकिन, मां उसके लिए दुखी नहीं होने देती। वह प्रेरणा देती हैं कि इन्हीं कमियों को हराकर शिक्षा से अपना भाग्य बदलना है।
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पैसों की कमी है, इसलिए घर से स्कूल पैदल जाना पड़ता है। कई चीजों की कमी से जूझना पड़ता है, लेकिन माता-पिता का प्रोत्साहन इन कमियों को हरा देता है। अपने भाई हर्ष के साथ खुशी मना रही हैप्पी ने बताया कि इंटरमीडिएट में बेहतर प्रतिशत लाने पर पापा ने एंड्रायड मोबाइल देने का वादा किया है।