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90 साल की दादी हुईं जिंदा: कंपाउडर ने बताया मृत, ढाईं घंटे तक मची रही चीख-पुकार; गंगाजल डालते ही चलने लगी सांस

Sun, 06 Jul 2025 04:10 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी Published by: श्याम जी. Updated Sun, 06 Jul 2025 04:10 PM IST
सार

झांसी में करीब ढाई घंटे बाद बुजुर्ग दादी की सांस वापस लौट आई। पड़ोस में रहने वाले कंपाउंडर को बुलाकर उनकी नब्ज दिखाई गई। उसने भी मृत बता दिया।

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grandmother who was considered dead returned to breath after two and a half hours in Jhansi
दादी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI

विस्तार

सीपरी बाजार के भोजला इलाके में परिजनों के मृत मान लेने के करीब ढाई घंटे बाद बुजुर्ग दादी की सांस वापस लौट आई। इसकी पूरे मोहल्ले में चर्चा हो रही है। बुजुर्ग दादी को जीवित देख परिजनों में हर्ष की लहर दौड़ गई। उन्होंने पास के मंदिर में जाकर प्रसाद भी चढ़ाया।

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भोजला निवासी माया देवी (90) अपने तीन बेटों समेत भरे पूरे परिवार के साथ रहती हैं। परिजनों का कहना है कि शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे उनकी सांस चलनी बंद हो गई। परिवार के लोगों ने काफी देर तक उन्हें हिलाया-डुलाया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। पड़ोस में रहने वाले कंपाउंडर को बुलाकर उनकी नब्ज दिखाई गई। उसने भी मृत बता दिया।

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ढाई घंटे तक घर में रोना पिटना मचा रहा
परिवार वाले रोने लगे। मोहल्ले के लोग घर में जमा हो गए। परिजनों ने उनको मृत मानकर विस्तर से नीचे उतारकर जमीन पर लेटा दिया। उनके पास बैठकर महिलाएं रोने-बिलखने लगीं। सिर के पास अगरबत्ती एवं धूप भी जला दिया गया। उनका भतीजे एवं मैक्स लाइफ कंपनी में गार्ड संतोष वर्मा का कहना है कि करीब ढाई घंटे तक घर में रोना-पिटना मचा रहा।

गंगाजल शरीर पर छिड़कते ही लौटी सांस
उनके शरीर में कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी। डेढ़ बजे दोपह उनके छोटे बेटे राम किशन ने जैसे ही गंगाजल शरीर पर छिड़का, उनकी सांस लौट आई। कुछ देर वाद हो वह होश में आ गईं। हालांकि माया देवी का कहना है कि वह इतनी देर तक सोती रही, इसका उनको पता नहीं। मोहल्ले के लोगों में भी यह बात फैल गई।

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कभी-कभी मरीज न्यूरोमैटिक शॉक में चला जाता है। इसमें आदमी बिल्कुल मृत प्राय हो जाता है, लेकिन हार्ट धीमे-धीमे धड़कता रहता है। अचानक से कोई क्रिया-प्रतिक्रिया होने पर न्यूरोमैटिक शॉक टूट जाता है। उसके बाद उसे होश आ जाता है। - डॉ. जकी सिद्दिकी, वरिष्ठ फिजिशयन महारानी लक्ष्मीवाई मेडिकल कॉलेज 

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