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राजकीय संप्रेक्षण गृह पर लगा ताला
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राजकीय किशोरी संप्रेक्षण गृह पर लगा ताला
झांसी। चार साल पहले शुरू हुए राजकीय किशोरी संप्रेक्षण गृह पर ताला जड़ दिया गया है। इसकी उपयोगिता साबित न हो पाने की वजह से ये कदम उठाया गया है। अब आपराधिक मामलों में लिप्त बालिकाओं को कानपुर स्थित संप्रेक्षण गृह भेजा जाएगा।
आपराधिक मामलों में लिप्त पाई जाने वालीं 10 से 18 वर्ष तक की बालिकाओं को कारागार की बजाय संप्रेक्षण गृह भेजे जाने का प्रावधान है। किशोर न्याय बोर्ड द्वारा बालिकाओं को संप्रेक्षण गृह भेजे जाने का आदेश दिया जाता है। झांसी में संप्रेक्षण गृह की स्थापना 15 सितंबर 2015 को हुई थी। ये मेडिकल कॉलेज के पास आवास विकास कॉलोनी में एक किराये के भवन में शुरू किया गया था। शुरुआत में इसका किराया तीस हजार रुपये प्रतिमाह था, जो बढ़कर तैंतीस हजार रुपये प्रतिमाह पर पहुंच गया था। संप्रेक्षण गृह आवासीय संसाधन विकसित किए गए थे तथा तीन कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। इनमें एक नर्सरी शिक्षक /प्रभारी सहायक अधीक्षक, केयर टेकर (पुरुष) व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को तैनात किया गया था। लेकिन, शुरुआत से लेकर अब तक संप्रेक्षण गृह में किशोर न्याय बोर्ड की ओर से एक भी बालिका को नहीं भेजा गया। चार साल के दरम्यान इसकी कोई उपयोगिता साबित नहीं हो पाई। ऐसे में इसे अब बंद कर दिया गया है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी नंदलाल सिंह ने बताया कि राजकीय किशोरी संप्रेक्षण गृह के भवन के किराये व कर्मचारियों के वेतन पर अच्छी खासी रकम खर्च हो रही थी। जबकि, संचालन अवधि के दौरान इसकी उपयोगिता इसकी शून्य रही। इन परिस्थितियों में इसे बंद कर दिया गया है। किशोर न्याय बोर्ड द्वारा भेजी जाने वाली अपराध में लिप्त बालिकाओं को कानपुर स्थित संप्रेक्षण गृह में भेजा जाएगा।
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झांसी। चार साल पहले शुरू हुए राजकीय किशोरी संप्रेक्षण गृह पर ताला जड़ दिया गया है। इसकी उपयोगिता साबित न हो पाने की वजह से ये कदम उठाया गया है। अब आपराधिक मामलों में लिप्त बालिकाओं को कानपुर स्थित संप्रेक्षण गृह भेजा जाएगा।
आपराधिक मामलों में लिप्त पाई जाने वालीं 10 से 18 वर्ष तक की बालिकाओं को कारागार की बजाय संप्रेक्षण गृह भेजे जाने का प्रावधान है। किशोर न्याय बोर्ड द्वारा बालिकाओं को संप्रेक्षण गृह भेजे जाने का आदेश दिया जाता है। झांसी में संप्रेक्षण गृह की स्थापना 15 सितंबर 2015 को हुई थी। ये मेडिकल कॉलेज के पास आवास विकास कॉलोनी में एक किराये के भवन में शुरू किया गया था। शुरुआत में इसका किराया तीस हजार रुपये प्रतिमाह था, जो बढ़कर तैंतीस हजार रुपये प्रतिमाह पर पहुंच गया था। संप्रेक्षण गृह आवासीय संसाधन विकसित किए गए थे तथा तीन कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। इनमें एक नर्सरी शिक्षक /प्रभारी सहायक अधीक्षक, केयर टेकर (पुरुष) व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को तैनात किया गया था। लेकिन, शुरुआत से लेकर अब तक संप्रेक्षण गृह में किशोर न्याय बोर्ड की ओर से एक भी बालिका को नहीं भेजा गया। चार साल के दरम्यान इसकी कोई उपयोगिता साबित नहीं हो पाई। ऐसे में इसे अब बंद कर दिया गया है।
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जिला प्रोबेशन अधिकारी नंदलाल सिंह ने बताया कि राजकीय किशोरी संप्रेक्षण गृह के भवन के किराये व कर्मचारियों के वेतन पर अच्छी खासी रकम खर्च हो रही थी। जबकि, संचालन अवधि के दौरान इसकी उपयोगिता इसकी शून्य रही। इन परिस्थितियों में इसे बंद कर दिया गया है। किशोर न्याय बोर्ड द्वारा भेजी जाने वाली अपराध में लिप्त बालिकाओं को कानपुर स्थित संप्रेक्षण गृह में भेजा जाएगा।
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