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मौलिक अधिकारों की बताई अहमियत
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मौलिक अधिकारों की बताई अहमियत
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के शिक्षा संस्थान और बाबू जगजीवन राम विधि संस्थान तरफ से विशेष व्याख्यान का आयोजन गांधी सभागार में हुआ। इस मौके पर लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व विधि संकायाध्यक्ष और विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार अवस्थी ने ‘मौलिक अधिकारों के क्षेत्र में नवीनतम परिवर्तन’ विषय पर अपना व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकार भारत के नागरिकों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं, जिनके माध्यम से राज्य देश के लोगों के लिये कल्याणकारी योजनाएं तथा कार्यक्रम चलाता है तथा अपने नागरिकों के हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध होता है। उन्होंने गोरखनाथ केस, नाज फाउंडेशन आदि से जुड़े अनेक मामलों की विस्तारपूर्वक चर्चा की और संपत्ति के अधिकार, शिक्षा के अधिकार, निजता के अधिकार, जीवन के अधिकार, समानता के अधिकार, धार्मिक आजादी के अधिकार आदि पर विभिन्न कोणों से प्रकाश डाला। उन्होंने अयोध्या मामले, सबरीमाला मंदिर, शाहबानो, तीन तलाक, धारा 377, मुंबई बार डांसर आदि की चर्चा करते हुए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्णय देने की प्रक्रिया में आये परिवर्तनों पर प्रकाश डाला।
अध्यक्षीय भाषण में कुलपति प्रो. वैशम्पायन ने कर्तव्य और अधिकारों के बीच सीमा निर्धारित करने की आवश्यकता बताई। समारोह में स्वागत भाषण शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. पुनीत बिसारिया ने दिया। इस अवसर पर अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. देवेश निगम, खाद्य संस्थान के अध्यक्ष डॉ. डीके भट्ट, डॉ. काव्या दुबे, सरोज कुमार, डॉ. सुनील त्रिवेदी, डॉ. प्रशांत मिश्र मौजूद रहे। संचालन डॉ. सुनील कुमार त्रिवेदी ने किया।
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के शिक्षा संस्थान और बाबू जगजीवन राम विधि संस्थान तरफ से विशेष व्याख्यान का आयोजन गांधी सभागार में हुआ। इस मौके पर लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व विधि संकायाध्यक्ष और विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार अवस्थी ने ‘मौलिक अधिकारों के क्षेत्र में नवीनतम परिवर्तन’ विषय पर अपना व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकार भारत के नागरिकों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं, जिनके माध्यम से राज्य देश के लोगों के लिये कल्याणकारी योजनाएं तथा कार्यक्रम चलाता है तथा अपने नागरिकों के हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध होता है। उन्होंने गोरखनाथ केस, नाज फाउंडेशन आदि से जुड़े अनेक मामलों की विस्तारपूर्वक चर्चा की और संपत्ति के अधिकार, शिक्षा के अधिकार, निजता के अधिकार, जीवन के अधिकार, समानता के अधिकार, धार्मिक आजादी के अधिकार आदि पर विभिन्न कोणों से प्रकाश डाला। उन्होंने अयोध्या मामले, सबरीमाला मंदिर, शाहबानो, तीन तलाक, धारा 377, मुंबई बार डांसर आदि की चर्चा करते हुए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्णय देने की प्रक्रिया में आये परिवर्तनों पर प्रकाश डाला।
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अध्यक्षीय भाषण में कुलपति प्रो. वैशम्पायन ने कर्तव्य और अधिकारों के बीच सीमा निर्धारित करने की आवश्यकता बताई। समारोह में स्वागत भाषण शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. पुनीत बिसारिया ने दिया। इस अवसर पर अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. देवेश निगम, खाद्य संस्थान के अध्यक्ष डॉ. डीके भट्ट, डॉ. काव्या दुबे, सरोज कुमार, डॉ. सुनील त्रिवेदी, डॉ. प्रशांत मिश्र मौजूद रहे। संचालन डॉ. सुनील कुमार त्रिवेदी ने किया।
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