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एड्स की रोकथाम पर जोर, कर्मचारियों से मुंह फेरा
ब्यूरो
Updated Tue, 01 Dec 2015 12:27 AM IST
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झांसी। लाइलाज बीमारी एड्स से देश को दो दशकों में छुटकारा दिलाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इस कार्यक्रम से जुड़े देश-प्रदेश के हजारों कर्मचारी अपनी समस्याओं में उलझे हुए हैं। अब कर्मचारियों की समिति ने राष्ट्रपति से गुहार लगाई है।
एड्स नियंत्रण कार्यक्रम विगत 24 साल से बीमारी की गंभीरता को देखते हुए पूरे भारत में लगातार चलाया जा रहा है। कार्यक्रम को चलाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) की स्थापना की गई एवं राज्य स्तर पर राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी भी बनाई गई।
एक तरफ जहां बीमारी के नियंत्रण में सफलता प्राप्त हो रही है। वहीं, दूसरी तरफ कार्यक्रम में कार्यरत करीब 25 हजार संविदा कर्मियों का भविष्य खतरे में है। 2013 में ग्लोबल फंडिंग कम होने के कारण तथा बीमारी की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार द्वारा एड्स नियंत्रण विभाग की स्थापना की गई थी, जिससे बीमारी के नियंत्रण के साथ-साथ देश भर में कार्य कर रहे इस कार्यक्रम के कर्मचारियों के भविष्य का निर्धारण भी सुनिश्चित हुआ था।
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मौजूदा समय में विभाग को समाप्त कर देने से एवं नाको को पुन: बनाए जाने से इस कार्यक्रम पर वित्तीय संकट आ गया है, जिससे कर्मचारियों के भविष्य निर्धारण तो दूर उनको समय से मानदेय भी नहीं मिल रहा है। इसको लेकर एड्स नियंत्रण कर्मचारी कल्याण समिति ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर समस्या के समाधान की मांग की है।
पत्र में एड्स नियंत्रण कार्यक्रम में कार्यरत कर्मियों के भविष्य के लिए नीति निर्धारण करने, लंबे समय तक कार्यक्रम संचालित करने पर अनुबंध की अवधि बढ़ाने, महंगाई के मद्देनजर सातवें वेतन आयोग के अनुसार नियमित कर्मियों के वेतन में 25 फीसदी की बढ़ोतरी, केंद्र व राज्य सरकार में कार्यरत अन्य कर्मियों की भांति महंगाई भत्ता देने आदि मांगें शामिल हैं।
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एड्स नियंत्रण कार्यक्रम विगत 24 साल से बीमारी की गंभीरता को देखते हुए पूरे भारत में लगातार चलाया जा रहा है। कार्यक्रम को चलाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) की स्थापना की गई एवं राज्य स्तर पर राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी भी बनाई गई।
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एक तरफ जहां बीमारी के नियंत्रण में सफलता प्राप्त हो रही है। वहीं, दूसरी तरफ कार्यक्रम में कार्यरत करीब 25 हजार संविदा कर्मियों का भविष्य खतरे में है। 2013 में ग्लोबल फंडिंग कम होने के कारण तथा बीमारी की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार द्वारा एड्स नियंत्रण विभाग की स्थापना की गई थी, जिससे बीमारी के नियंत्रण के साथ-साथ देश भर में कार्य कर रहे इस कार्यक्रम के कर्मचारियों के भविष्य का निर्धारण भी सुनिश्चित हुआ था।
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मौजूदा समय में विभाग को समाप्त कर देने से एवं नाको को पुन: बनाए जाने से इस कार्यक्रम पर वित्तीय संकट आ गया है, जिससे कर्मचारियों के भविष्य निर्धारण तो दूर उनको समय से मानदेय भी नहीं मिल रहा है। इसको लेकर एड्स नियंत्रण कर्मचारी कल्याण समिति ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर समस्या के समाधान की मांग की है।
पत्र में एड्स नियंत्रण कार्यक्रम में कार्यरत कर्मियों के भविष्य के लिए नीति निर्धारण करने, लंबे समय तक कार्यक्रम संचालित करने पर अनुबंध की अवधि बढ़ाने, महंगाई के मद्देनजर सातवें वेतन आयोग के अनुसार नियमित कर्मियों के वेतन में 25 फीसदी की बढ़ोतरी, केंद्र व राज्य सरकार में कार्यरत अन्य कर्मियों की भांति महंगाई भत्ता देने आदि मांगें शामिल हैं।