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गैर इरादतन हत्या में आठ साल की जेल, 45 हजार जुर्माना
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झांसी। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार वर्मा-प्रथम की अदालत ने गैर इरादतन हत्या के मामले में आरोपी को आठ साल के जेल की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 45 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। सजा का प्रमुख आधार परिस्थितिजन्य साक्ष्य और चिकित्सकों के बयान बने। इस मामले में दो लोगों की मौत हुई थी।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) देवेंद्र पांचाल ने बताया कि चिरगांव थाने में सुशील कुमार राजपूत ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि 12 जुलाई 2014 को उसके पास सुबह रिश्तेदार परशुराम (बबलू) की पत्नी रानी देवी को फोन आया था, जिसमें उसने बताया था कि 11 जुलाई को घर पर दूर का रिश्तेदार चिरगांव थाने के ग्राम करगुवां निवासी बलवान सिंह राजपूत आया था और शाम को परिवार के साथ मिलकर खाना खाया था। उसने नींबू पानी में कुछ जहरीला पदार्थ मिलाकर फूफा भगवत प्रसाद, बुआ त्रिवेणी देवी, उनके लड़के शंकर लाल व बहू मालती देवी को पिला दिया। जिससे उनकी हालत बिगड़ गई। चिरगांव अस्पताल में परीक्षण के बाद उन्हें महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था। यहां भगवत प्रसाद और त्रिवेणी देवी की मौत हो गई थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था।
न्यायालय ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद आरोपी बलवान सिंह को गैर इरादतन हत्या के मामले में आठ साल जेल की सजा सुनाई। साथ ही 45 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में बिसरा में जहर नहीं पाया गया था। किंतु, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और इलाज कर रहे चिकित्सकों के साक्ष्य को विश्वसनीय मानते हुए अदालत ने दोष सिद्ध किया।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) देवेंद्र पांचाल ने बताया कि चिरगांव थाने में सुशील कुमार राजपूत ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि 12 जुलाई 2014 को उसके पास सुबह रिश्तेदार परशुराम (बबलू) की पत्नी रानी देवी को फोन आया था, जिसमें उसने बताया था कि 11 जुलाई को घर पर दूर का रिश्तेदार चिरगांव थाने के ग्राम करगुवां निवासी बलवान सिंह राजपूत आया था और शाम को परिवार के साथ मिलकर खाना खाया था। उसने नींबू पानी में कुछ जहरीला पदार्थ मिलाकर फूफा भगवत प्रसाद, बुआ त्रिवेणी देवी, उनके लड़के शंकर लाल व बहू मालती देवी को पिला दिया। जिससे उनकी हालत बिगड़ गई। चिरगांव अस्पताल में परीक्षण के बाद उन्हें महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था। यहां भगवत प्रसाद और त्रिवेणी देवी की मौत हो गई थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था।
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न्यायालय ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद आरोपी बलवान सिंह को गैर इरादतन हत्या के मामले में आठ साल जेल की सजा सुनाई। साथ ही 45 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में बिसरा में जहर नहीं पाया गया था। किंतु, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और इलाज कर रहे चिकित्सकों के साक्ष्य को विश्वसनीय मानते हुए अदालत ने दोष सिद्ध किया।
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