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शहरवासियों की सेहत से खिलवाड़, दूषित पानी की हो रही आपूर्ति
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तालपुरा की पानी की टंकी।
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झांसी। देश में कोरोना वायरस की वजह से हाहाकार मचा हुआ है। बचाव और साफ-सफाई के लिए देश भर में तमाम इंतजाम किए जा रहे हैं। इधर, झांसी का जलसंस्थान लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने में लगा है। लोगों को दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही है। विभाग ने पिछले तीन साल से 13 पानी की टंकियों और भूतल जलाशयों की सफाई नहीं कराई है।
महानगर की आबादी लगभग 5.90 लाख है। इनमें चार लाख से अधिक लोगों को महानगर के अलग- अलग स्थानों पर बनीं 13 पानी की टंकियों से पानी उपलब्ध कराया जाता है। टंकियों को भरने के लिए पास ही भूतल जलाशय बनाए गए हैं। हर साल टंकी और सीडब्लूआर (भूतल जलाशय) की सफाई होना चाहिए, मगर पिछले तीन साल से यह काम भी नहीं हो रहा है। दूषित पेयजल की वजह से झांसी में लोगों में संक्रामक और पेट की बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
टंकियों की सफाई का काम बजट न होने के कारण नहीं हो पा रहा था एक सीडब्लूआर को साफ करने में कम से कम 80 हजार रुपये और टंकी को साफ करने में 50 हजार का खर्च आता है। मगर अब बजट की समस्या नहीं है। होली के बाद रोस्टर के हिसाब से सभी टंकी और सीडब्लूआर की सफाई शुरू कर दी जाएगी। यह काम महीने भर में पूरा हो जाएगा। दतिया गेट फिल्टर के भूतल जलाशय की सफाई करा दी गई है।
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- कुलदीप सिंह, अधिशासी अभियंता जलसंस्थान।
ऐसे भरता है टंकियों में पानी
बबीना से आने वाले पानी को पहले अलग- अलग स्थानों पर स्थापित सीडब्लूआर (भूतल जलाशय) के पास स्थापित जोनल पंपिंग स्टेशन के माध्यम से ओवर हैड टैंक (पानी की टंकी) को भरा जाता है। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में जलापूर्ति की जाती है। महानगर में दरीगरान पंचवटी पर 1600 किलोलीटर क्षमता की एक, खंडेराव गेट पर 1500- 1500 किलोलीटर क्षमता की दो, तालपुरा व सागरगेट1800- 1800 किलोलीटर क्षमता की एक- एक, खुशीपुरा में1600 किलोलीटर क्षमता की एक, सिविल लाइन में 450 किलोलीटर क्षमता की एक, सीपरी बाजार में 900 किलोलीटर क्षमता की एक, आयुर्वेद मिशन कंपाउंड में 2500 किलोलीटर क्षमता की एक, खाती बाबा पर 2500 किलोलीटर क्षमता की एक, नगरा व पुलिया नंबर में 450- 450 किलोलीटर क्षमता की एक- एक व नरसिंह राव टौरिया पर 800 किलोलीटर क्षमता की एक टंकी स्थापित हैं।
‘दूषित पानी से पेट संबंधी कई बीमारियां हो सकती हैं। पीलिया, हेपेटाइटिस जैसे रोग भी हो सकते हैं। इसलिए साफ पानी ही पीना चाहिए। बेहतर है कि पानी को उबाल कर पिएं ’
डॉ.डीएस गुप्ता, फिजीशियन जिला अस्पताल
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महानगर की आबादी लगभग 5.90 लाख है। इनमें चार लाख से अधिक लोगों को महानगर के अलग- अलग स्थानों पर बनीं 13 पानी की टंकियों से पानी उपलब्ध कराया जाता है। टंकियों को भरने के लिए पास ही भूतल जलाशय बनाए गए हैं। हर साल टंकी और सीडब्लूआर (भूतल जलाशय) की सफाई होना चाहिए, मगर पिछले तीन साल से यह काम भी नहीं हो रहा है। दूषित पेयजल की वजह से झांसी में लोगों में संक्रामक और पेट की बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
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टंकियों की सफाई का काम बजट न होने के कारण नहीं हो पा रहा था एक सीडब्लूआर को साफ करने में कम से कम 80 हजार रुपये और टंकी को साफ करने में 50 हजार का खर्च आता है। मगर अब बजट की समस्या नहीं है। होली के बाद रोस्टर के हिसाब से सभी टंकी और सीडब्लूआर की सफाई शुरू कर दी जाएगी। यह काम महीने भर में पूरा हो जाएगा। दतिया गेट फिल्टर के भूतल जलाशय की सफाई करा दी गई है।
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- कुलदीप सिंह, अधिशासी अभियंता जलसंस्थान।
ऐसे भरता है टंकियों में पानी
बबीना से आने वाले पानी को पहले अलग- अलग स्थानों पर स्थापित सीडब्लूआर (भूतल जलाशय) के पास स्थापित जोनल पंपिंग स्टेशन के माध्यम से ओवर हैड टैंक (पानी की टंकी) को भरा जाता है। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में जलापूर्ति की जाती है। महानगर में दरीगरान पंचवटी पर 1600 किलोलीटर क्षमता की एक, खंडेराव गेट पर 1500- 1500 किलोलीटर क्षमता की दो, तालपुरा व सागरगेट1800- 1800 किलोलीटर क्षमता की एक- एक, खुशीपुरा में1600 किलोलीटर क्षमता की एक, सिविल लाइन में 450 किलोलीटर क्षमता की एक, सीपरी बाजार में 900 किलोलीटर क्षमता की एक, आयुर्वेद मिशन कंपाउंड में 2500 किलोलीटर क्षमता की एक, खाती बाबा पर 2500 किलोलीटर क्षमता की एक, नगरा व पुलिया नंबर में 450- 450 किलोलीटर क्षमता की एक- एक व नरसिंह राव टौरिया पर 800 किलोलीटर क्षमता की एक टंकी स्थापित हैं।
‘दूषित पानी से पेट संबंधी कई बीमारियां हो सकती हैं। पीलिया, हेपेटाइटिस जैसे रोग भी हो सकते हैं। इसलिए साफ पानी ही पीना चाहिए। बेहतर है कि पानी को उबाल कर पिएं ’
डॉ.डीएस गुप्ता, फिजीशियन जिला अस्पताल