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Jhansi News: सीधी बुआई से कम लागत में तैयार हो रहा धान

Sun, 28 Jun 2026 02:20 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Updated Sun, 28 Jun 2026 02:20 AM IST
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Direct sowing of paddy is being done at low cost
झांसी। पानी की कमी से जूझ रहे झांसी में तेजी से धान का रकबा बढ़ रहा है। यह डीएसआर तकनीक (सीधे बुआई) की बदौलत हो रहा है। पिछले चार खरीफ सीजन से किसान इस तकनीकी का इस्तेमाल करके बुआई कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीकी में बिना नर्सरी तैयार किए सीधे खेत में बीज की रोपाई की जाती है। इसमें पानी की जरूरत कम होती है। लागत में कमी और पैदावार में इजाफा होता है।
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पिछले चार साल से यहां धान का रकबा साल दर साल बढ़ रहा है। कृषि विभाग के मुताबिक वर्ष 2022 में धान का रकबा करीब 25 हजार हेक्टेयर था, यह इस बार बढ़कर 63,606 हेक्टेयर हो गया। 38 हजार हेक्टेयर रकबा बढ़ने के साथ पैदावार का लक्ष्य 1,53,961 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया।
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कृषि वैज्ञानिक गुंजन गुलेरिया ने बताया कि सीधी बुआई वाली धान तकनीक से यहां रकबा बढ़ रहा है। अभी तक परंपरागत विधि से धान की पहले नर्सरी तैयार करने के बाद उसकी रोपाई होती थी। अब बीज की सीधे खेत में धान बुआई की जा सकती है। इससे लागत में कमी आती है। रोपाई करने पर धान में प्रति एकड़ करीब 5000 लीटर पानी लगता है, जबकि सीधी बुआई वाली धान 2000 लीटर पानी में तैयार होती है। मजदूरी की लागत भी बचती है।
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इन प्रजातियों का करें उपयोग
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गुंजन गुलेरिया ने बताया कि ऊषा बासमती-1985, डीआरआर-44, डीआरआर-42 और डीआरआर-58 जैसी प्रजातियों का उपयोग किसान कर सकते हैं। यह किस्में 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती हैं। 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार देती हैं। धान की बुआई मध्य जुलाई तक शुरू हो जाएगी।


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धान की बुआई के आंकड़ाें में इजाफा हो रहा है। किसानों को डीएसआर तकनीक से ही धान की फसल की बुआई करनी चाहिए। इससे पानी और लागत दोनों की बचत हाेती है।
कुलदीप मिश्रा
जिला कृषि अधिकारी



मोंठ-चिरगांव ब्लॉक के किसान कर रहे सर्वाधिक इस्तेमाल
झांसी। मोंठ, चिरगांव और बामौर ब्लॉक में पारंपरिक रोपाई के बजाय धान की सीधी बुआई तकनीक का किसान सर्वाधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। मोंठ ब्लॉक के समथर समेत आसपास के इलाकों में किसान बड़े पैमाने पर सीधी बुआई को प्राथमिकता दे रहे हैं। कम बारिश में यह तकनीक धान की अच्छी पैदावार देने में सक्षम है। इस विधि से उगाई धान की फसल सामान्य से सात से 10 दिन पहले तैयार हो जाती है।
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