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सही से जांच होती तो पकड़ में आ जाती गर्भस्थ शिशु की बीमारी
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झांसी। गर्भस्थ शिशु में जन्मजात विकार होने के बावजूद सामान्य की रिपोर्ट देने के मामले की जांच कर रही समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है। समिति ने माना है कि यदि गहनता से जांच की जाती तो जन्मजात समस्या को पकड़ा जा सकता था। अब रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन को कार्रवाई करनी है।
गलत रिपोर्ट देने के आरोपों की जांच कर रही समिति ने अल्ट्रासाउंड सेंटर से शिकायतकर्ता महिला के सभी पांचों अल्ट्रासाउंड की रिकॉर्डिंग मांगी थी। सूत्रों ने बताया कि सेंटर की तरफ से सिर्फ दो ही अल्ट्रासाउंड की रिकॉर्डिंग दी गई। समिति ने जांच करने के बाद माना है कि शिशु की अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट सामान्य दी गई। लेकिन यदि गहनता से जांच होती तो बच्चे की जन्मजात विकार का पहले ही पता लग जाता। जांच रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी गई है। अब प्रशासन ही इस मामले में कार्रवाई करेगा। फिलहाल समिति की रिपोर्ट में अल्ट्रासाउंड सेंटर के डॉक्टर फंसते नजर आ रहे हैं।
ये है पूरा मामला
खातीबाबा निवासी महिला ने डीएम से शिकायत की है कि सदर बाजार के एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर नौ महीने की गर्भावस्था के दौरान पांच अल्ट्रासाउंड कराए। हर बार डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड की सामान्य रिपोर्ट दी। मौखिक रूप से भी यह बताया कि गर्भावस्था में शिशु बिल्कुल सामान्य है। किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। मगर जब सिजेरियन डिलीवरी हुई तो बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि बच्चा कई प्रकार के जन्मजात विकास से ग्रसित है। अक्तूबर के पहले सप्ताह में डिलीवरी हुई और अगले ही दिन बच्चे की सांसें भी थम गईं। डिलीवरी करने वाले गायनिकोलॉजिस्ट के अस्पताल में पीडियाट्रीशियन ने यह भी बताया कि गर्भावस्था के तीन से चार महीने में होने वाले लेवल-2 के अल्ट्रासाउंड में जन्मजात विकार या डाउन सिंड्रोम के बारे में बताया जाना चाहिए था। मगर अल्ट्रासाउंड करने वाले डॉक्टर ने लेवल-2 का अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट भी सामान्य दी। साथ ही कहा कि शिशु बिल्कुल ठीक है और किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। इस दुखद घटना से दंपती को मानसिक आघात पहुंचा है। ऐसे में आरोपी अल्ट्रासाउंड सेंटर के डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
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गलत रिपोर्ट देने के आरोपों की जांच कर रही समिति ने अल्ट्रासाउंड सेंटर से शिकायतकर्ता महिला के सभी पांचों अल्ट्रासाउंड की रिकॉर्डिंग मांगी थी। सूत्रों ने बताया कि सेंटर की तरफ से सिर्फ दो ही अल्ट्रासाउंड की रिकॉर्डिंग दी गई। समिति ने जांच करने के बाद माना है कि शिशु की अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट सामान्य दी गई। लेकिन यदि गहनता से जांच होती तो बच्चे की जन्मजात विकार का पहले ही पता लग जाता। जांच रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी गई है। अब प्रशासन ही इस मामले में कार्रवाई करेगा। फिलहाल समिति की रिपोर्ट में अल्ट्रासाउंड सेंटर के डॉक्टर फंसते नजर आ रहे हैं।
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ये है पूरा मामला
खातीबाबा निवासी महिला ने डीएम से शिकायत की है कि सदर बाजार के एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर नौ महीने की गर्भावस्था के दौरान पांच अल्ट्रासाउंड कराए। हर बार डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड की सामान्य रिपोर्ट दी। मौखिक रूप से भी यह बताया कि गर्भावस्था में शिशु बिल्कुल सामान्य है। किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। मगर जब सिजेरियन डिलीवरी हुई तो बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि बच्चा कई प्रकार के जन्मजात विकास से ग्रसित है। अक्तूबर के पहले सप्ताह में डिलीवरी हुई और अगले ही दिन बच्चे की सांसें भी थम गईं। डिलीवरी करने वाले गायनिकोलॉजिस्ट के अस्पताल में पीडियाट्रीशियन ने यह भी बताया कि गर्भावस्था के तीन से चार महीने में होने वाले लेवल-2 के अल्ट्रासाउंड में जन्मजात विकार या डाउन सिंड्रोम के बारे में बताया जाना चाहिए था। मगर अल्ट्रासाउंड करने वाले डॉक्टर ने लेवल-2 का अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट भी सामान्य दी। साथ ही कहा कि शिशु बिल्कुल ठीक है और किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। इस दुखद घटना से दंपती को मानसिक आघात पहुंचा है। ऐसे में आरोपी अल्ट्रासाउंड सेंटर के डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
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