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जागेंगे देव, गूंजेंगीं शहनाइयां

Thu, 07 Nov 2019 01:54 AM IST
झांसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Thu, 07 Nov 2019 01:54 AM IST
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Devothan Ekadashi festival tomorrow, gods will wake up

आठ नवंबर दिन शुक्रवार को देवोत्थान एकादशी का त्योहार मनाया जाएगा। इस पर्व पर प्रत्येक घरों में गन्नों के मंडप सजाए जाएंगे। इनकी पूजा उपासना कर भगवान विष्णु का जागरण किया जाएगा। पर्व को लेकर महानगर के सभी घरों में तैयारियां शुरू हो गई है।, वहीं बाजार में भी इंदरगढ़ और गोराघाट सहित कई इलाकों से मीठे गन्ने बाजार में बिकने के लिए आ चुके है।

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बुंदेलखंड में देवोत्थान एकादशी की पूजा में गन्नों का बड़ा महत्व होता है। भगवान की पूजा में इनको अर्पण तो किया ही जाता है, साथ ही तीन, पांच और ग्यारह गन्नों का मंडप भी तैयार किया जाता है। इसके बाद गन्नों की पूजा कर भगवान विष्णु का जागरण किया जाता है। साथ ही श्रद्धालु उठो देव, बैठो देव अंगुरिया चटकाओ देव... का भी गायन करते है।
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धार्मिक विद्वानों के अनुसार गन्ना सेहत के लिए बेहद सेहतमंद होता है। कार्तिक मास में गन्ना की कटाई शुरू होती है। गन्ना से गुड़ बनता है, जिसके सेवन से सर्दी नहीं सताती है। इस वजह से किसान गन्ने की कटाई से पहले गन्ना की पूजा करते है और काटते हैं।
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जिला धर्माचार्य महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार देवोत्थान एकादशी जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते है, में गन्ना का पूजा में विशेष रूप से उपयोग होता है। गन्ना जो बहुत ही मीठा होता है, से गुड़ आदि बनता है, जो सभी शुभ कार्य में उपयोग होता है। इनके अनुसार एकादशी पर पूजा का मुहूर्त शाम 5: 48 मिनट से शुरू हो जाएगा। इस दौरान उत्तराभाद्र पद नक्षत्र रहेगा।

बाजार में बिकने के लिए आए गन्ने
महानगर के सभी छोटे बडे़ बाजारों में मध्य प्रदेश के गन्ने आ चुके हैं। इनमें कई प्रजातियां है, जिनमें रसगुल्ला प्रमुख है। गन्ना व्यापारी जीतेश विश्वकर्मा के अनुसार बाजार में इंदरगढ़, गोराघाट और उसके आसपास के इलाकों में पैदावार होने वाले गन्नें आते है। बाजार में पांच गन्नें सौ से 150 रुपये के बीच बेचा जा रहा है। त्योहार नजदीक आने पर अच्छे गुणवत्ता के गन्नों के भाव बढ़ सकते है। इनके अनुसार बाजार में बुधवार से ही तेजी आएगी।


पूजा में अर्पण करे सिंघाड़ा और केला भी
एकादशी पर भगवान की पूजा में सिंघाड़ा, बेर, मूली, गाजर, केला और बैगन सहित अन्य मौसमी सब्जियां अर्पित की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि सिंघाड़ा माता लक्ष्मी का सबसे प्रिय फल है। इसका प्रसाद लगाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है। वहीं भगवान विष्णु को केला अर्पित किया जाता है। इससे घर में हमेशा धन की वृद्धि रहती है। वहीं बैगन, मूली, गाजर स्वास्थ्य का प्रतीक है।

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