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बड़े भाई ने ही सुलाई थी मौत की नींद

Sun, 07 Feb 2016 01:08 AM IST
झांसी/ब्यूरो
झांसी/ब्यूरो Updated Sun, 07 Feb 2016 01:08 AM IST
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The older brother was already dead Sulai
झांसी। दो माह पहले सीपरी थाना क्षेत्र अंतर्गत कोट गांव में हुई ग्रामीण की हत्या का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। हत्या किसी और ने नहीं बल्कि उसके भाई ने ही की थी। हत्याभियुक्त साढ़े तीन एकड़ जमीन के लिए भाई के दामाद की हत्या करना चाहता था,
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लेकिन रात में पहचान न पाने के कारण सोते समय उसने अपने सगे भाई को कुल्हाड़ी से काट डाला था। पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए वह खुद ही मुकदमे का वादी बन गया था। इस मामले में पुलिस ने हत्याभियुक्त भाई को गिरफ्तार कर लिया है।
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एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ने बताया कि सीपरी बाजार थानांतर्गत गांव कोट निवासी 75 वर्षीय रतिराम यादव ने 27 नवंबर 2015 को सीपरी बाजार थाना पुलिस को बताया कि छोटा भाई जयराम यादव पंपसेट की रखवाली करने खेत पर गया था। चारपाई पर सोते समय अज्ञात व्यक्ति ने धारदार हथियार से प्रहार करके हत्या कर दी है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर हत्यारोपी की तलाश शुरू कर दी, मगर कोई सुराग नहीं लगा।
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विगत दिनों गांव में सुरागकशी करने पर पुलिस को हत्या के बाबत कुछ जानकारी मिली। जब पुलिस ने पुष्टि की तो परिवार के बीच में ही हत्याभियुक्त के होने के बारे में पता चला। पुलिस ने एक-एक करके परिजनों से पूछताछ की, जिसका वादी बने हत्याभियुक्त ने विरोध किया। इससे उसी पर पुलिस को शक हो गया और जांच शुरू कर दी।

शनिवार को थानाध्यक्ष कामता प्रसाद ने रतिराम यादव से कड़ाई से पूछताछ की तो उसने सच्चाई उगल दी। उसने बताया कि उसके भाई रमेश के कोई पुत्र नहीं है। वह उसकी साढ़े तीन एकड़ भूमि हथियाना चाहता था। इसके लिए उसने अपने पुत्र को गोद लेने का दबाव बनाया मगर भाई ने एक नहीं सुनी। रमेश ने अपनी बेटी के पति जगत सिंह को घर बुला लिया था ताकि भूमि उसे दे सके।

इससे वह आहत हुआ और दामाद जगत की हत्या का फैसला कर लिया। 26 नवंबर को उसे पता चला कि प्रतिदिन की तरह जगत सिंह पंपसेट पर सोया है। इस पर उसने कुल्हाड़ी से दनादन प्रहार करके मौत के घाट उतार दिया। जब उसने चादर हटाकर देखी तो दंग रह गया क्योंकि लाश जगत सिंह की नहीं छोटे भाई जयराम की थी। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी बरामद कर ली है।


हाथ में कुल्हाड़ी नहीं दिखने पर पकड़ा
एसएसपी ने बताया कि हत्यारों के बारे में कोई सुराग नहीं लगने पर पुलिस ने ग्रामीणों से पूछताछ की। इस दौरान पता चला कि रतिराम यादव का दूसरा नाम कुल्हाड़ी वाले बाबा भी है क्योंकि वह कुल्हाड़ी लेकर वर्षों से चल रहा है। पड़ताल करने पर पता चला कि जयराम की मौत के बाद से उसके हाथ में कुल्हाड़ी नहीं देखी गई है जिससे वह पुलिस के निशाने पर आ गया।
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