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विद्युत मीटर रीडर ने धोखाधड़ी करके रुपये हड़पे
झांसी / ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2015 11:03 PM IST
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बिल सुधारने के नाम पर एक मीटर रीडर ने उपभोक्ता के सत्ताइस हजार रुपये धोखाधड़ी करके हड़प लिए। पीड़ित उपभोक्ता ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर मीटर रीडर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में गुरसरांय के परकोटा निवासी सुशील कुमार माथुर ने बताया कि उसकी गुरसरांय के पुराने बस स्टैंड पर मेडिकल स्टोर की दुकान है। उन्होंने एक किलोवाट का कामर्शियल संयोजन ले रखा है। पिछले साल संबंधित क्षेत्र का मीटर रीडर दो अन्य लोगों के साथ उनकी दुकान पर आया और बोला कि मीटर में रीडिंग बहुत हो अधिक हो गई है, इस हिसाब से इक्कीस हजार रुपये बिल बनेगा। वह चाहे तो सत्रह हजार रुपये में पूरा मामला निपट जाएगा। वह मीटर रीडर के झांसे में आ गए और उन्होंने सत्रह हजार रुपये उसे दे दिए। जब कई महीनों तक उनका बिल ठीक नहीं हुआ तो उन्होंने मीटर रीडर से अपने रुपये वापस मांगे। इस पर मीटर रीडर ने कहा कि उनका बिल 45 हजार रुपये हो गया है। अगर वह दस हजार रुपये और दे दें तो उनका बिल पूरी तरह ठीक हो जाएगा। उन्होंने बिल ठीक होने की उम्मीद से दस हजार रुपये और दे दिए। मगर चार माह बाद भी जब बिल ठीक नहीं हुआ तो उन्होंने रुपये वापस मांगना शुरू किया तो मीटर रीडर कार्रवाई कराने की धमकी देने लगा है। उन्होंने जब दबाव डाला तो उसने एक हजार व तीन सौ रुपये की दो रसीदें थमा दीं। उन्होंने जब रसीदें विद्युत अधिकारी को दिखाईं तो उन्होंने बताया कि वह फर्जी हैं। बाद में पता लगा कि उक्त मीटर रीडर इसी तरह कई लोगों के हजारों रुपये हड़प चुका है।
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जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में गुरसरांय के परकोटा निवासी सुशील कुमार माथुर ने बताया कि उसकी गुरसरांय के पुराने बस स्टैंड पर मेडिकल स्टोर की दुकान है। उन्होंने एक किलोवाट का कामर्शियल संयोजन ले रखा है। पिछले साल संबंधित क्षेत्र का मीटर रीडर दो अन्य लोगों के साथ उनकी दुकान पर आया और बोला कि मीटर में रीडिंग बहुत हो अधिक हो गई है, इस हिसाब से इक्कीस हजार रुपये बिल बनेगा। वह चाहे तो सत्रह हजार रुपये में पूरा मामला निपट जाएगा। वह मीटर रीडर के झांसे में आ गए और उन्होंने सत्रह हजार रुपये उसे दे दिए। जब कई महीनों तक उनका बिल ठीक नहीं हुआ तो उन्होंने मीटर रीडर से अपने रुपये वापस मांगे। इस पर मीटर रीडर ने कहा कि उनका बिल 45 हजार रुपये हो गया है। अगर वह दस हजार रुपये और दे दें तो उनका बिल पूरी तरह ठीक हो जाएगा। उन्होंने बिल ठीक होने की उम्मीद से दस हजार रुपये और दे दिए। मगर चार माह बाद भी जब बिल ठीक नहीं हुआ तो उन्होंने रुपये वापस मांगना शुरू किया तो मीटर रीडर कार्रवाई कराने की धमकी देने लगा है। उन्होंने जब दबाव डाला तो उसने एक हजार व तीन सौ रुपये की दो रसीदें थमा दीं। उन्होंने जब रसीदें विद्युत अधिकारी को दिखाईं तो उन्होंने बताया कि वह फर्जी हैं। बाद में पता लगा कि उक्त मीटर रीडर इसी तरह कई लोगों के हजारों रुपये हड़प चुका है।
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