{"_id":"575b126a4f1c1b8c1b9c5167","slug":"czech-had-taken-out-bogus-bucks","type":"story","status":"publish","title_hn":"फर्जी चेक से निकाले थे रुपये ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
फर्जी चेक से निकाले थे रुपये
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jun 2016 12:48 AM IST
विज्ञापन
money, jhansi news
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन सोसाइटी लखनऊ के खाते से फर्जी चेक के जरिए 9.73 लाख रुपये निकालने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब पुलिस बैंक कर्मियों की मिलीभगत की आशंका के चलते जांच पड़ताल कर रही है।
एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि दो अक्तूबर 2015 में एसबीआई मुख्य शाखा के प्रबंधक गिरीश कुमार अग्रवाल ने सीपरी बाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि देवेंद्र कुमार पुत्र भग्गू निवासी पुरानी पसरट कोतवाली ने फर्जी तरह से खाता खोलकर राज्य सरकार की सोसाइटी उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के खाते से नौ लाख 73 हजार 450 रुपये निकाले हैं। इस मामले में पुलिस ने देवेंद्र कुमार, प्यारेलाल, उमाकांत, दीपक साहू व हामिद को नामजद किया।
इसकी विवेचना महेश चंद्र गौतम प्रभारी निरीक्षक अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दी गई। जांच के दौरान बैंक पता चला कि देवेंद्र के नाम से फर्जी खाता एसबीआई मुख्य शाखा में खोला गया। खाते में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन सोसाइटी के नाम से फर्जी चेक तैयार कर जमा कर दी गई।
विज्ञापन
इसके बाद इस खाते से हामिद पुत्र मकरानी निवासी बाहर दतिया गेट के खाते में 50 हजार, उमाकांत पुत्र अवध किशोर निवासी गुदरी बाजार कोतवाली के खाते में दो लाख, दीपक साहू पुत्र प्रेमनारायण साहू निवासी गुदरी बाजार के खाते में तीन लाख रुपये और प्यारेलाल पुत्र राजाराम निवासी अठोंदना रक्सा के खाते में 4.23 लाख रुपये चेक के माध्यम से स्थानांतरित किए गए।
खाते में रुपये आने के बाद आरोपियों ने एटीएम कार्ड के माध्यम से रुपये निकालना शुरू कर दिया। जब खाताधारक प्यारेलाल ने एटीएम के माध्यम से दिन में कई बार लगातार निकासी की, तो सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के मुंबई स्थित आफिस से इसके संबंध में तत्काल निर्देश दिए गए कि इस खाते के भुगतान को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया। प्यारेलाल ने बैंक के कहने के बावजूद खाते का सत्यापन नहीं कराया।
इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई। शुक्रवार को पुलिस टीम ने दीपक साहू पुत्र प्रेमनारायण साहू निवासी गुदड़ी बाजार को गिरफ्तार कर लिया। उससे की गई पूछताछ के बाद सच सामने आ गया। एसपी सिटी ने बताया कि इस मामले में बैंक कर्मियों की भी मिलीभगत हो सकती है। जांच की जा रही है।
विज्ञापन
एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि दो अक्तूबर 2015 में एसबीआई मुख्य शाखा के प्रबंधक गिरीश कुमार अग्रवाल ने सीपरी बाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि देवेंद्र कुमार पुत्र भग्गू निवासी पुरानी पसरट कोतवाली ने फर्जी तरह से खाता खोलकर राज्य सरकार की सोसाइटी उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के खाते से नौ लाख 73 हजार 450 रुपये निकाले हैं। इस मामले में पुलिस ने देवेंद्र कुमार, प्यारेलाल, उमाकांत, दीपक साहू व हामिद को नामजद किया।
विज्ञापन
इसकी विवेचना महेश चंद्र गौतम प्रभारी निरीक्षक अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दी गई। जांच के दौरान बैंक पता चला कि देवेंद्र के नाम से फर्जी खाता एसबीआई मुख्य शाखा में खोला गया। खाते में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन सोसाइटी के नाम से फर्जी चेक तैयार कर जमा कर दी गई।
विज्ञापन
इसके बाद इस खाते से हामिद पुत्र मकरानी निवासी बाहर दतिया गेट के खाते में 50 हजार, उमाकांत पुत्र अवध किशोर निवासी गुदरी बाजार कोतवाली के खाते में दो लाख, दीपक साहू पुत्र प्रेमनारायण साहू निवासी गुदरी बाजार के खाते में तीन लाख रुपये और प्यारेलाल पुत्र राजाराम निवासी अठोंदना रक्सा के खाते में 4.23 लाख रुपये चेक के माध्यम से स्थानांतरित किए गए।
खाते में रुपये आने के बाद आरोपियों ने एटीएम कार्ड के माध्यम से रुपये निकालना शुरू कर दिया। जब खाताधारक प्यारेलाल ने एटीएम के माध्यम से दिन में कई बार लगातार निकासी की, तो सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के मुंबई स्थित आफिस से इसके संबंध में तत्काल निर्देश दिए गए कि इस खाते के भुगतान को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया। प्यारेलाल ने बैंक के कहने के बावजूद खाते का सत्यापन नहीं कराया।
इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई। शुक्रवार को पुलिस टीम ने दीपक साहू पुत्र प्रेमनारायण साहू निवासी गुदड़ी बाजार को गिरफ्तार कर लिया। उससे की गई पूछताछ के बाद सच सामने आ गया। एसपी सिटी ने बताया कि इस मामले में बैंक कर्मियों की भी मिलीभगत हो सकती है। जांच की जा रही है।