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क्राइम - सावधान पुलिस बनकर कर रहे ठगी-City
Updated Tue, 23 Oct 2018 01:34 AM IST
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सावधान! पुलिस बनकर ठगी कर रहे बदमाश
झांसी। महानगर में सक्रिय गिरोह पुलिस बनकर महिलाओं के साथ ठगी कर रहे हैं, जो मौका पाकर जेवरात उतरवाकर फरार हो जाते हैं। जरा सी लापरवाही के चलते महिलाएं ठगी का शिकार हो रही हैं। जनवरी से अब तक करीब 28 महिलाओं को ठगी का शिकार बनाने वाला गिरोह अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। कई घटनाएं ऐसी भी हैं, जो पुलिस के सामने नहीं आ सकीं।
महानगर में एक अलग व नए प्रकार से ठगी करने वाला गिरोह सक्रिय हुआ है। गिरोह के सदस्य पुलिसकर्मी बनकर महिलाओं के साथ ठगी कर रहे हैं। इनके निशाने पर खासकर उम्रदराज महिलाएं हैं, जिनका पहले से पीछा करने के बाद रोककर पुलिसकर्मी बताकर लूट होने की जानकारी देते हैँ। उनसे कहा जाता है कि चंद मिनट पहले ही यहां महिला से लूट हुई है और आप जो जेवरात पहने हैं, उसको तत्काल उतारकर रख लें। यह सुनकर घबराई महिला तुरंत जेवरात उतारकर जैसे ही अपने पास रखती हैं, उसी दौरान जेवरात की बनाई गई थैली या पुड़िया को बड़े ही शातिर अंदाज में बदल दिया जाता है। महिलाएं जब घर पहुंचकर कागज में रखे गहने देखती हैं तो उन्हें खुद के ठगने का अहसास होता है। पिछले दस दिन के अंदर इस तरह की दो घटनाएं हो चुकी हैं। पहले भी इस तरह की हो चुकीं वारदातों से पुलिस परेशान है।
बताया गया है कि गिरोह के सदस्य बाइक सवार होते हैं। औसतन दो युवक एक टाइम में वारदात को करते हैं। उम्रदराज महिलाओं को निशाना बनाते हैं। महिलाओं को खुद का परिचय पुलिसवाले के रूप में देने के कारण महिलाएं कुछ बोल नहीं पातीं।
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पुलिस बरत रही लापरवाही
पुलिस ने ऐसे मामलों को गंभीरता से नहीं लिया है। कारण यह है कि ऐसी वारदातों की जानकारी होने के बाद भी पुलिस अब तक महिलाओं से गहने ठगने वाले युवकों का स्कैच नहीं बनवाया है। स्कैच तैयार होने से यह अंदाजा लगाना आसान हो जाता है कि यह कोई बाहरी गिरोह तो नहीं या फिर दूसरा गिरोह शहर में महिलाओं से आभूषण ठगने के लिए सक्रिय हो गया है।
बिना नंबर की गाड़ी से आते
पड़ताल दौरान बात सामने आई है कि गिरोह के सदस्य बाइक पर सवार रहते हैं। जाते समय दो महिलाओं ने पुलिस को बताया कि एक व्यक्ति हेलमेट लगाए था, साथ ही बाइक भी बिना नंबर थी। इसीलिए पुलिस को पड़ताल करने में भारी परेशानी का भी सामना करना पड़ा। किसी भी तरह का महत्वपूर्ण सुराग हाथ न लगने के कारण गिरोह के सदस्य पुलिस के हाथ नहीं आ पा रहे।
यह बरतें सावधानी
- किसी अंजान व्यक्ति के कहने पर व किसी के बुलाने पर न जाएं
- अगर कोई खुद को पुलिसवाला बता रहा है तो घबराएं नहीं जानकारी लें
- लूट की बात कहकर जेवरात उतरवाने की कहें तो सौ नंबर पर फोन लगाएं
- शक होने पर आसपास के थाने या फिर राहगीरों को बुलाकर मदद मांगें
हाल में ये बनीं ठगी का शिकार
- 19 अक्टूबर को सेंट्रल होटल के पीछे टंडन कंपाउंड निवासी भारत भूषण मेहता की पत्नी रेखा मेहता सुबह सवा आठ बजे इलाहाबाद बैंक के पास से निकल रही थीं। गिरोह के सदस्यों ने पुलिस बनकर रोकने के बाद ठगी करते हुए करीब पांच तोले के जेवरात उतरवा लिए थे।
- 30 सितंबर को चित्रा चौराहा के पास रहने वाली रेखा को लूट का भय दिखाकर रोक लिया था। इसके बाद जेवरात उतरवाकर ठगी कर ली थी। घर आकर उनको ठगी का शिकार होने की जानकारी हुई थी।
ऐसे मामलों में महिलाएं सतर्कता बरतें। अनजान व्यक्ति की बातों में न आएं। ऐसे लोगों की जानकारी तत्काल सौ नंबर पर फोन लगाकर या फिर पास में मौजूद पुलिस से करें। पुलिस ऐसे गिरोह के सदस्यों को जल्द गिरफ्तार कर जेल भेजेगी। - विनोद कुमार सिंह, एसएसपी
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झांसी। महानगर में सक्रिय गिरोह पुलिस बनकर महिलाओं के साथ ठगी कर रहे हैं, जो मौका पाकर जेवरात उतरवाकर फरार हो जाते हैं। जरा सी लापरवाही के चलते महिलाएं ठगी का शिकार हो रही हैं। जनवरी से अब तक करीब 28 महिलाओं को ठगी का शिकार बनाने वाला गिरोह अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। कई घटनाएं ऐसी भी हैं, जो पुलिस के सामने नहीं आ सकीं।
महानगर में एक अलग व नए प्रकार से ठगी करने वाला गिरोह सक्रिय हुआ है। गिरोह के सदस्य पुलिसकर्मी बनकर महिलाओं के साथ ठगी कर रहे हैं। इनके निशाने पर खासकर उम्रदराज महिलाएं हैं, जिनका पहले से पीछा करने के बाद रोककर पुलिसकर्मी बताकर लूट होने की जानकारी देते हैँ। उनसे कहा जाता है कि चंद मिनट पहले ही यहां महिला से लूट हुई है और आप जो जेवरात पहने हैं, उसको तत्काल उतारकर रख लें। यह सुनकर घबराई महिला तुरंत जेवरात उतारकर जैसे ही अपने पास रखती हैं, उसी दौरान जेवरात की बनाई गई थैली या पुड़िया को बड़े ही शातिर अंदाज में बदल दिया जाता है। महिलाएं जब घर पहुंचकर कागज में रखे गहने देखती हैं तो उन्हें खुद के ठगने का अहसास होता है। पिछले दस दिन के अंदर इस तरह की दो घटनाएं हो चुकी हैं। पहले भी इस तरह की हो चुकीं वारदातों से पुलिस परेशान है।
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बताया गया है कि गिरोह के सदस्य बाइक सवार होते हैं। औसतन दो युवक एक टाइम में वारदात को करते हैं। उम्रदराज महिलाओं को निशाना बनाते हैं। महिलाओं को खुद का परिचय पुलिसवाले के रूप में देने के कारण महिलाएं कुछ बोल नहीं पातीं।
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पुलिस बरत रही लापरवाही
पुलिस ने ऐसे मामलों को गंभीरता से नहीं लिया है। कारण यह है कि ऐसी वारदातों की जानकारी होने के बाद भी पुलिस अब तक महिलाओं से गहने ठगने वाले युवकों का स्कैच नहीं बनवाया है। स्कैच तैयार होने से यह अंदाजा लगाना आसान हो जाता है कि यह कोई बाहरी गिरोह तो नहीं या फिर दूसरा गिरोह शहर में महिलाओं से आभूषण ठगने के लिए सक्रिय हो गया है।
बिना नंबर की गाड़ी से आते
पड़ताल दौरान बात सामने आई है कि गिरोह के सदस्य बाइक पर सवार रहते हैं। जाते समय दो महिलाओं ने पुलिस को बताया कि एक व्यक्ति हेलमेट लगाए था, साथ ही बाइक भी बिना नंबर थी। इसीलिए पुलिस को पड़ताल करने में भारी परेशानी का भी सामना करना पड़ा। किसी भी तरह का महत्वपूर्ण सुराग हाथ न लगने के कारण गिरोह के सदस्य पुलिस के हाथ नहीं आ पा रहे।
यह बरतें सावधानी
- किसी अंजान व्यक्ति के कहने पर व किसी के बुलाने पर न जाएं
- अगर कोई खुद को पुलिसवाला बता रहा है तो घबराएं नहीं जानकारी लें
- लूट की बात कहकर जेवरात उतरवाने की कहें तो सौ नंबर पर फोन लगाएं
- शक होने पर आसपास के थाने या फिर राहगीरों को बुलाकर मदद मांगें
हाल में ये बनीं ठगी का शिकार
- 19 अक्टूबर को सेंट्रल होटल के पीछे टंडन कंपाउंड निवासी भारत भूषण मेहता की पत्नी रेखा मेहता सुबह सवा आठ बजे इलाहाबाद बैंक के पास से निकल रही थीं। गिरोह के सदस्यों ने पुलिस बनकर रोकने के बाद ठगी करते हुए करीब पांच तोले के जेवरात उतरवा लिए थे।
- 30 सितंबर को चित्रा चौराहा के पास रहने वाली रेखा को लूट का भय दिखाकर रोक लिया था। इसके बाद जेवरात उतरवाकर ठगी कर ली थी। घर आकर उनको ठगी का शिकार होने की जानकारी हुई थी।
ऐसे मामलों में महिलाएं सतर्कता बरतें। अनजान व्यक्ति की बातों में न आएं। ऐसे लोगों की जानकारी तत्काल सौ नंबर पर फोन लगाकर या फिर पास में मौजूद पुलिस से करें। पुलिस ऐसे गिरोह के सदस्यों को जल्द गिरफ्तार कर जेल भेजेगी। - विनोद कुमार सिंह, एसएसपी