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बिजली विभाग उपभोक्ताओं को बना रहा चोर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Mar 2017 12:34 AM IST
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बिजली विभाग उपभोक्ताओं को बना रहा चोर
- फोटो : demo
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विद्युत विभाग ने परमानेंट डिस्कनेक्शन (पीडी) के लिए आने वाले आवेदनों पर कनेक्शन काटने के बाद मीटर तो उतार लिए हैं, मगर अंतिम भुगतान न लेने के कारण उपभोक्ताओं के दुबारा कनेक्शन नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में वह विभाग की मर्जी से बिजली जलाते भी हैं तो पकड़े जाने पर उन्हें चोर बना दिया जाता है। इस समस्या से जूझ रहे पांच सौ से अधिक उपभोक्ता विद्युत कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
विभाग ने छनिया पुरा निवासी संजीव राय का मीटर 2014 में एक लाख रुपये बकाया होने पर उतार लिया था। उन्होंने बकाया किस्तों में जमा करना शुरू कर दिया। इसके बाद उनका कनेक्शन तो जोड़ दिया गया, लेकिन घर पर मीटर नहीं लगाया। इस बीच उपभोक्ता ने मीटर लगाने के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। अधिशासी अभियंता डीआर विमलेश ने संबंधित अवर अभियंता से भी यथा स्थिति देखकर कार्रवाई के लिए कहा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने मीटर लगाने के लिए जो प्रार्थना पत्र दिया था, उसकी भी रिसीविंग नहीं दी गई।
शनिवार को अचानक उपभोक्ता के घर विद्युत विजिलेंस की टीम पहुंच गई। घर में मीटर न लगा होने पर विजिलेंस ने केस बना दिया। मौके पर मौजूद रानीमहल के अवर अभियंता को उपभोक्ता ने मीटर लगाने का प्रार्थना पत्र भी दिखाया, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई। बाद में उपभोक्ता को 20 हजार रुपये शमन शुल्क जमा करना पड़ा। अब उपभोक्ता को एक साल का कर निर्धारण और बकाया राशि जमा करने को कहा गया है। इस हिसाब से उपभोक्ता को करीब एक लाख रुपये और जमा करने होंगे। इससे उपभोक्ता के होश उड़े हुए हैं। अगर समय रहते संबंधित अफसर पीडी बना देते या उसी कनेक्शन को मीटर लगाकर नियमित कर देते तो शायद इस उन्हें यह परेशानी न झेलनी पड़ती।
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इस संबंध में अधीक्षण अभियंता (नगर) राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि उपभोक्ता दस्तावेज लेकर मेरे पास आए तभी उसकी समस्या का हल निकाला जा सकता है।
ऐसे होता है परमानेंट डिस्कनेक्शन
परमानेंट डिस्कनेक्शन कराने के लिए उपभोक्ता को डेढ़ सौ रुपये की रसीद कटवानी पड़ती है। संबंधित सब स्टेशन के अवर अभियंता द्वारा उपभोक्ता से फार्म नौ (परमानेंट डिस्कनेक्शन फार्म) भरवाया जाता है। इसके बाद उपभोक्ता के मीटर को जांच के लिए भेज दिया जाता है। रिपोर्ट पर उपखंड अधिकारी घरेलू और अधिशासी अभियंता वाणिज्यिक और पावर संयोजन को परमानेंट डिस्कनेक्ट करने की अनुमति प्रदान करते हैं।
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विभाग ने छनिया पुरा निवासी संजीव राय का मीटर 2014 में एक लाख रुपये बकाया होने पर उतार लिया था। उन्होंने बकाया किस्तों में जमा करना शुरू कर दिया। इसके बाद उनका कनेक्शन तो जोड़ दिया गया, लेकिन घर पर मीटर नहीं लगाया। इस बीच उपभोक्ता ने मीटर लगाने के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। अधिशासी अभियंता डीआर विमलेश ने संबंधित अवर अभियंता से भी यथा स्थिति देखकर कार्रवाई के लिए कहा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने मीटर लगाने के लिए जो प्रार्थना पत्र दिया था, उसकी भी रिसीविंग नहीं दी गई।
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शनिवार को अचानक उपभोक्ता के घर विद्युत विजिलेंस की टीम पहुंच गई। घर में मीटर न लगा होने पर विजिलेंस ने केस बना दिया। मौके पर मौजूद रानीमहल के अवर अभियंता को उपभोक्ता ने मीटर लगाने का प्रार्थना पत्र भी दिखाया, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई। बाद में उपभोक्ता को 20 हजार रुपये शमन शुल्क जमा करना पड़ा। अब उपभोक्ता को एक साल का कर निर्धारण और बकाया राशि जमा करने को कहा गया है। इस हिसाब से उपभोक्ता को करीब एक लाख रुपये और जमा करने होंगे। इससे उपभोक्ता के होश उड़े हुए हैं। अगर समय रहते संबंधित अफसर पीडी बना देते या उसी कनेक्शन को मीटर लगाकर नियमित कर देते तो शायद इस उन्हें यह परेशानी न झेलनी पड़ती।
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इस संबंध में अधीक्षण अभियंता (नगर) राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि उपभोक्ता दस्तावेज लेकर मेरे पास आए तभी उसकी समस्या का हल निकाला जा सकता है।
ऐसे होता है परमानेंट डिस्कनेक्शन
परमानेंट डिस्कनेक्शन कराने के लिए उपभोक्ता को डेढ़ सौ रुपये की रसीद कटवानी पड़ती है। संबंधित सब स्टेशन के अवर अभियंता द्वारा उपभोक्ता से फार्म नौ (परमानेंट डिस्कनेक्शन फार्म) भरवाया जाता है। इसके बाद उपभोक्ता के मीटर को जांच के लिए भेज दिया जाता है। रिपोर्ट पर उपखंड अधिकारी घरेलू और अधिशासी अभियंता वाणिज्यिक और पावर संयोजन को परमानेंट डिस्कनेक्ट करने की अनुमति प्रदान करते हैं।