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जर्जर भवन में जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर बच्चे
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झांसी। लक्ष्मीबाई कन्या पाठशाला बेसिक शिक्षा के स्कूल की बदहाली का जीता जागता नमूना है। जर्जर भवन जो सालों से उसी हाल में है उसके सुधार के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहा है। कई बार शिकायती पत्र और जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद भी स्कूल में किसी भी प्रकार का कोई काम नहीं किया गया है।
कोतवाली स्थित लक्ष्मीबाई कन्या पाठशाला जर्जर स्थिति में है। शिक्षा के भवन की यह दयनीय स्थिति अभी से नहीं कुछ 10-12 साल पहले से है। हर साल स्कूलों के रख-रखाव के लिए आने वाले पैसों से स्कूल में रंगाई- पुताई और लेखन का कार्य तो स्कूल द्वारा करवा दिया जाता है लेकिन भवन निर्माण का काम प्रशासन द्वारा आज तक नहीं करवाया गया। स्कूल की स्थिति इस कदर दयनीय है कि बच्चे कमरे में बैठकर नहीं पढ़ सकते, मजबूरन उन्हें जमीन पर बैठकर ही पढ़ना पड़ता है। और स्कूल का मैदान भी जहां बच्चे बैठकर पढ़ते है वह भी ऊबड़-खाबड़ पड़ा है। शिक्षकों और बच्चों की एक ही गुजारिश है कि भवन निर्माण ना सही कम से कम मैदान ही सही करवा दिया जाए। प्राथमिक विद्यालय गणेश बाजार के बच्चों को भी इसी स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया है। एक वक्त पर इस स्कूल की दो मंजिला इमारत हुआ करती थी जिसमें गायन-वादन की कक्षाएं भी हुआ करती थीं। 108 बच्चों के छात्रांकन वाले इस स्कूल में बच्चों के पढ़ने के लिए महज दो कमरे ही मौजूद है जिसमें से अब कोई भी सुरक्षित नहीं है। स्कूलों में सफाई कर्मी तक नहीं आते, लेकिन इतनी दयनीय स्थिति के बाद भी बच्चे प्रतिदिन स्कूल आते हैं और शिक्षिकाएं पढ़ाती भी हैं।
भवन की अनुमानित कीमत बहुत ज्यादा और उचित मूल्यांकन ना हो पाने के कारण इसका निर्माण कार्य लंबित हो चल रहा था। भवन गिराने का कार्य अगले सप्ताह तक प्रारंभ हो जाएगा। - वेदराम, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी
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कोतवाली स्थित लक्ष्मीबाई कन्या पाठशाला जर्जर स्थिति में है। शिक्षा के भवन की यह दयनीय स्थिति अभी से नहीं कुछ 10-12 साल पहले से है। हर साल स्कूलों के रख-रखाव के लिए आने वाले पैसों से स्कूल में रंगाई- पुताई और लेखन का कार्य तो स्कूल द्वारा करवा दिया जाता है लेकिन भवन निर्माण का काम प्रशासन द्वारा आज तक नहीं करवाया गया। स्कूल की स्थिति इस कदर दयनीय है कि बच्चे कमरे में बैठकर नहीं पढ़ सकते, मजबूरन उन्हें जमीन पर बैठकर ही पढ़ना पड़ता है। और स्कूल का मैदान भी जहां बच्चे बैठकर पढ़ते है वह भी ऊबड़-खाबड़ पड़ा है। शिक्षकों और बच्चों की एक ही गुजारिश है कि भवन निर्माण ना सही कम से कम मैदान ही सही करवा दिया जाए। प्राथमिक विद्यालय गणेश बाजार के बच्चों को भी इसी स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया है। एक वक्त पर इस स्कूल की दो मंजिला इमारत हुआ करती थी जिसमें गायन-वादन की कक्षाएं भी हुआ करती थीं। 108 बच्चों के छात्रांकन वाले इस स्कूल में बच्चों के पढ़ने के लिए महज दो कमरे ही मौजूद है जिसमें से अब कोई भी सुरक्षित नहीं है। स्कूलों में सफाई कर्मी तक नहीं आते, लेकिन इतनी दयनीय स्थिति के बाद भी बच्चे प्रतिदिन स्कूल आते हैं और शिक्षिकाएं पढ़ाती भी हैं।
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भवन की अनुमानित कीमत बहुत ज्यादा और उचित मूल्यांकन ना हो पाने के कारण इसका निर्माण कार्य लंबित हो चल रहा था। भवन गिराने का कार्य अगले सप्ताह तक प्रारंभ हो जाएगा। - वेदराम, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी
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