{"_id":"0098854b81592d6d9f25dc9dfdc055ac","slug":"childhood-malnutrition-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुपोषण का शिकार बचपन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुपोषण का शिकार बचपन
झांसी / ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2015 11:34 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाल विकास विभाग ने सोलह कुपोषित बच्चे चिह्नित किए हैं। विभाग ने कुपोषण दूर करने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं। बच्चों को मेडिकल कालेज एनआरसी में भेजने की तैयारी है। साथ ही पुष्टाहार भी उपलब्ध करा दिया गया है।
बच्चों के समुचित विकास में कुपोषण सबसे बड़ी बाधा है। समुचित खानपान का अभाव व गंदगी की वजह से बच्चे तेजी से इसकी चपेट में आ जाते हैं। बाल विकास विभाग द्वारा नुमाइश ग्राउंड में डेरा डाले घुमंतु जाति के 38 परिवार चिह्नित किए हैं। इन परिवारों में 24 बच्चे हैं। इनमें से जांच में 16 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। इनका वजन मानक से कम निकला तथा सेहत भी अच्छी नहीं पाई गई। विभाग द्वारा बच्चों के परिवारों को पुष्टाहार उपलब्ध करा दिया गया है। इन्हें मेडिकल कालेज भेजा जा रहा है। यहां कुपोषण दूर के लिए बनी विशेष यूनिट एनआरसी (कुपोषण पुनर्वास केंद्र) में बच्चों का 14 दिन इलाज होगा। इस अवधि में बच्चों को कुपोषण मुक्त कर दिया जाएगा। इस दौरान संबंधित परिवारों को सौ रुपये प्रतिदिन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। जबकि, परिवार के अन्य सदस्यों के लिए स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा, जिनमें उनकी जांच होगी, साथ ही आवश्यकतानुसार इलाज भी किया जाएगा।
विज्ञापन
बच्चों के समुचित विकास में कुपोषण सबसे बड़ी बाधा है। समुचित खानपान का अभाव व गंदगी की वजह से बच्चे तेजी से इसकी चपेट में आ जाते हैं। बाल विकास विभाग द्वारा नुमाइश ग्राउंड में डेरा डाले घुमंतु जाति के 38 परिवार चिह्नित किए हैं। इन परिवारों में 24 बच्चे हैं। इनमें से जांच में 16 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। इनका वजन मानक से कम निकला तथा सेहत भी अच्छी नहीं पाई गई। विभाग द्वारा बच्चों के परिवारों को पुष्टाहार उपलब्ध करा दिया गया है। इन्हें मेडिकल कालेज भेजा जा रहा है। यहां कुपोषण दूर के लिए बनी विशेष यूनिट एनआरसी (कुपोषण पुनर्वास केंद्र) में बच्चों का 14 दिन इलाज होगा। इस अवधि में बच्चों को कुपोषण मुक्त कर दिया जाएगा। इस दौरान संबंधित परिवारों को सौ रुपये प्रतिदिन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। जबकि, परिवार के अन्य सदस्यों के लिए स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा, जिनमें उनकी जांच होगी, साथ ही आवश्यकतानुसार इलाज भी किया जाएगा।
विज्ञापन