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तीनों के शव घर आते ही मच गया कोहराम, सैकड़ों लोगों ने दी अंतिम विदाई

Tue, 25 May 2021 01:10 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 25 May 2021 01:10 AM IST
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child and father cremated, wait for  postmartem report
तीनों के शव घर आते ही मच गया कोहराम, सैकड़ों लोगों ने दी अंतिम विदाई
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रानीपुर। कस्बे में रहीस यादव और उसके दो बच्चे हर्ष और अंश की मौत की गुत्थी अभी भी नहीं सुलझ पाई है। सोमवार को मऊरानीपुर में तीनों के शवों का पोस्टमार्टम किया गया। अभी उसकी रिपोर्ट नहीं आई है। पोस्टमार्टम के बाद तीनों के शव वाहन से घर लाए गए। शव जैसे ही घर पहुंचे तो पूरा हुजूम उमड़ पड़ा। बच्चों का शव गाड़ी से उतरते ही मां अर्चना देवी तो उनसे चिपक कर दहाड़े मारकर रोने लगी। बच्चों की दादी और चाची चीख मारकर रो रही थीं। इससे वहां पर हर किसी की आंखें नम हो गईं। बाद में तीनों के शव अंतिम संस्कार के लिए श्मशान ले जाए गए। वहां पर भी सैकड़ों लोगों ने उनको अंतिम विदाई दी।
मालूम हो कि शनिवार को रहीस यादव (45) अपने दो बेटों हर्ष (12) और अंश (नौ) को घर से कपड़े दिलाने के बहाने लेकर गया था। इसके बाद शाम तक तीनों घर नहीं लौटे तो घर की महिलाओं ने खेत गए छोटे भाई राजेंद्र सिंह यादव को दी। इस पर वह तुरंत खेत से लौट आए। उन्होंने मोहल्ले के लोगों के साथ कस्बे में आसपास तीनों की खोज की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। काफी रात होने पर वह लोग घर लौट आए। रिश्तेदारों में भी फोन कर पूछा कि तीनों आए तो नहीं हैं। कहीं आने की जानकारी न मिलने पर रविवार को फिर राजेंद्र के साथ अन्य रिश्तेदार भी खोजने निकले। कुछ लोगों ने बताया कि शाम को रहीस बच्चों के साथ लाडगंज के आगे केदारेश्वर मंदिर के पास जाते दिखे थे। इस पर लोग वहां पर पहुंचे तो कुएं की जगत और आसपास खून दिखाई दिया। इसके बाद अंदर झांककर देखा तो तीनों के शव उतरा रहे थे। इसके बाद पुलिस ने तीनों के शवों को कुएं से निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।
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घटना के बारे में परिवार के लोगों ने बच्चों की मां अर्चना देवी, दादी और चाची को भी नहीं बताया था। घर आने पर राजेंद्र सिंह से महिलाओं ने पूछा तो बताया कि वह लोग रिश्तेदार के घर चले गए हैं। कल आ जाएंगे। सोमवार को दोपहर बाद घर में लोगों की भीड़ जमा होने लगी। आसपास के रिश्तेदार भी घर पहुंच गए। इस पर उन लोगों को कोई अनहोनी होने का शक हुआ। महिलाओं ने उनको घटना की जानकारी दी। दोनों बच्चे की मौत की खबर लगते ही घर की महिलाएं चीखें मारकर रोने लगीं। मां, दादी और चाची को बेहोश हो गईं। किसी तरह मुंह में पानी डालकर उनको होश में लाया गया। तीनों के किसी तरह आंसू नहीं रुक रहे हैं। घर में दोनों बच्चे हर किसी के आंखों के तारे थे। अब उनकी मौत से घर भी सूना हो गया है। राजेंद्र के कोई बच्चा नहीं है। इसलिए चाचा और चाची भी दोनों बच्चों को अपने बेटों जैसा प्यार देते थे।
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सोमवार की शाम को श्मशान में दो चिताएं लगाईं गईं। एक चिता पर पिता और छोटे बेटे के शव को रखा गया और दूसरी चिता में बड़े बेटे का शव रखा गया। इसके बाद दोनों चिताओं को राजेंद्र ने मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां पर मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखें नम हो गईं।
शराब और गांजे का लती था रहीस यादव
रानीपुर। रहीस यादव शराब और गांजे का लती था। रोज नशे को लेकर ही उसका घर पर झगड़ा होता था। पत्नी भी उससे नशा छोड़ने की जिद करती थी। इसके बाद भी वह नहीं मानता था लेकिन वह दोनों बच्चों को बहुत चाहता था। कुछ लोगों का कहना है कि नशे की लत की वजह से ही उसने घटना को अंजाम दिया है। पहले उसने किसी तरह बच्चों की हत्या कर कुएं में फेंका होगा। इसके बाद उसने खुद आत्महत्या कर ली।
घर के आर्थिक हालात भी हैं ठीक
रानीपुर। रहीस यादव के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। दो भाइयों के पास 25 बीघे से अधिक खेती है। दोनों भाई मिलकर ही खेती करते थे। घर में पैसों की भी कमी नहीं थी। घर के लोगों का कहना है कि अभी गेहूं भी बेचा है। उसका पैसा भी मिला है।
मोबाइल घर पर ही छोड़कर गया था रहीस
शनिवार को दोपहर में बच्चों को घर से ले जाते वक्त रहीस यादव अपना मोबाइल भी घर पर छोड़ गया था। इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है कि घटना के बारे में पहले से ही उसने प्लान तैयार कर लिया था। मोबाइल साथ ले जाता तो तुरंत उसकी लोकेशन मिल जाती। इससे हो सकता है कि घटना न घटित हो पाती। पुलिस ने उसका मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस का कहना है कि कॉल डिटेल निकलवाकर छानबीन की जाएगी।
बच्चों के नाना ने लगाया हत्या का आरोप
रानीपुर। मृतक रहीश यादव के ससुर व नेपुरा के पूर्व प्रधान मूंगालाल यादव ने दामाद व दोनों मासूम नातियों की हत्या करने का आरोप लगाया है। उसने बताया कि 10 दिन पहले बड़ा नाती नैपुरा जिला महोबा मामा के यहां था। दामाद रहीस यादव उसे लिवा कर लाया। उसने यह भी बताया कि उसके यहां अभी शादी थी। दामाद ने कहा कि शादी पर आ जाएंगे। जब मृतक रहीस यादव के ससुर से पूछा गया कि किस आधार पर हत्या की आशंका जता रहे हैं तब उसने कहा कि पुलिस के समक्ष बताऊंगा।
कस्बे में लोग घटना को लेकर करते रहे तरह-तरह की चर्चा
हर कोई गम और गुस्से में नजर आया
अमर उजाला ब्यूरो
रानीपुर। कस्बे में सोमवार को हर तरफ दो बच्चों और पिता की मौत की घटना की चर्चा होती रही। हर कोई अपनी तरह से घटना को लेकर कयास लगाता रहा। कोई घटना को लेकर बच्चों के पिता को ही जिम्मेदार ठहराता रहा तो कोई हत्या का भी संदेह जताता रहा। कोरोना कर्फ्यू लगा होने की वजह से कस्बे में पहले से ही सन्नाटा पसरा हुआ है लेकिन दो बच्चों समेत तीन की मौत होने की वजह से हर कोई गम में नजर आया। तमाम लोग घटना को लेकर गुस्से में भी दिखे। लोगों का कहना है कि अभी तक कस्बे में इस तरह की कोई घटना नहीं हुई थी। पहली घटना से लोगों को हिलाकर रख दिया।
लोगों ने बताया कि रहीस यादव खेती किसानी करता था। वह शराब पीने का आदी था लेकिन किसी से लड़ाई झगड़ा भी नहीं करता था। हर किसी से उसकी बातचीत भी होती रहती थी। सभी से वह खुशमिजाजी से मिलता था। कोरोना काल में सभी लोग घरों में ही रह रहे हैं। इसलिए वह भी बाहर बहुत कम निकलता था। इस समय खेत भी खाली हैँ। इसलिए खेत भी बहुत कम जाता था। खेत में जो थोड़ा बहुत काम होता था वह उसका छोटा भाई राजेंद्र ही करता था। कुछ लोगों का कहना है कि वह घर से बच्चों को लेकर जब निकता था तो चेहरे से किसी तरह का तनाव में भी नहीं दिख रहा था। हर्ष और अंश भी पिता के साथ जाते समय खुश थे।
लोगों ने बताया कि रविवार की शाम को घटना की जानकारी मिलते ही मोहल्ले के कई घरों में तो खाना भी नहीं बना। महिलाओं की आंखों में से भी आंसू आ गए। उनका कहना था कि दो बच्चों की मौत होने के बाद अब मां अर्चना किसके सहारे जी पाएगी। महिलाएं घटना को लेकर पिता को ही जिम्मेदार ठहराती रहीं।

मंदिर की तरफ जाते हुए देखकर लोग टोक देते तो शायद बच जाती जान
रानीपुर। लाडगंज के आगे केदारेश्वर मंदिर की तरफ रहीस यादव को अपने दो बच्चों के साथ लोगों ने जाते हुए देखा था। उस समय लोगों ने सोचा की शायद वह बच्चों के साथ मंदिर में दर्शन के लिए जा रहा है। इसकी वजह से उसे किसी ने टोका भी नहीं। मंदिर के पास पुराना कुआं हैं लेकिन वहां पर बहुत ही कम लोग जाते हैं। कोरोना कर्फ्यू की वजह से और सन्नाटा रहता है। जिन लोगों ने उनको जाते देखा था उनका कहना है कि क्या मालूम था कि वह घटना को अंजाम देने के लिए जा रहा है। उनको देखने से जरा भी अंदाजा लग जाता तो घरवालों को सूचना दे देते। इस तरह से उनकी जान बच जाती। वह उनकी जान जाने से सभी लोग दुखी हैं। कुएं पर सन्नाटा पसरा है। वहां पर जगत पर अभी भी पड़ा खून घटना बयान कर रहा है।
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