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ओशो साधकों ने किया चक्रा, सूफी ध्यान
Sat, 16 Mar 2019 01:27 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Sat, 16 Mar 2019 01:27 AM IST
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osho chakra
- फोटो : demo
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शुक्रवार को सीपरी के पंडित विवाह घर में तीन दिवसीय ओशो ध्यान शिविर का शुभारंभ हुआ। इसमें पुणे के स्वामी भरत भारती ने साधकों को कुंडलिनी जागरण, सूफी ध्यान, चक्रा ध्यान आदि के अभ्यास कराए। उन्होंने कहा कि ध्यान करने से मानसिक तनाव और शारीरिक समस्याएं दूर होती हैं।
स्वामी भरत भारती ने कहा कि साधक की संकल्प शक्ति ध्यान के माध्यम से बढ़ती है। व्यक्ति में ऊर्जा का संचार बढ़ता है। ध्यान अलग से करने की जरूरत नहीं है। अपने कार्य को ध्यान में परिवर्तित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मानसिक और शारीरिक ऊर्जा प्राप्त करने और वृद्धि के लिए ध्यान सबसे सहज और सरल उपाय है। आज संपूर्ण विश्व ध्यान को आत्मसात कर चुका है। कई देशों में लाखों - करोड़ों की संख्या में लोग ओशो के ध्यान शिविरों में निरंतर हिस्सा ले रहे हैं।
उन्होंने शिविर में ओशो द्वारा रचित अनेक ध्यान विधियों का अभ्यास कराया। इनमें सक्रिय ध्यान, जिवरिश, मैं कौन हूं, सूफी ध्यान, चक्रा ध्यान आदि प्रमुख रहे। संध्या सत्संग में ओशो के संगीत पर साधकों ने ध्यान लगाया। स्वामी जी ने कहा कि मोबाइल के दुष्परिणामों से बचना चाहिए। इससे पहले मुख्य अतिथि अनुराधा शर्मा ने शिविर का शुभारंभ किया और कहा कि मनुष्य के जीवन में ध्यान का अहम महत्व है। प्राचीन भारत में कुंडलिनी जागरण पर विशेष बल दिया जाता रहा है। हमारे देश के कई हिस्सों में संत और ऋषि ध्यान के जरिए विश्व में सुख शांति का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। इस अवसर पर स्वामी पारितोष, स्वामी विवेक बोधि, स्वामी कल्याण भारती, मां प्रेम सहज, आनंद स्वामी, मां ओशिका, स्वामी आनंद परवाना, मां शांति, आभा, मां प्रेम छाया, मां प्रेम ऋतिका आदि मौजूद रहीं।
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स्वामी भरत भारती ने कहा कि साधक की संकल्प शक्ति ध्यान के माध्यम से बढ़ती है। व्यक्ति में ऊर्जा का संचार बढ़ता है। ध्यान अलग से करने की जरूरत नहीं है। अपने कार्य को ध्यान में परिवर्तित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मानसिक और शारीरिक ऊर्जा प्राप्त करने और वृद्धि के लिए ध्यान सबसे सहज और सरल उपाय है। आज संपूर्ण विश्व ध्यान को आत्मसात कर चुका है। कई देशों में लाखों - करोड़ों की संख्या में लोग ओशो के ध्यान शिविरों में निरंतर हिस्सा ले रहे हैं।
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उन्होंने शिविर में ओशो द्वारा रचित अनेक ध्यान विधियों का अभ्यास कराया। इनमें सक्रिय ध्यान, जिवरिश, मैं कौन हूं, सूफी ध्यान, चक्रा ध्यान आदि प्रमुख रहे। संध्या सत्संग में ओशो के संगीत पर साधकों ने ध्यान लगाया। स्वामी जी ने कहा कि मोबाइल के दुष्परिणामों से बचना चाहिए। इससे पहले मुख्य अतिथि अनुराधा शर्मा ने शिविर का शुभारंभ किया और कहा कि मनुष्य के जीवन में ध्यान का अहम महत्व है। प्राचीन भारत में कुंडलिनी जागरण पर विशेष बल दिया जाता रहा है। हमारे देश के कई हिस्सों में संत और ऋषि ध्यान के जरिए विश्व में सुख शांति का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। इस अवसर पर स्वामी पारितोष, स्वामी विवेक बोधि, स्वामी कल्याण भारती, मां प्रेम सहज, आनंद स्वामी, मां ओशिका, स्वामी आनंद परवाना, मां शांति, आभा, मां प्रेम छाया, मां प्रेम ऋतिका आदि मौजूद रहीं।
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