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खून के काले धंधे का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jun 2017 01:21 AM IST
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blood, jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी। शुक्रवार को पुलिस ने बड़ागांव थाना इलाके दिगारा में खून के काले धंधे का पर्दाफाश किया। एक मकान पर छापा मारकर दो लोगों को दबोच लिया। वहां छह लोगों का खून निकाला जा रहा था। गिरोह का सरगना भागने में कामयाब रहा। तीन पैकेट खून और 40 लीटर कच्ची शराब भी बरामद की गई।
शुक्रवार दोपहर एक बजे 100 नंबर पर फोन करके किसी ने पुलिस को सूचना दी कि दिगारा गांव में शराब पिलाकर लोगों को बेहोश करके उनका खून निकालने का धंधा चल रहा है। बड़ागांव थानाध्यक्ष सुनील कुमार और ड्रग इंस्पेक्टर उमेश कुमार भारती ने टीम बनाकर दिगारा स्थित अबरार के मकान में छापा मारा, जिसमें किराये पर रहने वाले झांसी निवासी अनूप गुप्ता खून निकालने का अवैध कारोबार चला रहा था।
अनूप मौके से फरार हो गया, जबकि टीकमगढ़ निवासी अरविंद यादव और गाजियाबाद निवासी मनीष कटारया पकड़े गए। मौके पर छह लोग पन्ना निवासी राजकुमार, मऊरानीपुर निवासी ओम प्रकाश, पिछोर ग्वालियर निवासी रामबाबू, मऊरानीपुर निवासी दिलीप अहिरवार, दतिया निवासी पंजाब अहिरवार, माधौगढ़ जालौन निवासी पवन सेंगर मिले, जिनका खून निकाला जा रहा था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 342/504/506 व आबकारी अधिनियम 18/27 तथा औषधि सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की।
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मेडिकल कालेज क्षेत्र तक फैला नेटवर्क
पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों ने बताया कि वह मेडिकल के पास एक कबाड़ी की दुकान से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। निशाने पर गरीब तबके के लोग होते थे। यहां से वे उन्हें दिगारा अपने साथ ले जाते थे। वहां उन्हें शराब पिलाई जाती थी। रक्त निकालने के बाद महज दो - तीन सौ रुपये थमा दिए जाते थे। जो तीन - चार दिन के अंतराल पर दूसरी बार रक्त देने की स्थिति में उन्हें मकान में बंधक बना लिया जाता था। गिरोह का सरगना स्कूटर की डिग्गी में खून के पैकेट लेकर सप्लाई के लिए जाता था। रोजाना चार - पांच पैकेट खून इकट्ठा कर लिया जाता था। खून कहां सप्लाई किया जाता था? इसकी जांच जारी है।
गहन जांच हो रही है
पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर रही है। खून निकालकर कहां - कहां सप्लाई किया जाता है? गिरोह में और कौन लोग शामिल हैं? यह धंधा एक ही स्थान पर होता है या अन्य और भी स्थानों पर खून निकाला जाता है? इन सब बिंदुओं पर पुलिस की जांच जारी है। सरगना की गिरफ्तारी के लिए भी दबिशें दी जा रही हैं।
- देवेश पांडेय, एसपी सिटी
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शुक्रवार दोपहर एक बजे 100 नंबर पर फोन करके किसी ने पुलिस को सूचना दी कि दिगारा गांव में शराब पिलाकर लोगों को बेहोश करके उनका खून निकालने का धंधा चल रहा है। बड़ागांव थानाध्यक्ष सुनील कुमार और ड्रग इंस्पेक्टर उमेश कुमार भारती ने टीम बनाकर दिगारा स्थित अबरार के मकान में छापा मारा, जिसमें किराये पर रहने वाले झांसी निवासी अनूप गुप्ता खून निकालने का अवैध कारोबार चला रहा था।
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अनूप मौके से फरार हो गया, जबकि टीकमगढ़ निवासी अरविंद यादव और गाजियाबाद निवासी मनीष कटारया पकड़े गए। मौके पर छह लोग पन्ना निवासी राजकुमार, मऊरानीपुर निवासी ओम प्रकाश, पिछोर ग्वालियर निवासी रामबाबू, मऊरानीपुर निवासी दिलीप अहिरवार, दतिया निवासी पंजाब अहिरवार, माधौगढ़ जालौन निवासी पवन सेंगर मिले, जिनका खून निकाला जा रहा था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 342/504/506 व आबकारी अधिनियम 18/27 तथा औषधि सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की।
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मेडिकल कालेज क्षेत्र तक फैला नेटवर्क
पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों ने बताया कि वह मेडिकल के पास एक कबाड़ी की दुकान से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। निशाने पर गरीब तबके के लोग होते थे। यहां से वे उन्हें दिगारा अपने साथ ले जाते थे। वहां उन्हें शराब पिलाई जाती थी। रक्त निकालने के बाद महज दो - तीन सौ रुपये थमा दिए जाते थे। जो तीन - चार दिन के अंतराल पर दूसरी बार रक्त देने की स्थिति में उन्हें मकान में बंधक बना लिया जाता था। गिरोह का सरगना स्कूटर की डिग्गी में खून के पैकेट लेकर सप्लाई के लिए जाता था। रोजाना चार - पांच पैकेट खून इकट्ठा कर लिया जाता था। खून कहां सप्लाई किया जाता था? इसकी जांच जारी है।
गहन जांच हो रही है
पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर रही है। खून निकालकर कहां - कहां सप्लाई किया जाता है? गिरोह में और कौन लोग शामिल हैं? यह धंधा एक ही स्थान पर होता है या अन्य और भी स्थानों पर खून निकाला जाता है? इन सब बिंदुओं पर पुलिस की जांच जारी है। सरगना की गिरफ्तारी के लिए भी दबिशें दी जा रही हैं।
- देवेश पांडेय, एसपी सिटी